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मौसम विभाग का राजस्थान में यहां अलर्ट, मेडिकल विभाग ने जारी की एडवाइजरी

प्रदेश में पश्चिमी विक्षोभ के असर से हाड़ौती अंचल में एक बार फिर मौसम में परिवर्तन देखने को मिल रहा है। कोटा शहर में बुधवार को दिनभर बादल छाए रहे। मौसम सर्द बना रहा। इसके चलते लोग गर्म कपड़ाें में लदे नजर आए। अन्य दिनों की अपेक्षा दिन में चटक धूप नहीं खिली। बादल छाए रहने से ठंडी हवा चलती रही।

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प्रदेश में पश्चिमी विक्षोभ के असर से हाड़ौती अंचल में एक बार फिर मौसम में परिवर्तन देखने को मिल रहा है। कोटा शहर में बुधवार को दिनभर बादल छाए रहे। मौसम सर्द बना रहा। इसके चलते लोग गर्म कपड़ाें में लदे नजर आए। अन्य दिनों की अपेक्षा दिन में चटक धूप नहीं खिली। बादल छाए रहने से ठंडी हवा चलती रही।

प्रदेश में पश्चिमी विक्षोभ के असर से हाड़ौती अंचल में एक बार फिर मौसम में परिवर्तन देखने को मिल रहा है। कोटा शहर में बुधवार को दिनभर बादल छाए रहे। मौसम सर्द बना रहा। इसके चलते लोग गर्म कपड़ाें में लदे नजर आए। अन्य दिनों की अपेक्षा दिन में चटक धूप नहीं खिली।

मौसम विभाग की चेतावनी

सीएमएचओ डॉ. जगदीश सोनी ने जन साधारण से बचाव के उपाय अपनाने और एहतियात बरतने की अपील की है। उन्होंने बताया कि शहर सहित जिलेभर में सर्दी अब जोर पकड़ने लगी है। ऐसे में बचाव के पर्याप्त साधन व उपाय अपनाना जरूरी है।

9 दिन तक कड़ाके की सर्दी

इस बार शुरुआत से ही दिसंबर में तेज सर्दी का दौर रहा है। बीते 9 दिनों में से 10 दिन न्यूनतम तापमान 10 डिग्री के नीचे रहा है। एक दिन तापमान 5 डिग्री के पास पहुंचा है। जबकि बीते सात दिन से 5 डिग्री के नीचे तापमान रहा।

तेज होगी सर्दी

मौसम विभाग ने बताया कि एक पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हो चुका है। इसके कारण अगले चार-पांच दिन में न्यूनतम तापमान में बहुत गिरावट होने की संभावना है। राज्य में चल रहे शीतलहर का दौर अभी जारी रहेगा। 20 दिसम्बर से कोटा, भरतपुर संभाग में सुबह कहीं-कहीं पर घना कोहरा रहने की संभावना है।

चिकित्सा विभाग ने जारी की एडवाइजरी

शरीर का ठण्डा पड़ जाना, शरीर का सुन्न पड़ना, नाड़ी का धीमा व मन्द पड़ जाना, रोयें खड़े हो जाना व श्वसन तेज चलना। रोगी के समय पर उपचार नहीं लेने पर मृत्यु भी हो सकती है।

बचाव के उपाय

जहां तक हो सके घर के बाहर कार्य के लिए दिन में निकलें, स्वयं को व बच्चों को उपलब्ध ऊनी कपड़ों से ढकें, फुटपाथ पर रहने वाले भ्रमणशील लोग रात्रि में रैन बसेरा, सार्वजनिक भवन, धर्मशाला में रहें, खुले स्थान पर नहीं सोएं, रात्रि में बाहर कार्य करना या रहना जरूरी हो तो अपने पास अलाव लगाकर तापने की व्यवस्था करें, गर्म भोजन का सेवन करें। शारीरिक श्रम अधिक करें, हो सके तो सुबह व्यायाम करें। तेल की मालिश करें, जिस व्यक्ति को शीत/शीतलहर का प्रभाव पड़ जाए, उसे तत्काल कम्बल, रजाई आदि से ढकें, पास में अंगीठी, हीटर आदि जलाएं। कमरे में ताजा हवा का रास्ता बन्द नहीं करें, गर्म पेय पदार्थ गुड़, चाय, चिकनाई (घी), कॉफी, तेल का अधिक उपयोग करें, गर्म पानी की थैली उपलब्ध हो तो उससे सेक करें। सुबह गर्म पानी से नहाएं।