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BIG NEWS: वकील तो छोडि़ए ‘मुंशी’ तक नहीं बन पाएंगे राजस्थान के Law Graduate Students

प्रदेश के राजकीय महाविद्यालयों में कानून की पढ़ाई कर रहे विद्यार्थी तेज-तर्रार वकील बनने का सपना दांव लगा हुआ है।

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कोटा

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Zuber Khan

Jun 09, 2018

low Students

BIG NEWS: वकील तो छोडि़ए 'मुंशी' तक नहीं बन पाएंगे राजस्थान के Law Graduate Students

विनीत सिंह. कोटा . प्रदेश के राजकीय महाविद्यालयों में कानून की पढ़ाई कर रहे विद्यार्थी तेज-तर्रार वकील बनने का सपना दांव लगा हुआ है। लॉ कॉलेजों के शैक्षणिक हालात 'मुंशीगिरी' सिखाने तक के काबिल नहीं। सूबे के 15 कॉलेजों में 7500 से ज्यादा विद्यार्थियों को महज 24 शिक्षक कानून की बारीकियां सिखा रहे हैं। कमी के बावजूद सरकार ने 15 शिक्षकों को अशैक्षणिक काम देखने के लिए विभिन्न विभागों में प्रतिनियुक्ति पर तैनात कर रखा है।

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खतरे में मान्यता
बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने राजस्थान के राजकीय विधि महाविद्यालयों को स्टाफ की कमी खत्म करने की शर्त पर एक साल की स्थाई मान्यता दे रखी है। नया शैक्षणिक सत्र शुरू होते ही एक बार फिर मान्यता का पेंच फंसने की आशंका है। शिक्षकों की कमी के चलते ज्यादातर महाविद्यालयों की मान्यता खतरे में पड़ जाएगी।

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'लखटकिया' बाबू
मानकों के मुकाबले विधि महाविद्यालयों में 126 शिक्षकों की कमी होने के बावजूद सरकार ने यहां तैनात 15 शिक्षकों को प्रतिनियुक्ति देकर अशैक्षणिक कार्यों पर लगा रखा है। सबसे ज्यादा 8 शिक्षकों को आईओसी का काम देखने के लिए कॉलेज आयुक्तालय में तैनात किया गया है। एक को सचिवालय और एक-एक शिक्षक की तैनाती अलवर, बांसवाड़ा, जोधपुर एवं सीकर विवि में अशैक्षणिक पदों पर की गई है। लॉ कॉलेज के असिस्टेंट प्रोफेसर को करीब एक लाख और एसोसिएट प्रोफेसर को डेढ़ लाख रुपए मासिक वेतन मिलता है। बावजूद इसके सरकार ने इन्हें आधे से भी कम वेतन वाले अशैक्षणिक पदों पर तैनाती दे दी।

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13 साल में नहीं मिले प्राचार्य
कॉलेज आयुक्तालय ने वर्ष 2005 में राजकीय महाविद्यालयों में चल रहे विधि संकाय को तोड़कर अलग से राजकीय विधि महाविद्यालयों की स्थापना की थी, लेकिन इन 13 साल में सरकार एक भी कॉलेज में स्थाई प्राचार्य तैनात नहीं कर सकी। वरिष्ठ शिक्षक को ही प्राचार्य का कार्यभार दे दिया।


बार काउंसिल ऑफ इंडिया के मानक
एक विधि महाविद्यालय संचालन के लिए भवन और संसाधनों के साथ-साथ होने चाहिए कम से कम 10 शिक्षक और एक प्राचार्य।

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...तो होने चाहिए : 15 प्राचार्य और 150 शिक्षक।
लेकिन हकीकत ये: इन कॉलेजों में 7500 से ज्यादा विद्यार्थियों की पढ़ाई का जिम्मा सिर्फ 24 शिक्षकों के हवाले। सिरोही और सीकर में एक भी शिक्षक नहीं।