
पेयजल, सीवरेज और ग्रीन स्पेस पर 182.50 करोड़ खर्च होंगे
विकास कार्य करवाने में पार्षदों से पीछे के कारण अब महापौर-उपमहापौर ने नया दांव खेला है। अमृत योजना में महापौर ने अपने वार्ड के पार्क को शामिल करवा लिया है। इसकी बदौलत अब विकास कार्यों में अग्रिम पंक्ति में खड़े हो सकेंगे। उप महापौर भी पीछे नहीं रही। उन्होंने भी अपने वार्ड के पार्क का इस योजना में चयन करवा लिया है।
अमृत योजना में शहर में ग्रीन स्पेस एवं पार्कों के विकास के लिए पहले 10 करोड़ रुपए का प्रावधान रखा गया है। इसमें करीब एक दर्जन पार्क शामिल किए गए थे, लेकिन इसका बजट प्रावधान घटाकर 2.50 करोड़ रुपए कर दिया। इसके चलते केवल पांच पार्क और पौधारोपण को शामिल किया गया है। इसमें प्रत्येक विधानसभा क्षेत्रवार एक-एक पार्क शामिल किए गए हैं।
विकास कार्यों में भी महापौर से उप महापौर आगे थी। पार्क के विकास कार्यों में भी उप महापौर आगे रही है। महापौर के वार्ड के हनुमान पार्क पर कुल 18.66 लाख रुपए खर्च होंगे। जबकि उप महापौर के वार्ड के धानमंडी पार्क पर 45.28 लाख रुपए खर्च होंगे।
पानी के मीटर व क्षतिग्रस्त पाइप लाइनें बदलेंगी
अमृत योजना की रिपोर्ट के अनुसार शहर में पानी के पुराने मीटरों को तथा क्षतिग्रस्त पाइप लाइनों को बदला जाएगा। इसके लिए 70 करोड़ का प्रावधान रखा गया है। इसकी परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) जलदाय विभाग की ओर से तैयार की गई है।
इस प्रोजेक्ट को राज्य सरकार ने अनुमोदित भी कर दिया है। इसके टेण्डर की प्रक्रिया शुरू कर दी है। शहर के कई क्षेत्रों में पानी लाइनें क्षतिग्रस्त हो चुकी है। इससे पानी की बर्बादी होती है। इस कारण पाइप लाइनें बदली जाएगी।
शहर का बदलेगा सीवरेज सिस्टम
निगम की रिपोर्ट के अनुसार शहर के सीवरेज सिस्टम को बदलने के लिए कुल 470 करोड़ रुपए की समग्र डीपीआर तैयार की जा रही है। अमृत योजना में सीवरेज के लिए 120 करोड़ रुपए का प्रावधान रखा गया है। इसके अतिरिक्त 350 करोड़ रुपए का प्रावधान राज्य स्तर पर किया गया है।
आरयूआईडीपी की ओर से मैसर्स शाह टेक्निकल कन्सटेंट द्वारा डीपीआर तैयार की जा रही है। पुराने विज्ञान नगर, पुराने कोटा तथा नए कोटा का सीवरेज सिस्टम बुरी तरह बिगड़ गया है। इस कारण नए सिरे से सीवरेज लाइनें बिछाने की तैयारी चल रही है।
बाढ़ का पानी भरेगा तो जनता कोसेगी
अमृत योजना में अरबन ट्रांसपोर्ट व बाढ़ से बचाव के लिए नाले-नालियों का पुननिर्माण व मरम्मत का काम भी शामिल था, लेकिन निगम ने दोनों मुद्दे हटा दिए। निर्माण समिति के अध्यक्ष रमेश चतुर्वेदी ने इस पर आपत्ति जताते हुए कहा कि बारिश में नाले-नालियां ओवरफ्लो होकर घरों में पानी भरेगा तो जनता हमें कोसेगी। इस लिए इस योजना का स्वरूप नहीं बदला जाना चाहिए था।
अमृत योजना का आकार घटाया
नगर निगम ने अमृत योजना का आकार घटा दिया है। अब पांच की जगह तीन क्षेत्रों में ही काम होगा। इस योजना के काम शहर में जल्द ही धरातल पर उतरेंगे। इसके लिए निगम कार्य योजना को अंतिम रूप देने में जुटा हुआ है। हालांकि शहरी परिवहन सुविधा और बाढ़ से बचाव के समन्वित के काम इसमें से हटा दिए गए है। इसका निर्माण समिति ने एतराज जताया है। इस योजना में इससे ज्यादा बजट सीवरेज लाइनों की मरम्मत पर किया जाएगा। इस योजना में पानी, सीवरेज और ग्रीन स्पेस के लिए कुल 182.50 करोड़ रुपए का प्रस्ताव रखा गया है।
अमृत योजना के काम टेण्डर प्रक्रिया में चल रहे हैं। ग्रीन स्पेस में पहले 10 करोड़ का प्रावधान करते हुए अधिक पार्क शामिल किए गए थे। बजट घटाने के कारण यह स्थिति पैदा हो गई है। सभी वार्डों में समानरूप से विकास कार्य करवाए जाएंगे।
महेश विजय, महापौर
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