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एप से ही सफाई हो जाती तो बच जाते 65 करोड़ रूपए

कोटा. निगम ने शहर से कचरा उठाने के लिए पूरी ताकत झोंक दी, लेकिन जगह-जगह कचरे के ढेर ही नजर आते हैं।

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कोटा

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abhishek jain

Jan 25, 2018

Nagar Nigam Kota

कोटा.

स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत इंदौर की तर्ज पर अब जयपुर में बस, कार व सवारी गाडिय़ों में कचरा पात्र रखने की शुरूआत हो रही है, ताकी सड़क पर कचरा नहीं फैले, वहीं कोटा में हालात यह है कि मुख्य कचरा पोइंटों से समय पर कचरा तक नहीं उठा रहा। निगम ने शहर से कचरा उठाने के लिए पूरी ताकत झोंक दी, लेकिन जगह-जगह कचरे के ढेर ही नजर आते हैं। केवल सफाई समितियों की फाइलों से ही धूल साफ हो रही है। वहीं एप डाउनलोड कर शहर का कचरा साफ किया जा रहा है।

यदि एप डाउनलोड से ही सफाई हो जाती तो करोड़ों रुपए निगम को खर्च नहीं करने पड़ते। जबकी धरातल पर कुछ क्षेत्र ऐसे भी हैं जहां सालों से घर के आगे तालाब बना हुआ है। सफाई कर्मचारी माह में एक या दो बार आते हैं, और गंदगी की भयावाह स्थिति देख आंखें फेर जाते हैं।

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फैक्ट

65 करोड़ वार्षिक खर्च सफाई पर

2 सफाई समितियां

2450 कर्मचारी नगर निगम के पास

900 निगम के पास स्थाई सफाई कर्मचारी

1550 अस्थाई सफाई कर्मचारी भी कार्यरत

110 निगम के पास टिपर

सिर्फ गाडिय़ां दौड़ रही
टीम ने साजी देहड़ा, स्टेशन क्षेत्र, किशोरपुरा, पटरी पार क्षेत्र, नदी पार क्षेत्र सहित कई जगह जाकर सफई की व्यवस्था देखी। सफाई के नाम पर सड़क पर सिर्फ गाडिय़ां दौड़ रही है।

जगह-जगह कचरा
शहर में कई जगह तो स्वच्छता की धुन बजाकर कचरा संग्रहण किया जा रहा है। वहीं कई इलाके ऐसे हैं जहां कचरे के ढेर में लोगों को जिंदगी बिताने पर मजबूर होना पड़ रहा है। टीलेश्वर महादेव मंदिर के पीछे घोड़ा बस्ती में पत्रिका टीम ने जाकर देखा तो वहां खड़ा होना दुश्वार हो गया। घरों के सामने हो रहे खड्ढों में नालियों का पानी जमा है। स्कूल के चारो ओर गंदगी का अंबार है। रोड-नालियां सालों से नहीं बनी। जगह-जगह कचरे का ढेर है। रोड ही नहीं है तो झाडू भी क्यों लगे। गन्दगी के बीच ही लोग यहां जीवन यापन कर रहे हैं।

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गंदगी से अटी पड़ी बस्ती
घोड़ाबस्ती क्षेत्रवासी हरू बाई का कहना है कि जब से यहां रह रहे हैं तब से सफाई कर्मचारियों को यहां आते नहीं देखा। कभी कबार आते भी होंगे तो खानापूर्ति कर चले जाते हैं। पूरी बस्ती कचरे व गंदगी से अटी पड़ी है।

माह में एक बार सफाई
प्रेम नगर अर्फोडेबल योजना में एक माह में केवल एक बार सफाई होती है। वह भी कचरा पाइंटों की। घरों के आगे व नालियों की सफाई तो वहां रहने वाले हर व्यक्ति को स्वयं ही करनी पड़ती है। मुख्य नालियां चोक हैं। पानी नालियों से बाहर आ रहा है। पिछले 2 साल से यहां यही स्थिति है।

नहीं आती कचरे की गाड़ी
प्रेम नगर अर्फोडेबल योजना से इदरिस का कहना है कि ढाई साल से यहां रह रहा हूं। सफाई के नाम पर केवल कर्मचारी दर्शन देकर चले जाते हैं। रोड पर कचरा डालते हैं तो उड़कर वापस घरों में आ जाता है। यहां कचरे की गाडिय़ां नहीं आती।

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दूर करेंगे खामियां
महापौर महेश विजय का कहना है कि हमने सभी जगह कर्मचारी सफाई के लिए लगा रखे हैं। अगर कोई लापरवाही कर रहा है तो चेक करेंगे और कार्रवाई करेंगे। जहां भी कमियां सामने आएंगी, वहां दूर की जाएगी।