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फल-फूल रहा फूलों का कारोबार, कोटा के फूलोंं की महक माया नगरी तक फैली

अपनों के आगमन पर स्वागत का अवसर हो या मंदिरों में आस्था और पूजा-अर्चना का, हर दिल को जीतने में माहिर होते हैं फूल। लेकिन, क्या कभी आपने अंदाजा लगाया है कि शहर में प्रतिदिन कितने फूल भगवान को अर्पित होते हैं। शहर का श्रद्धा भाव देखिए, एक मोटे अनुमान तौर पर रोजाना 10 क्विंटल फूलों से शहर के देवालय महकते हैं।

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रोजाना दस क्विंटल फूलों से महकते हैं कोटा के देवालय

फल-फूल रहा फूलों का कारोबार, कोटा के फूलोंं की महक माया नगरी तक फैली

अपनों के आगमन पर स्वागत का अवसर हो या मंदिरों में आस्था और पूजा-अर्चना का, हर दिल को जीतने में माहिर होते हैं फूल। लेकिन, क्या कभी आपने अंदाजा लगाया है कि शहर में प्रतिदिन कितने फूल भगवान को अर्पित होते हैं। कोटा के फूलों की खुशबू कहां तक फैली है। सालाना कोटा संभाग में 650 मीट्रिक टन फूलों की पैदावार होती है। चौंक गए न....! यह तो सिर्फ पैदावार का एक आंकड़ा है। शहर का श्रद्धा भाव देखिए, एक मोटे अनुमान तौर पर रोजाना 10 क्विंटल फूलों से शहर के देवालय महकते हैं। इतना ही नहीं, कोटा के फूलों की महक माया नगरी तक भी है। कोटा संभाग से देश के विभिन्न शहरों सहित मुंबई में भी फूलों की डिमांड है। कोटा के गंगानगरी गुलाब, गुलदाऊदी, कलकत्ती गैंदा के फूल मंदिरों व शादी विवाह के मण्डपों में ही नहीं, बल्कि किसानों के घरों में खुशहाली बिखेर रहे हैं।

हाड़ौती में गुलाब की खेती तीन गुना तक बढ़ी
हाड़ौती क्षेत्र में किसानों का रुझान धान व गेहूं की फसल पर था, लेकिन मानसून की अनिश्चितता व प्राकृतिक आपदा से किसानों को खेती में नुकसान उठाना पड़ता था। डेढ़ दशक पहले हाड़ौती सम्भाग में फूलों की खेती नाममात्र की होती थी, लेकिन अब सम्भाग में 112 हैक्टेयर से ज्यादा में गंगानगरी गुलाब, कलकती गैंदा, रजनीगंधा, गुलदाऊदी, गैलार्डिया व हजारे सहित अन्य फूलों की खेती होती है। यानी पिछले पांच सालों में सम्भाग में फूलों की खेती तीन गुना तक बढ़ गई।

फूलों की खेती ने बदली जिदंगी
गंगानगरी गुलाब ने बूंदी जिले के किसानों की जिंदगी ही बदल दी है। अकेले नोताड़ा भोपत गांव में 500 बीघा में अब गुलाब हो रहा है। हर बार गेहूं, धान की फसल पर होने वाली मेहनत से छुटकारा मिल गया है। सालाना आय भी पहले से छह गुना बढ़ गई है। पहले एक साल में जो किसान गेहूं की फसल से एक बीघा में 15 हजार रुपए कमाता था, अब गुलाब से 1 लाख रुपए तक कमा रहा है। गुलाब की एक बीघा खेती पर करीब 50 हजार का खर्चा आता है और साल में एक से डेढ़ लाख रुपए का मुनाफा होता है। वहीं एक बीघा गैंदे की खेती पर करीब 20 हजार का खर्चा आता है और आमदनी करीब एक से डेढ़ लाख तक की आमदनी होती है। गैंदा की पैदावार करीब 6 माह और गुलाब की दो से तीन साल तक होती है। इस कारण फूलों की खेती किसानों के लिए मुनाफे का सौदा बन गया है।

मंदिरों में 8 से 10 क्विंटल की खपत
जगत माता मंदिर के पुजारी जगत कुमार सुखवानी ने बताया कि शहर के सभी मंदिरों में रोजाना करीब 8 से 10 क्विंटल फूलों से देवी-देवताओं का शृंगार होता है। जगत मंदिर में ही रोजाना करीब 50 किलो फूलों से शृंगार होता है। शहर में आधा दर्जन बड़े मंदिर जहां फूलों से नित्य शृंगार होता है। इसके अलावा हर घर व दुकान में बने मंदिरों में भी फूलों की जरूरत पड़ती है।

कोटा संभाग: सालाना बुवाई व उत्पादन
फूल कोटा बारां बूंदी झालावाड़ उत्पादन
गुलाब (गंगानगरी) 15 04 25 07 255
गैंदा 07 08 10 15 260
गुलदाऊदी 05 05 01 - 63
गेलार्डिया (नौरंगा) 05 03 02 - 70
गैलार्डिया 0.1 - 0.1 0.05 -
(बुवाई हैक्टेयर में व उत्पादन मिट्रिक टन में)