
कोर्ट
कोटा . पीसीपीएनडीटी के तहत गत दिनों गिरफ्तार एक महिला दलाल के मामले में अनुसंधान अधिकारी अदालत में संतोषप्रद जवाब नहीं दे सके। अनुसंधान में खामियों के चलते अदालत ने महिला दलाल को जमानत पर रिहा करने के आदेश दिए।
Breaking News: कैथून नगर पालिका अध्यक्ष आईना महक निलम्बित
इंद्रा कॉलोनी कच्ची बस्ती निवासी शांतिरानी वाल्मीकि को पीसीपीएनडीटी एक्ट के तहत गत दिनों डॉक्टर रमेश मालव के साथ गिरफ्तार किया गया था। शांति रानी पर आरोप था कि वह दलाल के रूप में काम कर रही है। इस मामले में उसके खिलाफ पीसीपीएनडीटी ब्यूरो ऑफ इंवेस्टीगेशन जयपुर में मुकदमा दर्ज किया गया था। जिसे अदालत में पेश करने पर जेल भेज दिया था।
शांतिरानी की ओर से उनके अधिवक्ता जहीर अहमद ने जिला एवं सत्र न्यायालय में जमानत का प्रार्थना पत्र पेश किया था। जिसे सुनवाई के लिए एससी एसटी अदालत में हस्तांतरित किया गया। यहां प्रार्थना पत्र पर बहस के दौरान अधिवक्ता ने कहा कि शांतिरानी को इस केस में झूठा फंसाया गया है। पत्रावली पर उनकी गिरफ्तारी संबंधी कोई भी प्रभावी साक्ष्य उपलब्ध नहीं हैं। प्रार्थिया से रुपयों की कोई बरामदगी भी नहीं की गई है।
यह मामला पीसीपीएनडीटी एक्ट की परिधि में भी नहीं आता है। इस मामले में यदि कोई अवैध कृत्य किया गया है तो वह डॉक्टर रमेश मालव ने किया है। अनुसंधान के दौरान डॉक्टर की सोनोग्राफी मशीन का कोई रिकॉर्ड प्राप्त नहीं किया गया है। डॉक्टर को अनावश्यक रूप से बचाया जा रहा है। इस आधार पर शांतिरानी को जमानत पर छोड़ा जाए। जबकि विशिष्ट लोक अभियोजक ने मामले की गम्भीरता को देखते हुए जमानत का लाभ दिए जाने का विरोध किया।
इस मामले में अदालत ने अनुसंधान अधिकारी पीसीपीएनडीटी थाने के निरीक्षक सीताराम को तलब किया। अदालत ने आईओ से डॉक्टर की सोनोग्राफी मशीन की रिपोर्ट, जब्ती, उनकी एकाएक कोटा में उपस्थिति समेत कई बिन्दुओं पर पूछताछ की तो वे एक भी सवाल का सं़तोषप्रद जवाब नहीं दे सके। आरोपितों की गिरफ्तारी से पूर्व धारा 41 सीआरपीसी के प्रावधानों की पालना नहीं करना, गिरफ्तारी के समय कितनी रकम बरामद की गई उसका उल्लेख नहीं करना, गिरफ्तारी का समय उल्लेख नहीं करना, तलाशी के दौरान मिले काले रंग के मोबाइल पर भी कोई अनुसंधान नहीं करना और कॉल डिटेल के आधार पर भी कोई प्रमाणित साक्ष्य एकत्र नहीं किए गए हैं।
सभी पक्षों को सुनने के बाद अदालत ने आदेश में कहा कि गिरफ्तारी भी समुचित रूप से नहीं की गई है। इसलिए सभी तथ्यों को देखते हुए और गुणावगुण पर टिप्पणी किए बिना प्रार्थिया अभियुक्त शांतिरानी को जमानत का लाभ दिया जाना न्यायाचित प्रतीत होता है। एडवोकेट जहीर अहमद ने बताया कि अदालत ने उसे 25-25 हजार की दो जमानतें और 50 हजार रुपए के मुचलके पर जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया।
Published on:
06 Mar 2018 04:50 pm
Copyright © 2026 Patrika Group. All Rights Reserved.
