
ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट का एमओयू होने के साथ ही कोटा शहर में चर्चा शुरू हो गई है कि अब मौजूदा एयरपोर्ट की जमीन का भविष्य क्या होगा? क्योंकि यह जमीन आबादी के बीच में आ गई है। शहर की प्राइम लोकेशन पर है। झालावाड़ रोड पर बना एयरपोर्ट 447 एकड़ जमीन में फैला हुआ है। हालांकि जब पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार में जब ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट की जमीन शम्भुपुरा में चिह्नित कर ली थी, उसी दौरान मौजूदा एयरपोर्ट की जमीन का भविष्य तय कर लिया था।
तत्कालीन यूडीएच मंत्री शांति धारीवाल ने कोटा के कई कार्यक्रमों में घोषणा की थी कि यूआईटी ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट के लिए नि:शुल्क जमीन उपलब्ध करवाएगी और मौजूदा एयरपोर्ट की जमीन पर मिनी सचिवालय बनाया जाएगा। यूआईटी ने इसका प्लान भी तैयार कर लिया था। उसके बाद सरकार बदल गई। अब डबल इंजन सरकार मौजूदा एयरपोर्ट की जमीन को लेकर कोई फैसला करेगी? इससे जो आय होगी, उसी से एएआई नया एयरपोर्ट बनाएगा। करीब दो दशक का एयरपोर्ट संचालन खर्च भी इसी से जुटेगा।
तत्कालीन सरकार का मानना था कि यह जमीन शहर के बीच होने से मौजूदा एयरपोर्ट की जमीन पर मिनी सचिवालय बनाया जाना सबसे बेहतर है। इसमें कलक्ट्री समेत सभी सरकारी कार्यालय व अदालतें एक ही जगह पर हो सकेंगी। वर्तमान एयरपोर्ट की जमीन का पांचवें हिस्से में ही मिनी सचिवालय बनाने की योजना थी, जबकि शेष जमीन को ग्रीन जोन के रूप में विकसित किया जाना प्रस्तावित था।
कोटा ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट के विकास को लेकर भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण, नगरीय विकास विभाग एवं नागरिक उड्डयन विभाग के मध्य त्रिपक्षीय एमओयू जयपुर में हुआ। कोटा से 15 किमी दूर शम्भुपुरा में ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट बनाया जाएगा। एयरपोर्ट का निर्माण 440.086 हैक्टेयर भूमि पर किया जाएगा। कोटा विकास प्राधिकरण की परिधि सीमा मेें यह भूमि राजस्व ग्राम तुलसी, कैथुदा, बालापुरा एवं देवरिया, जिला बूंदी में स्थित है। इसमें से 406.678 हैक्टेयर वन भूमि एवं 33.408 हैक्टेयर गैर वन भूमि कोटा विकास प्राधिकरण के स्वामित्व की है।
ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट का एमओयू कर राज्य सरकार ने कोटा को बड़ी सौगात दी है। मौजूदा एयरपोर्ट की जमीन को लेकर फिलहाल कोई चर्चा नहीं हुई है।
गौतम कुमार दक, नागरिक उड्डयन मंत्री
Published on:
20 Jul 2024 05:03 pm
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