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Rajasthan: 17 जिलों के 3.25 करोड़ लोगों के लिए Good News, पानी पर खर्च होंगे 2300 करोड़, जानें कब से मिलेगा पानी

Water Solution For 17 Districts:राजस्थान के 17 जिलों के लिए आई बड़ी खुशखबरी! अब बीसलपुर और ईसरदा बांध हमेशा रहेंगे लबालब। चंबल नदी पर बन रहा है 2.3 किमी लंबा अनोखा 'जलसेतु', जो 3 करोड़ से ज्यादा लोगों की प्यास बुझाएगा।
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बूंदी

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Jayant Sharma

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Updated: 10 Feb 2026, 9:01 AM IST

Ram Jal Setu Link Project Update Forest Department Approval for Aqueduct on Chambal River water will reach Bisalpur-Isarda

फाइल फोटो पत्रिका

Rajasthan Ram Jal Setu Link Project: पूर्वी राजस्थान के प्यासे कंठों के लिए एक बहुत बड़ी और खुशखबरी वाली खबर सामने आई है। जिस जल संकट को लेकर दशकों से उम्मीदें टिकी थीं, अब उसे दूर करने के लिए 'राम जल सेतु' (ERCP का संशोधित स्वरूप) का काम युद्ध स्तर पर शुरू हो चुका है। जल संसाधन मंत्री सुरेश सिंह रावत ने खुद बूंदी के गुहाटा गांव पहुंचकर 2330 करोड़ की लागत से बन रहे चंबल जलसेतु (Aqueduct) का निरीक्षण किया। मंत्री के तेवरों से साफ है कि 2028 तक पूर्वी राजस्थान के 17 जिलों की 'बल्ले-बल्ले' होने वाली है!

नदियों का संगम: कालीसिंध का पानी अब मेज और चंबल के रास्ते पहुंचेगा घर-घर

इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट का ब्लूप्रिंट किसी करिश्मे से कम नहीं है। कालीसिंध नदी पर बने नवनेरा बैराज के अतिरिक्त पानी को उठाकर चंबल नदी के ऊपर से एक विशाल जलसेतु के जरिए मेज नदी तक लाया जाएगा। यहाँ से यह पानी मेज बैराज और गलवा बांध होते हुए जयपुर-अजमेर की लाइफलाइन बीसलपुर बांध और ईसरदा बांध को भरेगा। यानी अब मानसून की बेरुखी होने पर भी इन बांधों में पानी कम नहीं होगा।

2330 करोड़ का बजट और 2.3 किमी लंबा 'इंजीनियरिंग चमत्कार'

मंत्री सुरेश सिंह रावत ने बताया कि कोटा की दीगोद तहसील से बूंदी के गुहाटा गांव तक 2.3 किलोमीटर लंबा जलसेतु बनाया जा रहा है। यह महज एक नहर नहीं, बल्कि राजस्थान के दीर्घकालीन जल प्रबंधन का मील का पत्थर है। मई 2025 में शुरू हुए इस काम को जून 2028 तक हर हाल में पूरा करने का लक्ष्य है। खास बात यह है कि यह जलसेतु आम जनता के आवागमन के लिए एक नया रास्ता भी बनेगा।

3.25 करोड़ लोगों की बुझेगी प्यास, किसानों को मिलेगी सिंचाई की सौगात

लगभग 90 हजार करोड़ रुपये की इस 'राम जल सेतु लिंक परियोजना' से 17 जिलों की करीब 3.25 करोड़ आबादी को सीधा फायदा होगा।

  • पीने का पानी: घर-घर नल से जल की उपलब्धता सुनिश्चित होगी।
  • सिंचाई: लाखों हेक्टेयर भूमि को पानी मिलने से किसानों की आय बढ़ेगी।
  • इंडस्ट्री: औद्योगिक जरूरतों के लिए भी पानी की कमी नहीं रहेगी।मंत्री के निर्देश: गुणवत्ता में नहीं चलेगी ढिलाईनिरीक्षण के दौरान मंत्री रावत ने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि काम की गुणवत्ता उच्च स्तर की होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यह प्रोजेक्ट राजस्थान को 'जल आत्मनिर्भर' बनाने की दिशा में सबसे बड़ा कदम है। ईआरसीपी का यह नया और विस्तारित स्वरूप अब धरातल पर उतरता नजर आ रहा है, जिससे चंबल और कालीसिंध का संगम राजस्थान के भविष्य की सुनहरी तस्वीर लिखेगा।