शहर के कई इलाकों में बंदरों का आAतंक है। बंदरों के काटने के डर से कई लोगों ने तो घरों की छतों पर जाना ही छोड़ दिया। बंदरों के काटने के कारण आए दिन लोग अस्पताल पहुंच रहे हैं।
कोटा/पत्रिका न्यूज नेटवर्क.शहर के कई इलाकों में बंदरों का आतंक है। बंदरों के काटने के डर से कई लोगों ने तो घरों की छतों पर जाना ही छोड़ दिया। बंदरों के काटने के कारण आए दिन लोग अस्पताल पहुंच रहे हैं। सीबी गार्डन और किशोर सागर तालाब की पाल पर तो जबर्दस्त आतंक है। यहां सैकड़ों की संख्या में बंदर दिनभर उछलकूद करते रहते हैं। महिलाओं और बच्चों के हाथ में थैली देखते ही झपट पड़ते हैं। ऐसे में इनसे बचने के लिए लोग इधर-उधर भागते हैं और दुर्घटनाग्रस्त हो जाते हैं। सीबी गार्डन में सबसे ज्यादा परेशान मोर्निंग वाॅकर हैं। नगर निगम के पिछले बोर्ड में बंदरों को पकड़ने का ठेका दिया जाता था। दिल्ली-मथुरा के एक्सपर्ट बंदरों को पकड़ने का काम करते थे, लेकिन वर्तमान में दोनों निगम ने इस काम से हाथ खींच लिए हैं। इससे इनका आतंक बढ़ गया है।
बंदर को देखकर झूले से गिरा, हाथ में फैक्चर
रविवार को अवकाश होने के कारण शहर के अलग-अलग क्षेत्र से अभिभावक बच्चों के साथ सीबी गार्डन पहुंचे। 12 साल का अक्षत किड्स जोन में झूले पर बैठा था, इसी दौरान बंदरों का झुण्ड कूद-फांद करता हुुआ आया, उन्हें देख अक्षत झूले से कूद गया और उसका हाथ फ्रैक्चर हो गया। यह तो एक बागनी मात्र है, प्रतिदिन कई लोगों को बंदर काट रहे हैं।
तालाब की ताल पर लगा रहता है जमघट
तालाब की पाल और बड़ तिराहे के आसपास बड़ी संख्या में बंदर बैठे रहते हैं। यहां मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं से प्रसाद की थैलियां तक झपट लेते हैं। यही हाल केएसटी पर है। यहां बंदरों ने लोगों का चैन छीन रखा है।
जिला कलक्टर से भी लगाई गुहार
पिछले दिनों तलवंडी सेक्टर एक के लोगों ने जिला कलक्टर को ज्ञापन देकर बंदरों की समस्या से अवगत कराया था। ज्ञापन में बताया था कि एक महिला बंदर के डर से सीढि़यों से गिर गई, छह माह से बेड पर है। जिला कलक्टर ने निगम आयुक्तों को बंदर पकड़ने का अभियान शुरू करने के निर्देश दिए थे, लेकिन दस दिन बाद भी कुछ नहीं हुआ है।
यह भी पढ़ें : राजस्थान में गहराया संकट, कभी भी हो सकती है बिजली गुल!
मथुरा से बुलाएंगे एक्सपर्ट
बंदरों को पकड़ने के लिए निगम ने टेंडर किया है। बंदर पकड़ने वाले एक्सपर्ट मथुरा से आते हैं। शिकायत मिलने पर बुलवाया जाता है। वह बंदर को पकड़ कर दूर जंगल में छोड़ देता है। जिन क्षेत्रों में बंदरों की समस्या है। उन क्षेत्रों में बंदरों को पकड़कर जंगल में छुड़वाया जाएगा।
राजीव अग्रवाल, महापौऱ, कोटा दक्षिण