
उज्ज्वला के बाद भी घरों में धुआं ही धुआं
सांगोद (कोटा). महिलाओं को भोजन पकाने के दौरान चूल्हे से उठते धुएं की समस्या से निजात दिलाने के लिए केंद्र सरकार की महत्वाकांशी उज्जवला योजना गरीब लोगों के लिए दूर की कौड़ी बन गई। योजना के तहत गरीब परिवारों को सरकार ने नि:शुल्क गैस कनेक्शन तो दिए, लेकिन लगातार बढ़ती घरेलू गैस की कीमतों से सिलेंडर भरवाना लाभार्थियों के बूते के बाहर हो रहा है। योजना शुरू होने के पहले लोगों को चूल्हा जलाने के लिए केरोसिन भी मिल जाता था। लेकिन अब वो भी नहीं मिल रहा।
ऐसे में अब एक बार फिर ऐसे कई परिवार चूल्हों पर खाना पकाने को मजबूर हैं। मौजूदा समय में एलपीजी गैस सिलेंडर का दाम 973 रुपए प्रति सिलेंडर हैं। उज्जवला योजना शुरू होने पर लोगों को नि:शुल्क कनेक्शन जारी कर पहली बार भरा हुआ गैस सिलेंडर नि:शुल्क दिया गया। उसके बाद लाभार्थी को गैस सिलेंडर स्वयं भरवाना था।
रह गए आधे से भी कम
उज्जवला योजना के तहत क्षेत्र में करीब 12 हजार परिवारों को नि:शुल्क कनेक्शन जारी किए गए। उस समय सिलेंडर के दाम करीब 622 रुपए थे। इसमें भी प्रति सिलेंडर लाभार्थियों को सब्सिडी मिल रही थी। ऐसे में कनेक्शन लेने के बाद 95 प्रतिशत से अधिक लाभार्थियों ने खाना एलपीजी गैस पर पकाया। लेकिन सिलेंडर के बढ़ते दामों ने लाभार्थियों के पसीने छुड़ा दिए। अब हालत यह है कि 25 प्रतिशत लाभार्थी भी सिलेंडर नहीं भरवा रहे।
केरोसिन भी हो गया बंद
योजना में कनेक्शन मिलने के साथ ही सरकार ने भी माना की घर-घर में गैस सिलेंडर पहुंच गए हैं। ऐसे में सरकार ने धीरे-धीरे गरीब लोगों को मिल रहा केरोसिन का कोटा भी कम कम कर दिया। अब तो हालत यह है कि करोसिन मिलना ही बंद हो गया। ऐसे में अब लोगों की निर्भरता फिर लकडिय़ों पर बढऩे लगी है। इस कारण गांवों में महिलाएं सूखी लकडिय़ा एकत्रित कर सुबह-शाम चूल्हों पर धुएं के बीच खाना पकाने को मजबूर हैं।
कोरोना से भी बने विषम हालात
दो साल पूर्व कोविड-19 का प्रकोप बढऩे से अर्थतंत्र कमजोर हो गया। बाद में सरकार ने रही सही कसर सब्सिडी बंद करके पूरी कर दी। इस बीच सिलेंडर के दाम बढ़ते गए तो लाभार्थियों ने भी गैस सिलेंडर से मुंह मोड़ लिया। हालांकि इस बीच सरकार ने तीन माह तक लाभार्थियों के नि:शुल्क गैस भरवाई। जून माह में सरकार ने लाभार्थियों के खातों में राशि भी जमा करवाई लेकिन लाभार्थियों की सिलेंडर लेने में कोताही ही बरती।
Published on:
29 Mar 2022, 1:32 AM IST
Copyright © 2026 Patrika Group. All Rights Reserved.