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Kota thermal : कोयला कम हुआ तो 30 फीसदी तक घटाया वि‍द्युुुत उत्‍पादन

70 फीसदी लोड पर ही चल रही हैं बाकी इकाई - टर्बाइन में कंपन बढऩे के बाद यूनिट को करना पड़ा बंद

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..कोटा थर्मल : कोयले की कमी को कम जरूरत बताकर छूपा रहे अधिकारी

कोटा . कोटा थर्मल में इलेक्ट्रिसिटी डिस्ट्रीब्यूशन जनरेटर ठीक होने के बाद तीसरी यूनिट चालू हुई तो टर्बाइन में कंपन बढऩे के कारण शुक्रवार को पहली यूनिट में उत्पादन बंद हो गया। इधर, कम जरूरत बताकर थर्मल को सिर्फ 70 फीसदी लोड पर ही चलाया जा रहा है।

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थर्मल में मंगलवार को इलेक्ट्रिसिटी डिस्ट्रिब्यूशन जनरेटर खराब होने से 210 मेगावाट क्षमता की तीसरी यूनिट में विद्युत उत्पादन ठप हो गया था। गड़बड़ी ठीक कर तीसरी यूनिट चालू किए 24 घंटे भी नहीं बीते कि शुक्रवार को 110 मेगावाट क्षमता की पहली यूनिट ठप हो गई।

गर्मी में भी बिजली की जरूरत नहीं
झुलसा देने वाली गर्मी में भी थर्मल की बाकी छह इकाइयों को महज ७० फीसदी क्षमता से ही चलाया जा रहा है। कार्यकारी मुख्य अभियंता के मुताबिक एलडी से बिजली की रिक्वायरमेंट कम है। हालांकि जुड़े सूत्रों ने बताया कि राज्य के सभी थर्मल पॉवर प्लांट में अधिकतम तीन दिन का कोयला शेष बचा है। इसलिए क्षमता से कम विद्युत उत्पादन कर रहे हैं।

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पहली यूनिट की टर्बाइन में अचानक कंपन ज्यादा बढ़ गया था। इसके बाद मेंटिनेंस के चलते यूनिट को बंद करना पड़ा। खराबी ठीक होने के बाद ही यूनिट चालू हो सकेगी।

एचबी गुप्ता, कार्यकारी मुख्य अभियंता, कोटा थर्मल

मंगलवार को ठप हो गई थी तीसरी यूनिट
इससे पहले बीते मंगलवार को कोटा थर्मल में इलेक्ट्रिसिटी डिस्ट्रिब्यूशन जनरेटर खराब होने से 210 मेगावाट क्षमता की तीसरी यूनिट अचानक ठप हो गई थी। ठेका मजदूरों की लापरवाही और इक्युपमेंट की रूटीन मेंटीनेंस नहीं होने से थर्मल को करीब 40 लाख का चूना लगा था।

कोल क्रेशर भी जला

कोटा थर्मल में लापरवाही का आलम यह है कि ओवर टाइम बचाने के चक्कर में तकनीकी रूप से दक्ष कर्मचारियों को इधर-उधर तैनात कर विद्युत उत्पादन का अधिकांश काम ठेका श्रमिकों के हवाले कर दिया गया है। जिसके चलते केएसटीपीएस में आए दिन हादसे हो रहे हैं। बीते सप्ताह दूसरी विद्युत उत्पादन इकाई के लिए कोयला पीसने वाले कोल क्रेशर 4 बी में भी आग लग गई थी। समय रहते दमकल ने आग पर काबू पा लिया नहीं तो बड़ा हादसा हो सकता था।