
आ रहा है सबके लिए शुभ दिन, स्वार्थ सिद्धि व अमृत सिद्धि योग के साथ गुरु पुष्य योग भी बनेगा 4 जुलाई को
कोटा. गुप्त नवरात्रि 3 जुलाई से प्रारंभ होकर 10 जुलाई तक रहेंगे। नवरात्र के नौ दिनों में पांच बार रवि योग और दो बार सर्वार्थ सिद्धि का विशिष्ट संयोग रहेगा। चैत्र मास और आश्विन मास में आने वाली नवरात्र से ज्यादा महत्व गुप्त नवरात्र का माना जाता है। गुप्त नवरात्र में साधक मां काली, तारा देवी, त्रिपुर सुंदरी, भुवनेश्वरी, छिन्नमाता, भैरवी, मां धूमावती, माता बगलामुखी, मातंगी और कमला देवी की पूजा की जाएगी।
ज्योतिषाचार्य (Astrologer) अमित जैन ने बताया कि गुप्त नवरात्र (Gupt Navaratri) में तंत्र, मंत्र और यंत्र की साधना से 10 गुना अधिक शुभ फल प्राप्त होता है। आषाढ़ मास (aashad month) की नवरात्रि में शिव और शक्ति की उपासना की जाती है। गुप्त नवरात्र विशेष तौर पर गुप्त सिद्धियां पाने का समय है। मां भगवती की आराधना दुर्गा सप्तशती (Durga Saptashati) से की जाती है।
4जुलाई को गुरु पुष्य योग
आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि गुरुवार 4जुलाई को भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा का उत्सव मनाया जाएगा। इस बार सर्वार्थ सिद्धि व अमृत सिद्धि योग के साथ गुरु पुष्य योग भी इस दिन रहेगा। इन सभी योगों के साथ यह दिन अभीष्ट फलदायी रहेगा। इसके साथ ही जगन्नाथ यात्रा गुप्त नवरात्र के दौरान ही निकलेगी।
ज्योतिषाचार्य अमित जैन शास्त्री ने बताया कि रथयात्रा के दिन को अबूझ व स्वयं सिद्ध मुहूर्त भी शास्त्रों में माना गया है। अबूझ मुहूर्त होने से इस दिन नवीन गृह प्रवेश, नए व्यापार आरंभ (start new business) , नए वाहन (vehicles) खरीदने का शुभ दिन रहेगा। इस दिन महिलाएं मनोरथ द्वितीया व्रत भी करेंगी।
गुप्त नवरात्र में होती है मानसिक पूजा
गुप्त नवरात्रि में मानसिक पूजा की जाती है। माता की आराधना मनोकामनाओं को पूरा करती है। गुप्त नवरात्र में माता की पूजा देर रात ही की जाती है। नौ दिनों तक व्रत का संकल्प लेते हुए भक्त को प्रतिपदा के दिन घट स्थापना करना चाहिए। भक्त को सुबह शाम मां दुर्गा की पूजा करना चाहिए। अष्टमी ashtamee या नवमी के दिन कन्याओं का पूजन करने के बाद व्रत का उद्यापन करना चाहिए।
Published on:
26 Jun 2019 07:15 pm
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