
कोटा से गुजरते रेल यात्रियों को अब यहां की दीवारें बता देंगी कि कोटा आ गया है। जिस तरह सवाईमाधोपुर रेलवे स्टेशन पर टाइगर और अन्य वन्यजीवों के चित्र आकर्षित करते हैं, उसी तर्ज पर अब कोटा रेलवे स्टेशन को हेरिटेज स्टेशन के रूप में विकसित किया जा रहा है।
रेलवे के सहयोग से जिला प्रशासन द्वारा 3 हजार वर्गफीट की दीवार पर कोटा-बूंदी शैली की पेंटिंग्स बनवाई जा रही है। इसका उद्देश्य पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ-साथ लुप्त हो रही कोटा-बूंदी शैली की चित्रकारी से लोगों को जोडऩा है। इसके लिए स्टेशन की दीवारों को कोटा के इतिहास, संस्कृति, जंगल, जीवन, वन्यजीव सहित प्राकृतिक छटाओं को कोटा शैली की चित्रकारी और रंगों के जरिए आकर्षक बनाया जा रहा है।
लेमिनेट होंगी पेंटिंग्स
यहां चित्रकारी कर रहे मिनिएचर आर्टिस्ट शेख मोहम्मद लुकमान ने बताया कि स्टेशन की दीवारों पर एक्रिलक कलर से पेंटिंग तैयार की जा रही है। मानना है कि 10 सालों तक पेंटिंग्स खराब नहीं होंगी। पेंटिंग बनाने के बाद इन्हें लेमीनेट किया जाएगा।
चित्रों में कोटा-बूंदी के साथ मुगल शैली का भी प्रयोग किया है। लुकमान को चित्रकारी विरासत में मिली है। पिता मरहूम शेर मोहम्मद उस्मान भी चित्रकार थे। लुकमान ने कक्षा 9 से चित्रकारी शुरू की, अब तक प्रदेश के कई जिलों समेत दिल्ली, हिमाचल, मध्यप्रदेश, यूपी के अलावा कानपुर आईआईटी में आयोजित वर्कशॉप में चित्रकला का जोहर दिखा चुके हैं।
ऐसी है चित्रकारी
आज की कोचिंग नगरी, कोटा-बूंदी शैली के 12 मास यानी 12 महीने की बारह पेंटिंग्स, कृष्ण-लीला, राज-रागिनी, गीत-गोविंद, नायिका शृंगार, शिकार, हाथियों की लड़ाई, राजा की सवारी, लवाजमा तथा प्राकृतिक सौंदर्य के लिए देश-विदेश में काफ ी प्रसिद्ध है।
यही सब कोटा शैली के चित्रों के जरिए कोटा जंक्शन की दीवारों पर दिखेंगे। पहले चरण में नायिका शृंगार, मोर क्रीड़ा, कोटा के पूर्व राजपरिवार के सदस्य रामसिंह की सवारी, पागल हाथियों को वश में करना, हाथियों की लड़ाई, जगमंदिर, अभेड़ा महल, किशोर सागर, गढ़ पैलेस, मोर नृत्य और प्राकृतिक सौंदर्य की थीम पर स्टेशन को सजाया जा रहा है।
हेरिटेज पेंटिंग्स भी
प्लेटफाॅॅर्म नंबर एक, जनरल वेटिंग रूम, आरक्षण केंद्र एसी व नोन एसी रूम, प्लेटफाॅॅर्म के पिल्लरों पर कोटा-बूंदी शैली की पेंटिंग्स बनाई जा रही हैै।
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