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कोटा का जेके लोन अस्पताल फिर आया सु​र्खियों में,सरकार को लगा दी 32 लाख से ज्यादा की चपत

बच्चों की मौत के मामले में देशभर में सुर्खियों में रहने वाले कोटा का जेके लोन अस्पताल एक बार फिर सुर्खियों में आ गया। कोटा जेकेलोन अस्पताल में कोरोना के दौरान पीपीई किट, सेनेटाइजर,मास्क व बॉडी कवर खरीद में गंभीर अनियमितताएं सामने आई है। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग जयपुर के शासन संयुक्त सचिव की ओर से कराई उच्च स्तरीय कमेटी की जांच में यह सामने आया।  

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कोटा

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Abhishek Gupta

Sep 15, 2022

कोटा का जेके लोन अस्पताल फिर आया सु​र्खियों में,सरकार को लगा दी 32 लाख से ज्यादा की चपत

कोटा का जेके लोन अस्पताल फिर आया सु​र्खियों में,सरकार को लगा दी 32 लाख से ज्यादा की चपत

बच्चों की मौत के मामले में देशभर में सुर्खियों में रहने वाले कोटा का जेके लोन अस्पताल एक बार फिर सुर्खियों में आ गया। कोटा जेकेलोन अस्पताल में कोरोना के दौरान पीपीई किट, सेनेटाइजर,मास्क व बॉडी कवर खरीद में गंभीर अनियमितताएं सामने आई है। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग जयपुर के शासन संयुक्त सचिव की ओर से कराई उच्च स्तरीय कमेटी की जांच में यह सामने आया। कमेटी ने माना कि पीपीई किट, सेनेटाइजर, मास्क व बॉडी कवर मेडिकल कॉलेज कोटा के सरकारी ड्रग वेयर हाउस (एमसीडीडब्ल्यू ) में पर्याप्त मात्रा में थे। उसके बावजूद इन सामग्री की नियम विरुद्ध खरीद की गई।

कमेटी ने माना कि इससे राज्य सरकार को 32 लाख 25 हजार 750 की हानि होने से इनकार नहीं किया जा सकता। कमेटी ने अनियमित खरीद के लिए जिम्मेदार अधिकारी व कर्मचारी के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की अनुशंसा की है। हाल ही में इस मामले में एसीबी मुख्यालय ने प्राथमिक जांच दर्ज भी की है। जिसकी जांच कोटा एसीबी के डीएसपी हर्षराज खरेड़ा को सौंपी गई है। कमेटी ने मेडिकल कॉलेज कोटा की द्वारा पेश की गई जांच रिपोर्ट व रिकॉर्ड के आधार पर जांच की। जांच में तत्कालीन जेके लोन अधीक्षक, एमसीडीडब्ल्यू प्रभारी अधिकारी, ड्रग वेयर हाउस प्रभारी के बयान दर्ज किए।

- जांच में यह मिली अनियमितता

कमेटी ने जांच में माना कि जेके लोन अस्पताल प्रशासन ने सरकारी स्टॉक में पर्याप्त मात्रा में सामग्री उपलब्ध होते हुए भी एमसीडीडब्ल्यू को कोई भी मांग पत्र प्रस्तुत नहीं किया, वरन बाजार से सामग्री खरीद की गई। सामग्री की खरीद स्वयं के स्तर पर दर संविदा न की जाकर अन्य हॉस्पिटल (एमबीएस हॉस्पिटल) की दर संविदा पर खरीद की गई, जो नियमानुसार उचित नहीं है।
कमेटी ने माना कि जेके लोन हॉस्पिटल प्रशासन ने ना तो आवश्यकता का उचित आकलन किया, ना ही एमसीडीडब्ल्यू को मांग पत्र प्रस्तुत किया। इतना ही नहीं 1 मार्च 2020 से 30 सितंबर 2020 तक जेके लोन अस्पताल में कोविड पॉजिटिव की संख्या मात्र 127 ही थी। उस दौरान एक भी पॉजिटिव मरीज की डेथ नहीं हुई थी। उसके बाद भी बड़ी मात्रा में बॉडी कवर खरीदे गए, जो खरीद प्रक्रिया पर प्रश्नचिन्ह लगाता है।

कमेटी ने यह भी माना है कि जेके लोन अस्पताल प्रशासन ने संभावित आवश्यकताओं का उचित आकलन किए बिना अन्य हॉस्पिटल (एमबीएस हॉस्पिटल) की दर संविदा/कोटेशन पर 32 लाख 25 हजार 750 रूपए की सामग्री नियम विरुद्ध खरीद की और एमसीडीडब्ल्यू के स्टोर में पर्याप्त स्टॉक होने के बावजूद भी जानबूझकर अनावश्यक रूप से सामग्री का खरीदी गई, जो गंभीर वित्तीय अनियमितता है।
- ये था मामला
दरअसल जेके लोन अस्पताल प्रशासन में मार्च से सितंबर 2020 के बीच 30 लाख से ज्यादा पीपीई किट, मास्क, सेनिटाइजर और बॉडी कवर समेत अन्य सामग्री की खरीद की। इस मामले में मिलीभगत व घोटाले के आरोप लगे थे। बारां-अटरू विधायक पानाचंद मेघवाल ने विधानसभा में मामला उठाया था। मुख्यमंत्री व चिकित्सा मंत्री को पत्र लिखकर उच्चस्तरीय जांच की मांग की थी। जिस पर अतिरिक्त निदेशक चिकित्सा शिक्षा जयपुर की अगुवाई में एक कमेटी गठित की गई थी। जांच कमेटी में वित्तीय सलाहकार निदेशालय चिकित्सा शिक्षा जयपुर, कोटा मेडिकल कॉलेज से डॉ. दीपिका मित्तल, सहायक लेखाधिकारी प्रथम को शामिल किया गया था। कमेटी ने 30 मई 2022 को जांच पूरी की।