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ट्रोमा सेंटर खोलने का आदेश निकाल भूली सरकार…

ना बजट मिला, ना भूमि चिह्निकरण

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कोटा

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Anil Sharma

Jan 02, 2021

ramganjmandi, kota

file photo

रामगंजमंडी. राज्य सरकार के चिकित्सा विभाग ने लॉकडाउन के अप्रैल माह में रामगंजमंडी व इटावा में ट्रोमा सेंटर यूनिट कायम करने के आदेश निकाले थे। यह आदेश कागजी साबित होकर रह गए। नौ माह का समय बीत गया, लेकिन चिकित्सा विभाग की निर्माण यूनिट के अभियंता इसके लिए जगह का चिन्हिकरण तक करने नहीं आए। मजेदार बात यह है कि सरकार ने भी ट्रोमा यूनिट सेंटर के लिए बजट का आवंटन भी नहीं किया।
रामगंजमंडी व इटावा कोटा जिले के प्रमुख कस्बों के रूप में पहचाने जाते है। चिकित्सा विभाग की तरफ से कोटा जिले में इन दोनों स्थानों पर ट्रोमा सेंटर यूनिट की स्थापना करने के पीछे मंतव्य दुर्घटनाओं से हताहत होने वाले को तुरंत उपचार दिलाना व चिकित्सा उपचार मिलने में देरी से दुर्घटना में हताहत होने वालों मृत्यु को रोकना था। लॉकडाउन में निकले आदेशों की क्रियान्विति मामले में एक बार आए इन आदेशों के उपरांत दूसरा आदेश निकालने के विभाग की तरफ से कोई प्रयास नहीं किए गए।
आदेश निकले तो बंधे उम्मीद
राज्य सरकार के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के निदेशक की तरफ से निकले आदेश जब अखबारों की सुर्खियां बने तो लोगों को आस बंधी थी कि ट्रोमा सेंटर यूनिट खुलने के बाद उसमें कार्यरत हड्डी रोग विशेषज्ञों की सुविधा का लाभ लोगों को मिलेगा।
गौरतलब है कि रामगंजमंडी सामुदायिक चिकित्सालय में अभी हड्डी रोग विशेषज्ञ नहीं है। खनिज व धनिया मण्डी होने के कारण अक्सर हड्डी में चोटिल होने वाले मरीज यहां आते है। दुर्घटना में हाथ-पैर में चोटें आने के बाद ऐसे मरीजों को प्राथमिक उपचार कराने के बाद झालावाड़ व कोटा के निजी व सरकारी चिकित्सालयों में जाने के लिए आर्थिक व मानसिक रूप से परेशानी झेलनी पड़ती है। भाजपा सरकार के समय जब सत्ताधारी दल के तत्कालीन विधायक के समय हड्डी रोग विशेषज्ञ का पद सृजित करने की मांग उठी थी। उस समय भी विशेषज्ञ चिकित्सक की नियुक्ति नहीं हो पाई थी। लोगों को कांग्रेस राज में बिना मांगे ट्रोमा सेंटर यूनिट की सौगात जैसे आदेश तो मिल गए, लेकिन इनका क्रियान्वयन कब होगा। लोग इसका इंतजार कर रहे है।