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रोडवेज बसों में कोटावासियों की जान संकट में! कैसे, पढि़ए खबर

राजस्थान राज्य पथ परिवहन निगम बसों की कमी से जूझ रहा है। कंडम बसें ही यात्रियों को लेकर सड़कों पर दौड़ रही है। इससे गंभीर हादसे का खतरा बना रहता है।
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कोटा

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Zuber Khan

Apr 19, 2019

roadways buses

रोडवेज बसों में कोटावासियों की जान संकट में! कैसे, पढि़ए खबर

कोटा. राजस्थान राज्य पथ परिवहन निगम Roadways buses की कमी से जूझ रहा है। कंडम बसें ही यात्रियों को लेकर सड़कों पर दौड़ रही है। इससे गंभीर हादसे का खतरा बना रहता है। बरसात के दिनों में खतरा और बढ़ जाता है। बसों में जगह-जगह से सीटों में लगे लोहे के एंगल निकल रहे हैं। सीट कवर भी फटे हुए हैं। इसके अलावा यात्री भार बढ़ाने के लिए परिचालक क्षमता से अधिक सवारियां बिठा रहे हैं।

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ओवरलोड खटारा बसें यात्रियों को सफर में कहीं भी धोखा दे सकती है । हादसों की आशंका से जान का भी संकट लगा रहता है। संभागभर में 200 बसों की दरकार है। सूत्रों की मानें तो गत पांच वर्षों में प्रदेश को नई बसें ही नहीं मिली। प्रदेश भर में 1000 से अधिक बसों का टोटा है। रोडवेज कर्मचारियों ने गत वर्ष सितम्बर में हड़ताल की थी तो रोडवेज बसों की मांग भी की थी। इसके बावजूद रोडवेज के बेड़े में नई बसें शामिल नहीं हो पाई हंै।

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roadways buses की कमी का खामियाजा खुद रोडवेज को ही भुगतना पड़ रहा है। निजी वाहन संचालक इसका जमकर फायदा उठा रहे हैं। उनकी मोटी चांदी हो रही है, वहीं कई यात्रियों को नहीं चाहकर भी यात्रा के लिए निजी बसों का सहारा लेना पड़ रहा है। सूत्रों के अनुसार अकेले कोटा डिपो में 10 से 11 लाख का राजस्व प्रतिदिन इन बूढ़ी बसों से मिल रहा है। कर्मचारियों के मुताबिक रोडवेज पर लोगों का विश्वास है, इसके बावजूद बसों की कमी लोगों को खलती है। मजबूरीवश उन्हें अन्य साधनों का उपयोग करना पड़ा है।

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कंडम बसों से ही करनी पड़ रही सवारी
एक ओर रोडवेज में नई बसें नहीं खरीदी जा रही हैं, वहीं हर दिन एक न एक बस कंडम होती है। जानकारी के अनुसार रोडवेज में यदि कोई बस 8 लाख किलोमीटर चल जाए तो वह कंडम मानी जाती है। 5 वर्ष पुरानी बस को भी कंडम घोषित कर दिया जाता है। इन नियमों के आधार पर हर दिन दो बसें कंडम हो रही हैं, लेकिन यात्रियों को इन्हीं बूढ़ी होती बसों में सवारी करनी पड़ रही है। इससे गंभीर हादसे की आशंका बनी रहती है।

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अनुबंध पर लेकर चला रहे हैं कार्य
कर्मचारी संगठन के पदाधिकारी शेख अशरफ अली ने बताया कि कोटा को वर्ष 2017 में 20 बसें मिली थी, इनमें से भी 10 बसों को यहां से ट्रांसफर कर दिया गया था। इधर कर्मचारी संगठनों के पदाधिकारी राधेमोहन ने बताया कि गत पांच वर्षों में विभाग ने एक भी बस नहीं खरीदी।

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यूं समझिए बसों की गणित
प्रदेश भर में फिलहाल 3593 बसों का संचालन किया जा रहा है। इनमें से 970 बसें कॉन्टेक्ट पर संचालित की जा रही हैं। प्रदेश को कम से कम 4500 से 5 हजार बसों की दरकार है। कोटा संभाग में करीब 200 से 250 बसों की दरकार है। सूत्रों के अनुसार कोटा डिपो के पास 76 बसें हैं। 30 गाडिय़ा अनुबंध पर चल रही हैं। यहां विभागीय तौर पर 15 से 20 गाडिय़ोंं की आवश्यकता है, वहीं कोटा, बूंदी, बारां, झालावाड़ा टोंक व सवाईमाधोपुर को मिलाकर करीब 200 बसों की दरकार है।

सरकार ने चुनाव के बाद रोडवेज बस की मांग समेत अन्य समस्याओं पर बात करने का आश्वासन दिया है। इसके बावजूद सरकार ने कर्मचारियों की मांगें पूरी नहीं की तो रणपीति तैयार करेंगे।
धर्मवीर चौधरी, प्रदेश महासचिव, एटक
हमारे पास करीब 100 बसें ऑन रोड हैं, कुछ गाडिय़ां एक्सप्रेस भी हैं, फिर आवश्यकता हुई तो विभाग को प्रस्ताव भेजे जाएंगे।
अजय मीणा, मुख्य प्रबंधक, रोडवेज