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कोटा स्टोन से भरा ट्रेलर सौ फीट गहरी खाई में गिरा , चालक-खलासी ने कूद कर बचाई जान

एकलिंगपुरा घाटी में हुई दुर्घटना, हो चुकी दुर्घटना
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कोटा

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Rajesh Tripathi

Apr 20, 2019

kota news

कोटा स्टोन से भरा ट्रेलर सौ फीट गहरी खाई में गिरा , चालक-खलासी ने कूद कर बचाई जान

रावतभाटा. रामगंजमंडी से चित्तौडगढ़़ की ओर जा रहा कोटा स्टोन से भरा ट्रेलर गुरुवार देर रात ब्रेक फैल हो जाने से एकलिंगपुरा घाटा क्षेत्र में करीब सौ फीट गहरी खाई में जा गिरा। इस बीच ट्रेलर में मौजूद चालक व खलासी ने कूद कर जान बचाई।

जानकारी के अनुसार गुरुवार देर रात करीब 11 बजे रामगंजमंडी से कोटा स्टोन भरकर चित्तौडगढ़़ जा रहे ट्रेलर के एकलिंगपुरा घाटी क्षेत्र पार करते समय ऊपरी छोर पर पहुंचने के दौरान एकाएक ब्रेक पाइप फट गए। इससे ट्रेलर ढलान पर पीछे लुढ़कने लगा तो चालक व खलासी ने कूद कर जान बचाई। इसके बाद ट्रेलर करीब सौ फीट गहरी खाई में जा गिरा और उसमें भरा कोटा स्टोन बिखर गया। शुक्रवार सुबह घाटी क्षेत्र से गुजरते राहगीरों व वाहन चालकों ने खाई में क्षतिग्रस्त ट्रेलर को देखा तो मौके पर लोगों की भीड़ लग गई। सड़क पर खड़े दुपहिया व चारपहिया वाहनों के कारण यहां से गुजरने वाले अन्य वाहन चालकों को परेशानी हुई। घटनास्थल से करीब पांच सौ मीटर दूर होटल चलाने वाले राधेश्याम के मुताबिक दोपहर करीब बारह बजे चित्तैड़ जिले के बिछोर निवासी ट्रेलर मालिक भी मौके पर पहुंचा और चालक, खलासी से जानकारी ली। इसके बाद तीनों रवाना हो गए। देर शाम तक ट्रेलर खाई में ही पड़ा था।

पत्रिका ने चेताया था
कुण्डाल क्षेत्र में स्थित एकलिंगपुरा घाटी के 3 मीटर क्षेत्र से गुजरना किसी खतरे से कम नहीं है। खातीखेड़ा, रेनखेड़ा, रामगंजमंडी से गांधीसागर और रावतभाटा जाने वाले सभी वाहन इस घाटे से होकर गुजरते हैं। इसी तरह कुण्डाल-रावतभाटा मार्ग पर स्थित तीन किमी के इस घाटे से प्रतिदिन आठ निजी बसेंं, चार रोडवेज समेत सैकड़ों दुपहिया, चौपहिया वाहन गुजरते है। घाटी क्षेत्र में आए दिन पहाड़ी से पत्थर व मिट्टी गिरती रहती है। जो किसी खतरे से कम नहीं होते। बारिश के दिनों में यह समस्या ज्यादा बढ़ जाती है। घाटी क्षेत्र की स्थिति को लेकर राजस्थान पत्रिका के 22 अगस्त के अंक में 'पहाड़ों से गिरते पत्थरों से खतराÓ शीर्षक से समाचार प्रकाशित कर प्रशासन को चेताया था।

चेतावनी बोर्ड नहीं

घाटी क्षेत्र में न तो किसी तरह की प्रकाश व्यवस्था है और न वाहन चालकों को सचेत करने के लिए कोई चेतावनी बोर्ड लगे हुए हैं। ऐसे में घाटी क्षेत्र से अनजान वाहन चालकों के समक्ष परेशानी खड़ी हो जाती है।

हो चुकी दुर्घटना
खड़ी चढ़ाई वाली इस दुर्गम घाटी में पहाड़ी से गिरने वाले मलबे के कारण खड़ी ढलान पर उतरते वक्त वाहन के खाई में गिरने का भी अंदेशा रहता है। कुछ माह पहले एक धार्मिक आयोजन के लिए जा रहे एक परिवार के तीन दर्जन से अधिक लोग इस घाटे पर हनुमान मंदिर के पास ट्रैक्टर ट्रॉली पलटने से घायल हो गए थे।