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Rajasthan News : क्यों 3000 Km उड़कर राजस्थान पहुंची ये ‘107 नंबरी’ चील? वजह कर रही सबको हैरान    

राजस्थान के कोटा जिले से एक ऐसी खबर आई है जिसने पक्षी विज्ञानियों और वन्यजीव प्रेमियों को उत्साहित कर दिया है। कोटा के अभयडा बायोलॉजिकल पार्क के पास पहली बार एक ऐसे 'ब्लैक काइट' (चील) को देखा गया है, जिसके पंखों पर वैज्ञानिक टैग लगा हुआ है।

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कोटा

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Nakul Devarshi

Feb 17, 2026

Rajasthan News

राजस्थान के पक्षी विज्ञान के इतिहास में 18 जनवरी 2026 की तारीख एक मील का पत्थर बन गई है। कोटा के अभयडा बायोलॉजिकल पार्क के पास वन विभाग के कर्मियों ने एक ग्रीन विंग-टैग्ड ब्लैक काइट (Tag ID: 107) को कैमरे में कैद किया है। अब तक यह माना जाता था कि चीलें स्थानीय पक्षी हैं, लेकिन इस साइटिंग ने साबित कर दिया है कि राजस्थान 'रैप्टर्स' (शिकारी पक्षियों) के अंतरराष्ट्रीय प्रवास मार्ग (Central Asian Flyway) का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।

मंगोलिया से 'कोटा' का कनेक्शन

वैज्ञानिक विश्लेषण से पता चला है कि इस चील को 16 जुलाई 2024 को मंगोलिया के 'शार्गा' इलाके के पास ओवोनी आर (Ovoony Ar) ओएसिस में रिंग किया गया था।

  • पहचान संख्या: EA249127
  • दूरी: इस नन्हे पक्षी ने मंगोलिया से कोटा तक पहुँचने के लिए लगभग 3,000 किलोमीटर का हवाई सफर तय किया है।
  • विशेषज्ञ की राय: ऑर्निथोलॉजिस्ट माइकल स्टब के अनुसार, यह पक्षी मध्य एशिया के प्रजनन स्थलों और भारत के शहरी आवासों के बीच एक मजबूत पारिस्थितिक कड़ी स्थापित करता है।

राजस्थान में पहली बार 'विंग-टैग' का रिकॉर्ड

बीकानेर के जोड़बीड़ में अक्सर पैरों में रिंग लगे शिकारी पक्षी मिलते हैं, लेकिन राजस्थान में पंखों पर टैग (Wing-tag) लगा हुआ ब्लैक काइट पहली बार रिकॉर्ड किया गया है।

राजस्थान वन विभाग के सहायक वनपाल हर्षित शर्मा और मनोज शर्मा ने इस पक्षी की फोटोग्राफिक साक्ष्य जुटाए, जिससे इस वैज्ञानिक रिकॉर्ड की पुष्टि हो सकी।

कचरा प्रबंधन और पक्षियों का जीवन

दुनिया की सबसे बड़ी और सबसे विविध पर्यावरणीय नेटवर्क, इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर (IUCN) से जुड़े वन्यजीव विशेषज्ञ दाऊ लाल ने एक महत्वपूर्ण पहलू पर ध्यान आकर्षित किया है। यह पक्षी एक 'एनिमल डंपिंग साइट' (मरे हुए जानवरों को फेंकने की जगह) के पास पाया गया।

ऐसे डंपिंग यार्ड शिकारी पक्षियों के अस्तित्व और उनके प्रवास के लिए भोजन का मुख्य स्रोत होते हैं। इनका वैज्ञानिक प्रबंधन पक्षियों के संरक्षण के लिए बेहद जरूरी है।

क्यों महत्वपूर्ण है यह खोज?

यह खोज साबित करती है कि राजस्थान केवल स्थानीय पक्षियों का घर नहीं है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय 'फ्लाईवे' का केंद्र है। यह पुष्टि करता है कि मध्य एशिया से आने वाले पक्षी राजस्थान को अपने शीतकालीन प्रवास (Wintering Ground) के रूप में चुन रहे हैं। इन पक्षियों के मूवमेंट से भविष्य में जलवायु परिवर्तन और उनके बदलते रास्तों को समझने में मदद मिलेगी।