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मानस की चौपाइयों का वर्णन करते हुए जज ने सुनाई बलात्कारी को आजीवन कारावास की सजा

- आरोपी ने पूजा पाठ के बहाने एक विधवा के घर में रहकर उसकी बेटी को बनाया था शिकार, ननद की बेटी से भी की छेड़छाड़

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मानस की चौपाइयों का वर्णन करते हुए जज ने सुनाई बलात्कारी को आजीवन कारावास की सजा

मानस की चौपाइयों का वर्णन करते हुए जज ने सुनाई बलात्कारी को आजीवन कारावास की सजा

कोटा. पूजा-पाठ के नाम पर घर में 21 दिनों तक रहकर एक विधवा की बेटी से बलात्कार व उसकी ननद की बेटी से छेड़छाड़ के मामले में न्यायालय पोक्सो क्रम-3 कोटा के न्यायाधीश दीपक दुबे ने आरोपी ढोंगी साधु को जीवित रहते तक आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। न्यायाधीश ने आरोपी के कृत्य को जघन्य अपराध माना तथा अपनी टिप्पणी में रामचरितमानस का उल्लेख किया। न्यायाधीश ने स्पष्ट किया कि रामचरितमानस में गोस्वामी तुलसीदास ने ऐसे ढोंगियों की पहचान पूर्व से ही बता रखी है।

उन्होंने अपने आदेश में लिखा कि-

तुलसी देख सुबेषु भूलहि मूढ़ न चतुर नर।
सुंदर केकिहि पेखु वचन सुधा सम आसन अहि।।

अर्थात - सुंदर वेष को देखकर मूढ़ (मूर्ख ही नहीं चतुर मनुष्य) भी धोखा खा जाते हैं। सुंदर मोर को देखें तो उसका वचन तो अमृत के समान होता है, लेकिन वो आहार सांपों का करता है। किसी भी व्यक्ति को उसकी सुंदरता यानी दिखावे की जगह उसके चरित्र से पहचानना चाहिए।

लखित सुबेष जग वंचक जेऊ। वेष प्रताप पूजिअहि तेऊ।।
उघरहि अंत न होइ निबाहू। कालनेमि जिमि रावन राहू।।

अर्थात- कई लोग साधु का वेष मात्र धारण कर जनता के द्वारा पूजे जाने लगते हैं, लेकिन एक ना एक दिन उनकी सच्चाई सामने आ जाती है। जैसे कालनेमि, रावण और राहु की सच्चाई सामने आ गई थी।

यह है मामला

विशिष्ट लोक अभियोजक ललित कुमार शर्मा ने बताया कि 23 जून 2020 को विधवा महिला ने शहर के एक पुलिस थाने में रिपोर्ट दी थी। इसमें बताया था कि उसके घर अरविंद उर्फ प्रिंस उर्फ संगीत चौहान ढोंगी बनकर आया। उसने कहा कि तुम्हारा घर किसी ने तांत्रिक क्रिया से बांध रखा है। इसके लिए हवन, पूजन करवाना होगा। तब तुम्हारा परिवार सुख शांति से रहेगा। वह उसकी बातों में आ गई। इस दौरान अरविंद रात-दिन घर में ही रहा। 23 जून 2020 को 20 दिन हो गए थे। इस बीच अरविंद ने उसकी बेटी के साथ बलात्कार किया और धमकी दी कि यह बात किसी को बताई तो जान से मार देगा। इसी तरह से उसकी ननद की लड़की से भी उसने छेडख़ानी की। अरविंद ने उसकी सोने की चेन भी बहाने से ले ली। इस रिपोर्ट पर पुलिस ने धारा 354,376,420 आईपीसी के तहत मुकदमा दर्ज कर अनुसंधान किया। अनुसंधान के बाद आरोपी के खिलाफ धारा 376,354 आईपीसी के तहत न्यायालय में आरोप पत्र पेश किया। न्यायाधीश ने आरोपी को दोषी करार देते हुए धारा 376 में आरोपी को शेष जीवनकाल तक आजीवन कारावास की सजा सुनाई।

आरोपी का पाखंड क्षमा करने लायक नहीं

न्यायाधीश ने अपनी विशेष टिप्पणी में यह भी स्पष्ट किया कि आरोपी द्वारा ढोंगी तांत्रिक के रूप में विधवा महिला व उसकी परित्यक्ता पुत्री की सरलता का फायदा उठाया। उन्हें विश्वास में लेकर पूजा-पाठ के नाम पर पीडि़ता के साथ कई बार शारीरिक संबंध स्थापित किए। धर्म के नाम पर किए गए आरोपी के इस पाखंड को न्यायालय किसी भी स्तर पर क्षमा करने या नरमी का रुख अपनाने के लिए तैयार नहीं है। यदि ऐसा किया गया तो इससे समाज में ढोंगी और पाखंडियों के मन में कानून का कोई भय नहीं रहेगा। पीडि़ता के परिवार की तरह दूसरे परिवार भी ढोंग और पाखंड के शिकार होते रहेंगे।