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#कोटा के एकमात्र संगीत स्कूल की बिगड़ी है लय-ताल…

Music School rampura kota : संगीत शिक्षकों की जगह लगा रखे हिन्दी, भूगोल व अन्य विषयों के शिक्षक शिक्षा मंत्री तक पहुंचा था मामला, अब मंत्री घारीवाल को बताई पीड़ा

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 रामपुरा संगीत स्कूल, रामपुरा संगीत स्कूल

रामपुरा संगीत स्कूल, रामपुरा संगीत स्कूल

कोटा. रामपुरा स्थित संगीत स्कूल के सुर-ताल बिगड़े हुए हैं। आलम यह है कि विद्यार्थियों को संगीत की तालीम हिन्दी, भूगोल, सामाजिक व संस्कृत पढ़ाने वाले शिक्षक दे रहे हैं। इससे शहर के एकमात्र संगीत स्कूल के विद्यार्थियों का संगीतज्ञ बनने का सपना धूमिल हो रहा है।
जानकारी के अनुसार स्कूल में भूषण के 285 व प्रभाकर के 27 विद्यार्थी अध्यनरत हैं। संगीत स्कूल कला शिक्षकों को तरस रहा है। यहां 1989 में शिक्षकों की भर्ती हुई थी, उसके बाद नहीं हुई। 2015 में विभाग ने संगीत स्कूल को स्टाफिंग पैटर्न से मुक्त रखा था, लेकिन बावजूद भूषण व प्रभाकर कक्षाओं के वरिष्ठ अध्यापकों के तीन पदों को समाप्त कर दिया। जिससे बोर्ड की कक्षाओं के पाठ्यक्रम को पढ़ाने वाले अध्यापक नहीं है।

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पहले झालावाड़ में था स्कूल
संगीत स्कूल पहले झालावाड़ में संचालित था। 1956 में संगीतज्ञ नवल किशोर राव के प्रयासों से यह स्कूल कोटा के रामपुरा महात्मा गांधी स्कूल संचालित हुआ। तब से यह स्कूल यहीं पर संचालित है। इस स्कूल से संगीत की शिक्षा लेकर कई विद्यार्थियों ने मुकाम पाया है। लेकिन अब इसकी बदहाली पर किसी का ध्यान नहीं है। गौरतलब है कि गत दिनों कोटा आए शिक्षा मंत्री गोविन्द सिंह डोटासरा को स्कूल की समस्याओं को अवगत कराया गया था। अब स्कूल में संगीत शिक्षकों भर्ती को लेकर नगरीय विकास एवं स्वायत्त शासन मंत्री शांति धारीवाल तक से गुहार की गई है।

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शिक्षक भी प्रतिनियुक्ति पर
संगीत स्कूल में कुल 19 जनों का स्टाफ है। इनमें शिक्षक कल्याण सिंह, मीना चौरायवाल, कुशाल कनवाड़ा, दीपक बादल प्रतिनियुक्ति पर लगे हैं। जबकि हिन्दी की राधा पाठक, आशा राठौर लगी हैं। शिक्षक मुक्ता शर्मा, सज्जन कंवर, राजेश गालव, श्याम लता, सुमन चौहान अन्य विषयों के हैं। इनमें राजेश गालव व सुमन चौहान ने म्यूजिक में डिप्लोमा लिया है। संगीत गायन की संगीता सोरल, तबला के राजकुमार कनाड़ा व नृत्य की बरखा जोशी, म्यूजिक की मृदुला वर्मा भी कार्यरत है।

पोर्टल पर नाम नहीं
संगीत स्कूल की शिक्षा विभाग के पोर्टल पर कोई जगह नहीं है। विभाग की ओर चलने वाले शाला दर्पण पोर्टल में नाम नजर नहीं आता। ऐसे में उच्चाधिकारियों को यह पता नहीं चलता कि स्कूल में क्या संसाधन हैं। भवन है या नहीं और कितने शिक्षक लगे हैं।

स्कूल का खुद का भवन नहीं
बरसों से संगीत स्कूल का खुद का अपना भवन नहीं है। महात्मा गांधी स्कूल में एक कमरा मिला हुआ है। उसमें ही प्रिंसिपल कक्ष है। स्टाफ बैठता है और प्रशासनिक कार्य होता है। यहीं पर तबला, हारमोनियम सहित अन्य स्टूमेंट रखे हैं। इसमें गिटार, तलबा व हारमोनियम पड़े-पड़े खराब हो गए।

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स्कूल में 1989 से शिक्षकों की भर्ती नहीं हुई। विभाग के पोर्टल पर भी इसका नाम दर्ज नहीं है। विभाग ने ही अन्य विषयों के शिक्षक प्रतिनियुक्ति पर लगा रखे हैं। स्कूल भवन के लिए बसंत विहार स्थित ब्लड बैंक के पास जमीन मिल चुकी है। सांसद कोष से राशि स्वीकृत हो चुकी है। जल्द उसे बनाने का प्रयास करेंगे।

अशोक जैन, प्रिंसिपल, संगीत स्कूल, रामपुरा