कोटा.दीपावली का पर्व निकलने के बाद भी शैक्षणिक नगरी का प्रदूषण अपने सामान्य स्तर से करीब दोगुना बना हुआ है। विशेषज्ञ इसका कारण पटाखों को कम और शहर में चल रहे बड़े पैमाने पर विकास कार्य स्थलों से उड़ती धूल को अधिक मान रहे है।
विशेषज्ञों का मानना है कि कोटा में वर्तमान में बड़े पैमाने पर निर्माण कार्य चल रहे हैं। ऐसे में जगह-जगह टूट-फूट के कारण मलबा बिखरा हुआ है, जो हवा के साथ उड़ता रहता है। इसके अलावा सड़कों पर निर्माण कार्य के सड़क के दोनों तरफ और डिवाइडर किनारे धूल वाहनों के साथ दिनभर उड़ती रहती हैं। ऐसे में हमेशा वातावरण में धूल का गुबार उड़ता रहता है।
ठेकेदारों की लापरवाहीशहर में हर ओर निर्माण कार्य चल रहे है, लेकिन ठेकेदार निर्माण कार्य स्थल पर मलबे को समय पर नहीं हटाते। इसके अलावा निर्माण कार्य के चारों ओर भी ठेकेदार धूल उड़ने से रोकने के लिए पर्दा नहीं लगाते। इसके अलावा बारीक धूल पर पानी का छिड़काव भी नहीं करते। ऐसे में वातावरण में घूल का गुबार बना रहता है, जो प्रदूषण बढ़ा रहा है।
नगर निगम नहीं चला रही मिस्ट ब्लोअर गन
शहर में प्रदूषण को कम करने के लिए नगर निगम को पानी का छिड़काव करना चाहिए। इसके लिए निगम के पास मिस्ट ब्लोअर गन भी है। मिस्ट ब्लोअर गन पानी के बड़े फव्वारे की तरह पानी की बेहद बारीक बूंदे का स्प्रे करती है। इससे वातावरण में उड़ती धूल पानी के साथ बैठ जाती है और वातावरण में उड़ती धूल कम हो जाती है। इसके अलावा यूआईटी समेत निर्माण एजेंसियों को भी ठेकेदारों को निर्माण स्थलों पर धूल की रोकथाम के लिए व्यवस्था करनी चाहिए।
उड़ती धूल पर करें छिड़काव
इसके अलावा लोगों को भी अपने आसपास के क्षेत्र में बारीक धूल पर पानी का छिड़काव करना चाहिए। इससे धूल नहीं उड़ने से वातावरण में प्रदूषण में कमी आएगी।
धूल फांकने को मजबूर कोटा
शहर में पिछले करीब दो वर्ष से निर्माण कार्य व सीवरेज के कार्य चल रहे है। इसके चलते हर ओर धूल उड़ रही है। लोगों की तमाम शिकायतों के बावजूद उड़ती धूल को रोकने के लिए कोई इंतजाम नहीं होने से शहरवासी धूल फांकने को मजबूर है। ऐसे में श्वास रोगियों को भारी परेशानी हो रही है।यह है मापदंड –
एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) शून्य से 50 के बीच एक्यूआई को ‘अच्छा’, 51 से 100 के बीच को ‘संतोषजनक’, 101 से 200 को ‘मध्यम’, 201 से 300 को ‘खराब’, 301 से 400 को ‘बहुत खराब’ और 401 से 500 के बीच एक्यूआई को ‘गंभीर’ माना जाता है. जबकि इसके ऊपर खतरनाक स्थिति मानी जाती है।
कोटा के प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड क्षेत्रीय अधिकारी अमित सोनी ने बताया कि कोटा में पटाखों से कम और उड़ती धूल से ज्यादा प्रदूषण है। ऐसे में उड़ती धूल पर नियंत्रण करना होगा। इसके लिए पानी का छिड़काव करना जरूरी है। मिस्ट गन से छिड़काव व निर्माण स्थलों व सड़कों पर फैली धूल को नियमित साफ करना हाेगा। लोगों को भी अपने आसपास धूल पर छिड़काव करना चाहिए।