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अब जोर पकड़ेगी जिले में गेहूं की बुवाई, फिर भी रकबा कम रहने की आशंका

सरसोंं, चना व लहसुन समेत अन्य फसलों की 160984 हैक्टेयर में हो गई बुवाई, इस वर्ष सिंचाई के लिए पानी की कमी से घटेगा बुवाई का लक्ष्य  

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कोटा

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Mukesh Gaur

Oct 30, 2020

अब जोर पकड़ेगी जिले में गेहूं की बुवाई, फिर भी रकबा कम रहने की आशंका

अब जोर पकड़ेगी जिले में गेहूं की बुवाई, फिर भी रकबा कम रहने की आशंका

बारां. जिले में रबी की फसलों की बुवाई का दौर धीमा पडऩे के बाद अब फिर से गति पकडऩे लगा है। जिले में अब तक 160984 हैक्टेयर में सरसों, लहसुन, चने व गेहूं की फसलों की बुवाई हो चुकी है। अब चम्बल की दाईं मुख्य नहर के साथ जिले की अन्य बांध व तालाबों से माइनरों में जलप्रवाह शुरू होने से रेलना के बाद किसान बुवाई में जुट गए हैं। जिले में कृषि विभाग ने इस वर्ष 3 लाख 36 हजार 500 हैक्टेयर क्षेत्रफल में रबी की फसलों की बुवाई का लक्ष्य निर्धारित किया था। इस वर्ष जिले में मानसून काफी कमजोर रहने से निर्धारित लक्ष्य से बुवाई का क्षेत्रफल कम रहने की आशंका जताई जाने लगी है। कृषि अधिकारियों का कहना है कि बुवाई का निर्धारित लक्ष्य पूरा हो जाएगा। किसान भी पानी की उपलब्धता के आधार पर कम पानी की फसलों की बुवाई कर रहे हैं। कृषि विभाग के सूत्रों के अनुसार जिले में अब तक लगभग 83894 हैक्टेयर में सरसों की बुवाई हो चुकी है तथा किसान अब भी इसकी बुवाई में जुटे हैं। ऐसे में इस फसल का क्षेत्रफल 90 हजार हैक्टेयर से अधिक पहुंचने के आसार हैं।

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चने की बुवाई जारी
34589 हैक्टेयर में चने की बुवाई होने के बाद चम्बल सिंचित क्षेत्र के किसान इनदिनों भी इसकी बुवाई कर रहे हैं। विभाग ने चने समेत 45 हैक्टेयर में चने की बुवाई का पूर्वानुमान लगाया था, बुवाई का यही दौर जारी रहा तो लक्ष्य पूरा हो जाएगा। जिले में गत मानसून के कमजोर रहने तथा पानी की उपलब्धता के अनुसार कृाि अधिकारी किसानों को लहसुन की बुवाई से परहेज की सलाह दे रहे थे। पिछले दो साल से लहसुन के दामों में तेजी रहने से किसानों का इससे मोह नहीं छूट रहा। अब तक जिले में 29488 हैक्टेयर में लहसुन की बुवाई हो गई तथा मांगरोल व अन्ता क्षेत्रों में अभी भी बुवाई का दौर चल रहा है। ऐसे में इसका क्षेत्रफल 30 हजार से अधिक हैक्टेयर में होने का अनुमान है। जिले में अब तक 7380 हैक्टेयर में गेहूं की बुवाई हुई है। इसका लक्ष्य 1 लाख 73 हजार हैक्टेयर है। रेलना के बाद इस फसल का रकबा इस वर्ष घट रहा है। गत वर्ष जिले में गेहूं का रेकॉर्ड उत्पादन हुआ था। कृषि अधिकारियों का कहना है कि गेहूं की बुवाई के लिए 30 नवम्बर तक आदर्श समय है। ऐसे में किसान अब गेहूं की बुवाई में तेजी लाएंगे। लेकिन रकबा फिर भी नहीं बढ़ेगा।

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मानसून में बारिश कम होने से किसान कम पानी में अच्छी पैदावार देने वाली फसलों के प्रति खासी रूझान दिखा रहे हैं। ऐसे में गेहूं की बुवाई का निर्धारित क्षेत्रफल कम रह सकता है। लेकिन जिले में कुल बुवाई का लक्ष्य घटना तय है। जिले में अब तक निर्धारित से आधे क्षेत्रफल में रबी की फसलों की बुवाई हो चुकी है।
अतीशकुमार शर्मा, उपनिदेशक कृषि विस्तार