
फोटो: पत्रिका
Rajasthan Budget Announcement: राज्य सरकार ने 2025 के बजट में कोटा मेडिकल कॉलेज में 150 करोड़ की लागत से कैंसर यूनिट स्थापना की घोषणा की गई थी लेकिन इसका भी बजट जारी नहीं किया गया। एमबीएस अस्पताल के कैंसर रोग विभाग में कैंसर मरीजों को आज भी कोबाल्ट मशीन से थैरेपी दी जाती है। जबकि कैंसर उपचार के लिए अत्याधुनिक लीनियर एक्सीलेरेटर मशीन का इंतजार कोटा के मरीजों को लंबे समय से है।
वर्तमान में कैंसर रोगियों को रेडियोथेरेपी के लिए जयपुर या अन्य बड़े शहरों का रुख करना पड़ रहा है। जिससे समय और आर्थिक बोझ बढ़ रहा है। कोटा मेडिकल कॉलेज में लीनियर एक्सीलेरेटर मशीन की स्थापना से हाड़ौती अंचल के हजारों कैंसर मरीजों को राहत मिलेगी। हालांकि राज्य सरकार ने पिछले बजट में लीनियर एक्सीलेरेटर मशीन लगवाने की घोषणा की थी। 40-45 करोड़ की लागत वाला यह प्रोजेक्ट बड़े निवेश की चुनौती बनी हुई है। इसके चलते यह प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी। मामला जयपुर स्तर पर लंबित है। इससे कैंसर मरीजों को एक छत के नीचे सभी चिकित्सा सुविधा का लाभ मिल सकेगा। मोड्यूलर ओटी बनाई जाएगी।
विश्व कैंसर दिवस 4 फरवरी को मनाया जा रहा है। इसकी थीम ‘यूनाइटेड बाय यूनिक’ (अनूठेपन में एकता) है। ये थीम हमें याद दिलाती है कि हर मरीज, हर कैंसर का प्रकार और हर जीवन ‘यूनिक’ (अनूठा) है, लेकिन इस बीमारी से लड़ने के लिए हमें ‘यूनाइटेड’ (एकजुट) होना होगा। हाड़ौती अंचल की बात करें तो तंबाकू, गुटखा सेवन, स्मोकिंग, लालदंत मंजन, शराब का सेवन, असंतुलित जीवनशैली, गलत खानपान और देर से जांच कैंसर के बढ़ते मामलों के प्रमुख कारण माने जा रहे हैं।
कैंसर विशेषज्ञों का कहना है कि पुरुषों में नाक, कान व गला व महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर, बच्चेदानी के कैंसर रोगी सर्वाधिक है। कोटा मेडिकल कॉलेज से जुड़े एमबीएस अस्पताल के कैंसर रोग विभाग के आंकड़े देखे तो पिछले तीन वर्षा के आंकड़े देखे तो इस साल कुछ कमी जरूर आई है, लेकिन अभी और जागरूकता की जरूरत है।
कोटा मेडिकल कॉलेज में 2024 से ओकों सर्जन की सुविधा मिल रही है। इसमें अब तक 250 मेजर सर्जरी की जा चुकी है। पैथोलॉजी में आइएससी मार्कर व अन्य डायग्नोसिस की सुविधा है। ओको वैन गांवों में कैंप कर रही है। इसमें अब तक 108 मरीजों को चिन्हित किया जा चुका है।
| 2022 | 2785 |
| 2023 | 2872 |
| 2024 | 2893 |
| 2025 | 2724 |
यदि कैंसर का पता शुरुआती अवस्था में चल जाए तो इसका इलाज संभव है, लेकिन जानकारी के अभाव और लापरवाही के कारण अधिकांश मरीज अंतिम चरण में अस्पताल पहुंचते हैं, जिससे उपचार कठिन हो जाता है। हाड़ौती अंचल में ग्रामीण क्षेत्रों में कैंसर के प्रति जागरूकता की कमी भी एक बड़ी चुनौती है। कई लोग लक्षणों को सामान्य बीमारी समझकर नजरअंदाज कर देते हैं।
चिकित्सा विभाग की ओर से समय-समय पर जांच शिविर और जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं, लेकिन इन्हें और व्यापक बनाने की आवश्यकता है। उन्होंने लोगों से नियमित स्वास्थ्य जांच कराने, तंबाकू से दूरी बनाने, संतुलित आहार अपनाने और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने की अपील की है। साथ ही उन्होंने कहा कि कैंसर से डरने के बजाय उससे लड़ने की जरूरत है। सही समय पर जांच और इलाज से कैंसर को हराया जा सकता है।
डॉ. संगीता सक्सेना, प्रिंसिपल, कोटा मेडिकल कॉलेज
| प्रकार | 2023 | 2024 | 2025 |
| नाक-कान-गला | 945 | 971 | 704 |
| आंत | 477 | 376 | 29 |
| ब्रेस्ट | 283 | 273 | 302 |
| बच्चेदानी | 182 | 141 | 153 |
Updated on:
04 Feb 2026 01:33 pm
Published on:
04 Feb 2026 12:04 pm
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