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प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना: वास्तविक और बीमित फसल का मिलान अनिवार्य, भूमि या फसल की गलत एंट्री की होगी जवाबदेही

कोटा

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Newsdesk

Aug 02, 2026

Rajasthan

कोयला (बारां). प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में अब किसानों की भूमि, फसल व अन्य विवरणों की गलत एंट्री करने पर सम्बन्धित बैंक या वित्तीय संस्था की जवाबदेही तय होगी। खरीफ 2026 से लागू नई व्यवस्था का उद्देश्य बीमा प्रक्रिया में पारदर्शिता के साथ जिम्मेदारी तय करना है। नई गाइडलाइन के तहत बीमित फसल और वास्तविक रूप से बोई गई फसल का सटीक मिलान राष्ट्रीय फसल बीमा पोर्टल पर दर्ज कराना अनिवार्य होगा। दोनों में अंतर पाए जाने पर सम्बन्धित बैंक या वित्तीय संस्था जिम्मेदार मानी जाएगी। खरीफ फसलों का बीमा कार्य जारी होने के चलते विभाग ने सभी सम्बन्धित संस्थाओं को विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं।
अधूरी या गलत जानकारी पर कार्रवाई

खरीफ 2026 ओर रबी 2026-27 के लिए बीमा करते समय बैंकों और वित्तीय संस्थाओं को किसानों के भूमि रिकॉर्ड, बोई गई फसल,प्रस्तावित फसल और अन्य आवश्यक विवरण पोर्टल पर सही तरीके से दर्ज करने होंगे। अधूरी या गलत जानकारी मिलने पर कार्रवाई की जाएगी।

पिछली गड़बड़ियों से लिया सबक

आयुक्तालय के अनुसार पिछले वर्षों में पर्याप्त जांच के बिना बिना पॉलिसियां जारी होने के मामले सामने आए थे। इससे पोर्टल पर दर्ज जानकारी और वास्तविक स्थिति में अंतर पैदा हुआ और किसानों को क्लेम के दौरान परेशानी का सामना करना पड़ा। कई मामलों में विवाद भी सामने आए। इन्हीं अनुभवों को देखते हुए अब सख्त प्रावधान लागू किए गए हैं।

गिरदावरी के आधार पर स्वत: बीमा नहीं होगा

नई व्यवस्था में अब केवल गिरदावरी के आधार पर स्वत: बीमा पॉलिसी जारी नहीं होगी। किसान की स्पष्ट सहमति और उसकी जानकारी के आधार पर ही नामांकन किया जाएगा। इसमें किसानों को अनावश्यक प्रीमियम से राहत मिलने के साथ उनके हितों की बेहतर सुरक्षा हो सकेगी।

-योजना के प्रावधानों के अनुरूप अब बीमा प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता होगी। वित्तीय संस्थाओं को निर्देश दिए कि वे किसानों की सही जानकारी ही पोर्टल पर दर्ज करें, ताकि भविष्य में किसी प्रकार का विवाद न हो और किसानों को समय पर लाभ मिल सके।
राजेश विजय, संयुक्त कृषि निदेशक, बारां

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45 करोड़ की सड़क एक साल में दूसरी बार टूटी, गुणवत्ता पर सवाल यपाटन मार्ग पर करीब 45 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित 22.50 किलोमीटर लंबी सड़क एक वर्ष के भीतर दूसरी बरसात भी नहीं झेल पाई। सड़क एक साल में दूसरी बार क्षतिग्रस्त हो गई है, जिससे निर्माण सामग्री की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। इस बार सुवासा, बाजड और जमीतपुरा गांव के बीच करीब 15 स्थानों पर डामर जगह-जगह से उखड़ गया है और गिट्टी बाहर निकलने लगी है। क्षतिग्रस्त सड़क पर पैचवर्क की मांग को लेकर ग्रामीणों ने शनिवार को सुवासा कस्बे में विरोध प्रदर्शन किया। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क पर बने गहरे गड्ढों के कारण विशेष रूप से रात्रि के समय वाहन चालकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। अंधेरे में गड्ढे दिखाई नहीं देने से आए दिन दोपहिया और चारपहिया वाहन चालक गिरकर चोटिल हो रहे हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन और सार्वजनिक निर्माण विभाग से तत्काल पैचवर्क और सड़क की स्थायी मरम्मत कराने की मांग की है। जानकारी के अनुसार, तालेड़ा से केशोरायपाटन तक सड़क निर्माण के लिए 45 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए थे। निर्माण कार्य 15 अगस्त 2022 से शुरू हुआ था और इसे सितंबर 2023 तक पूरा किया जाना था, लेकिन सड़क के दोनों ओर लगभग डेढ़ मीटर पटरी निर्माण का कार्य अभी भी कई स्थानों पर अधूरा पड़ा है। ग्रामीणों के अनुसार, सड़क पर लगभग एक वर्ष पूर्व डामरीकरण किया गया था, लेकिन दिसंबर 2025 में सुवासा, बाजड और जमीतपुरा के बीच करीब 20 स्थानों पर सड़क उखड़ गई थी। उस समय संवेदक द्वारा पैचवर्क कर सड़क की मरम्मत की गई थी, लेकिन मरम्मत कार्य की गुणवत्ता संतोषजनक नहीं रही। परिणामस्वरूप जुलाई 2026 में दूसरी बरसात शुरू होते ही सड़क फिर से उखड़ गई और कई स्थानों पर गिट्टी निकलने लगी है। लगातार टूट-फूट के कारण सड़क धीरे-धीरे बड़े गड्ढों में तब्दील होती जा रही है। इस मार्ग से प्रतिदिन करीब तीन हजार से अधिक छोटे-बड़े व भारी वाहन गुजरते हैं। यह सड़क नेशनल हाईवे 52 व मेगा हाईवे को जोड़ती है। सड़क की बदहाल स्थिति के कारण वाहन चालकों, किसानों, मजदूरों और आसपास के गांवह/वें के लोगों को रोजाना परेशानी झेलनी पड़ रही है। कई बार शिकायत करने के बावजूद अब तक स्थायी समाधान नहीं हो पाया है। अभिषेक गुर्जर, सहायक अभियंता, सार्वजनिक निर्माण विभाग, तालेड़ा ने बताया कि तालेड़ा से सुवासा के बीच कुछ स्थानों पर सड़क क्षतिग्रस्त हुई है और सड़क निर्माण का कुछ कार्य अभी शेष है। संवेदक का पूरा भुगतान अभी नहीं हुआ है। क्षतिग्रस्त सड़क की मरम्मत करने के निर्देश संवेदक को दे दिए गए हैं। सड़क वर्तमान में गारंटी अवधि में है और इसकी मरम्मत संवेदक द्वारा ही कराई जाएगी।

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