
स्कूल के व्याख्याता ने कबाड़ से भरे कक्षों को बना दिया ' कला की प्रयोगशाला Ó
कोटा. कुछ कर दिखाने की चाह ें हो तो न समय की सीमाएं बाधक बनती है न ही आर्थिक परेशानी। कार्य करने की लगन व मेहनत हर मुश्किल को आसां करती चली जाती है। एेसा ही उदाहरण राजकीय बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय बोरखेड़ा में चित्रकला के व्याख्याता राकेश कुमार शर्मा ने पेश किया है। उन्होंने कबाड़े से कमाल दिखाकर कबाड़े भरे कक्ष को कला की प्रयोगशाला बना दिया। अब कला की बालिकाएं जब भी स्कूल आएंगी इसमें अपने प्रयोग कर सकेंगी।
इस तरह से सजा कलाकक्ष
विद्यालय में दो कक्षांें में पुराना बेकार सामान पड़ा हुआ था। कमरे मंें जगह जगह प्लास्टर उखड़ा हुआ था। दोनों कमरों को खाली करवाया गया व आवश्यकतानुसार इसकी मरम्मत करवाई। इसके बाद राकेश खुद अपने मिशन में जुट गए व कमरे में रंग रोगन किया कर चित्रकारी की। कबाड़े में निकली कुछ वस्तुओं को कलात्मक रूप दिया। टूटे फर्नीचर के फ्रेम बनाए व पेंटिंग की। हाथों से बनाई फ्रे म की हुई पेंटिंग्स से दीवारों को कलात्मक रूप दिया। सीन सिन्हेरी व बालिकाओं के अध्ययन की दृष्टि उपयोगी तस्वीरें बनाकर दीवारों पर लगाकर कक्षों को कला-कक्ष बना दिया। कबाड़ से ही नई अन्य कलाकृतियां भी तैयार की।
हर दिन दिए ढाई से 3 घंटे
विद्यालय को एक माह से कोविड टेस्ट सेंटर बनाया गया है। इसमें व्यवस्थाओं के लिए चित्रकला व्याख्याता राकेश कुमार शर्मा की ड्यूटी लगी हुई है। राकेश बताते हैं कि सेंटर पर जांच इत्यादि के सेंपल लिए जाते हैं, यह कार्य दोपहर 12 से 12.30 बजे तक पूर्ण हो जाता है।इसके बाद जो ढाई से तीन घंटें मिलते हैं, उसी में वह यह कार्य कर रहे हैं। स्कूल प्राचार्य सुनीता साहू बताती है कि कलाकक्ष से चित्रकला की छात्राओं पढ़ाई में मदद मिलेगी। छात्राओं के लिए आवश्यक सामग्री की व्यवस्था भी करेंगे।
Published on:
26 May 2021 10:43 pm
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