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हाड़ौती के मूर्धन्य साहित्यकार रघुराज सिंह हाड़ा का निधन

राजस्थान के जन-पक्षधर साहित्यकारों में सिरमौर थे

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कोटा

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Deepak Sharma

Mar 30, 2020

हाड़ौती के मूर्धन्य साहित्यकार रघुराज सिंह हाड़ा का निधन

हाड़ौती के मूर्धन्य साहित्यकार रघुराज सिंह हाड़ा का निधन


कोटा. हाडौती अंचल के मूर्धन्य साहित्यकार रघुराज सिंह हाड़ा का सोमवार को निधन हो गया। उनके निधन का समाचार सुनते ही साहित्य और संस्कृति की जगत में गहरा शोक व्याप्त हो गया। विकल्प जन सांस्कृतिक मंच अध्यक्ष किशनलाल वर्मा, सचिव शकूर अनवर, तथा मंच से जुड़े साहित्यकारों महेंद्र नेह, दिनेशराय द्विवेदी, इन्द्र बिहारी सक्सेना, निर्मल पाण्डे, शून्य आकांक्षी, शरद तैलंग, चांद शेरी, कृष्णा कुमारी, अहमद सिराज फारूकी, सलीमा अफरीदी, सीमा तबस्सुम, नारायण शर्मा आदि ने कहा कि हाड़ा राजस्थान के जन-पक्षधर साहित्यकारों में सिरमौर थे।

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रघुराज सिंह हाड़ा ने हिंदी और राजस्थानी दोनों भाषाओं के विकास में अपना महति योगदान दिया। उनके संग्रह बोलते पत्थर, अनुताप, हरदौल आखर, केसुला का फूूल, रोटी और फूल राजस्थानी साहित्य की अनुपम धरोहर हैं। कवि सम्मेलनों में उन्हें सुनने के लिए जनसैलाब उमड़ पड़ता था। उनकी कविताएं बंजारा, भील-भीलनी, काजली तीज, कबूतराँ को जोड़ों को आज भी जन-जन में प्रसिद्ध हैं।