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Happy Diwali-2022: दो करोड़ दीयों की रोशनी से नहाएगा चंबल के किनारे बसा कोटा शहर

Happy Diwali-2022: कोटा. विजयादशमी का पर्व मनाने के बाद अब शहरवासी पांच दिवसीय दीपों के महापर्व की तैयारियों में जुट गए हैं। घरों में देवी लक्ष्मी की अगवानी की तैयारियां हैं। बाजारों में भी खास उत्साह है। शहरवासी दो साल बाद एक बार फिर से अच्छी दिवाली की उम्मीद कर रहे हैं। इन्हीं उम्मीदों की रोशनी में शहर जगमगाएगा। रंग-बिरंगी रोशनी के संग इस वर्ष कम से कम करीब 2 करोड माटी के दीयों की रोशनी से शहर जगमगाएगा। दीपावली पर डिमांड को देखते हुए कुंभकार तैयारियों में जुट गए हैं।

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कोटा

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Hemant Sharma

Oct 09, 2022

Happy Diwali-2022: कोटा. विजयादशमी का पर्व मनाने के बाद अब शहरवासी पांच दिवसीय दीपों के महापर्व की तैयारियों में जुट गए हैं। घरों में देवी लक्ष्मी की अगवानी की तैयारियां हैं। बाजारों में भी खास उत्साह है। शहरवासी दो साल बाद एक बार फिर से अच्छी दिवाली की उम्मीद कर रहे हैं। इन्हीं उम्मीदों की रोशनी में शहर जगमगाएगा। रंग-बिरंगी रोशनी के संग इस वर्ष कम से कम करीब 2 करोड माटी के दीयों की रोशनी से शहर जगमगाएगा। दीपावली पर डिमांड को देखते हुए कुंभकार तैयारियों में जुट गए हैं।

विभिन्न क्षेत्रों में विक्रेताओं के अनुसार दीपावली पर अमूनन हर घर में दीपक जलाए जाते हैं। हर घर में करीब 10- 50 की संख्या में दीपक की खरीद होती है। इसे देखते हुए कम से कम दीपावली करीब 60 लाख दीयों से रोशन होगी। दीयों के साथ कलश, हीड, मटकियों समेत अन्य मिट्टी के पात्रों की भी खासी मांग रहती है। इसके चलते कुंभकार गत दिनों से तैयारियों में जुटे हुए हैं। गुमानपुरा क्षेत्र में विक्रेता टीकम चंद व गीता भवन रोड पर धनराज व गंधीजी की पुल क्षेत्र में त्रिलोक चंद बताते हैं कि करीब एक माह पहले से तैयारी करनी पड़ती है। करवा चौथ के बाद तो पूरी तरह से दीपावली की तैयारियों में लग जाते हैं।

3 लाख से अधिक मटकियां, इतने ही कलशों की डिमांड

विक्रेताओं के अनुसार कोटा में कम से कम हर वर्ष दीपावली पर हर वर्ष 3 से साढ़े 3 लाख मटकियां व पूजन के लिए इतने ही कलशों की डिमांड रहती है। समाज के पदाधिकारी तो मानते हैं कि कोटा में कम से कम 4 लाख परिवार हैं। मान्यताओं के अनुसार हर घर में दीपावली पर नई मटकी रखी जाती है। देवी लक्ष्मी के पूजन में कलश भी जरूरी होता है, ऐसे में इतनी ही संख्या में कलश की मांग होती है।

अनुमान इससे भी

कोटा में रोजगार की आस में गुजरात से आए दिनेश बताते हैं कि वह 5 लाख दीपक लेकर बेचने के लिए कोटा आए थे। दो दिन में ही करीब 3 लाख दीपक बिक गए हैं। लोगों की डिमांड को देखते हुए 5 लाख दीपक और मंगवाए हैं। दिनेश के अलावा अन्य जगहों से भी अन्य दुकानदार भी कोटा आए हैं, जो लोगों के रूझान को देखते हुए खासे उत्साहित हैं

आंकड़ों पर डालें नजर

-10 से करोड़ के कारोबार का अनुमान

-साढ़े 3 लाख से अधिक घर हैं कोटा में
-10 से 50 तक के दीप खरीदे जाते हैं हर परिवार में
-3 लाख से अधिक मटकियों व इतने ही कलश बिकते हैं शहर में दीपावली के सीजन में
-200 रुपए के करीब हर परिवार खर्च करता है मिट्टी के पात्रों पर दीपावली पर
-500 के करीब दुकानें लगती है कोटा में दीपावली पर

इधर देखें भाव

7 से 8 प्रति10 रुपए सामान्य दीपक
10 से 70 रुपए प्रति नग डिजाइनदार दीपक
40 से 50रुपए प्रति दर्जन टेरीकोटा के दीपक
100 से 150 रु.मटकी
25 से 60 रुपए प्रति कलश
150 से 200 नल वाली प्रति मटकी
( विक्रेताओं के अनुसार फुटकर व थोक भाव , सादा व डिजाइनदार वस्तुओं के भावों में अंतर होता है )

अखर रही मिट्टी की कमी

विक्रेताओं के अनुसार कोटा व आस पास मिट्टी की कमी है। अन्य स्थानों से भी मिट्टी व अन्य चीजें मंगवानी पड़ती है। इससे विक्रेताओं पर अतिरिक्त आर्थिक भार पड़ रहा है। अखिल भारतीय प्रजापति कुम्हार, महासंघ नई दिल्ली, मुंबई के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष नंदलाल प्रजापति बताते हैं कि दो साल से कोरोना के कारण बाजार प्रभावित हो रहे थे। इस वर्ष लोगों में अच्छा उत्साह है। इस वर्ष अच्छे कारोबार की उम्मीद है। सरकार समाज की मिट्टी जैसी की समस्या का निराकरण करे।