
होलाष्टक में सभी ग्रह रहेंगे उग्र रूप में,सोच समझ कर करें अपने काम,मांगलिक कार्यो पर रहेगा ब्रेक
कोटा . 3 मार्च फाल्गुन शुक्ल पक्ष, अष्टमी तिथि, मंगलवार को प्रारंभ हो गया । जो 09 मार्च होलिका दहन के साथ ही समाप्त हो जाएगा। आठ दिनों का यह होलाष्टक दोष रहेगा जिसमें सभी शुभ कार्य वर्जित हैं। नौ मार्च को होली दहन होगा। 10 मार्च को ही होला मेला, वसन्तोत्सव, ध्वजारोहण, धूलिवन्दन,धुलण्डी, होलिका विभूति धारण होगा।
ज्योतिषाचार्य अमित जैन ने बताया की होलाष्टक के प्रथम दिन अर्थात फाल्गुन शुक्लपक्ष की अष्टमी को चंद्रमा, नवमी को सूर्य, दशमी को शनि, एकादशी को शुक्र, द्वादशी को गुरु, त्रयोदशी को बुध, चतुर्दशी को मंगल तथा पूर्णिमा को राहु का उग्र रूप रहता है। इस वजह से इन आठों दिन में मानव मस्तिष्क तमाम विकारों, शंकाओं और दुविधाओं आदि से घिरा रहता है, जिसकी वजह से शुरू किए गए कार्य के बनने के बजाय बिगड़ने की संभावना ज्यादा रहती है।
इसलिये इन 8 दिनों में मांगलिक कार्य नही होते वही इन के निवारण के लिये होली के अगले दिन अबीर गुलाल पुष्प से होली खेलने का विधान है। शास्त्रों में अबीर को पूजा में गुलाल के साथ सुगंधित द्रव्य व गंध के रूप में चढ़ाया जाता है। इसलिए इसे भगवान का प्रिय माना जाता है।
मान्यता है कि अबीर को पूजन में पूरी श्रृद्धा के साथ चढ़ाकर भगवान से उनके ही समान तेज देने की प्रार्थना की जाती है तो उससे सभी अंग तेजस्वी बनते हैं। साथ ही, रोग खत्म होते है और शरीर स्वस्थ् बनता है। इसलिये भी होली पर गुलाल ओर पुष्प से होली खेलनी चाहिए ।
हिंदू धर्म में होलाष्टक के समय को शुभ नहीं माना जाता है। माना जाता है कि इन दिनों में ही प्रह्लाद की भक्ति से नाराज होकर हिरण्यकश्यप ने होली से आठ दिन पहले उसे कई तरह के कष्ट और यातनाएं दीं। जिसकी वजह से इस समय को अशुभ कहा जाता है। ऐसे में इन 5 काम जो होलाष्टक के समय में करने से बचना चाहिए।
शादी-
शादी हर व्यक्ति के जीवन का सबसे अहम फैसला होता है। शादी का बंधन बेहद पवित्र और शुभ माना गया है। यही कारण है कि हिंदू धर्म मे होलाष्टक में विवाह करने की मनाही होती है।
नामकरण संस्कार-
व्यक्ति अपने नाम से ही भविष्य में दुनियाभर में अपनी पहचान बनाता है। व्यक्ति के जीवन पर सबसे ज्यादा उसके नाम का असर पड़ता है। इसलिए यह बहुत जरूरी है कि नामकरण संस्कार को शुभ काल में किया जाए।
विद्या आरंभ- बच्चों की शिक्षा की शुरुआत भी इस काल में नहीं की जानी चाहिए। शिक्षा किसी के भी जीवन के सबसे शुभ कार्यों में से एक है। जब अपने बच्चे को किसी गुरु के देखरेख में दिया जाए तो वह शुभ काल हो। ऐसा करने से बच्चा तेजस्वी बनता है।
संपत्ति की खरीद-बिक्री-
हो सकता है कि आपने जो संपत्ति खरीदी या बेची है, वह बाद में आपके लिए परेशानी का सबब बन जाए। इसलिए होलाष्टक में संपत्ति की खरीद-बिक्री नहीं करनी चाहिए।
नया व्यापार और नई नौकरी-
आप नया व्यापार शुरू करना चाहते हैं या फिर कोई नई नौकरी शुरू करने वाले हैं तो अच्छा होगा उसके लिए होलाष्टक के दिनों को न चुने। होलाष्टक के बाद इन कार्यों को करें। ऐसा करने से सकारात्मक ऊर्जा आपके साथ रहेगी और आप जीवन में जल्द सफलता हासिल करेंगे।
Updated on:
03 Mar 2020 01:20 pm
Published on:
03 Mar 2020 01:14 pm
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