
संतान सुख ने छीना 184 नेताओं का राजनीतिक सुख, 25 जनप्रतिनिधि जिंदगी में कभी नहीं लड़ पाएंगे चुनाव, अयोग्य उम्मीदवारों की सूची जारी
कोटा. राज्य सरकार ( Rajasthan Government ) ने नगर निगम व अन्य निकायों के चुनाव ( Municipal corporation elections 2019 ) से पहले दो से अधिक संतान होने तथा अन्य कारणों से अयोग्य घोषित किए गए जनप्रतिनिधियों की सूची जारी की है। ( inept Politicians List Released ) इसमें 187 जनप्रतिनिधियों को दो से अधिक संतान होने के कारण पार्षद, सभापति और अध्यक्ष की कुर्सी गंवानी पड़ी है। दो दर्जन पार्षदों के लिए आजीवन चुनाव लडऩे पर पाबंदी लगाई गई है।
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प्रदेश में निकाय चुनाव की तैयारियां शुरू हो गई हैं। नगर निगम व नगर पालिकाओं में वार्ड के परीसिमन का काम पूरा हो गया है। वार्ड का जातिगत आधार पर आरक्षण का निर्धारण पूरा हो चुका है। इस बीच स्वायत्त शासन विभाग ने 1996 से 2019 तक नगर निगमों, नगर पालिकाओं व नगर परिषदों में दो से अधिक संतान होने की जानकारी छुपाकर चुनाव लडऩे वाले 184 जनप्रतिनिधियों की सूची जारी की है। इसमें से 95 प्रतिशत पार्षद व सदस्यों को संतान सुख के कारण राजनीतिक सुख की कुर्सी गंवानी पड़ी है।
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दो दर्जन नहीं लड़ सकेंगे आजीवन चुनाव
स्वायत्त शासन विभाग ने प्रदेशभर के दो दर्जन पार्षदों व सदस्यों पर दो से अधिक संतान होने तथा अन्य कारणों से चुनाव लडऩे पर आजीवन पाबंदी लगा दी है। इसमें कैथून नगर पालिका में पार्षद रहे अब्दुल मजीद तथा मोहम्मद सिद्दीकी हैं।
बूंदी परिषद के पूर्व अध्यक्ष सूर्यकांता राणावत पर पांच साल की पाबंदी लगाई गई थी। झालरपाटन पालिका की अध्यक्ष रही कस्तूरीबाई पर पांच साल चुनाव नहीं लडऩे की बंदिश लगाई थी। झालावाड़ के पूर्व अध्यक्ष महेश हाड़ा पर 2009 में छह वर्ष के लिए रोक लगाई थी।
Published on:
04 Aug 2019 08:30 am
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