
कोयला (बारां). प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में अब किसानों की भूमि, फसल व अन्य विवरणों की गलत एंट्री करने पर सम्बन्धित बैंक या वित्तीय संस्था की जवाबदेही तय होगी। खरीफ 2026 से लागू नई व्यवस्था का उद्देश्य बीमा प्रक्रिया में पारदर्शिता के साथ जिम्मेदारी तय करना है। नई गाइडलाइन के तहत बीमित फसल और वास्तविक रूप से बोई गई फसल का सटीक मिलान राष्ट्रीय फसल बीमा पोर्टल पर दर्ज कराना अनिवार्य होगा। दोनों में अंतर पाए जाने पर सम्बन्धित बैंक या वित्तीय संस्था जिम्मेदार मानी जाएगी। खरीफ फसलों का बीमा कार्य जारी होने के चलते विभाग ने सभी सम्बन्धित संस्थाओं को विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं।
अधूरी या गलत जानकारी पर कार्रवाई
खरीफ 2026 ओर रबी 2026-27 के लिए बीमा करते समय बैंकों और वित्तीय संस्थाओं को किसानों के भूमि रिकॉर्ड, बोई गई फसल,प्रस्तावित फसल और अन्य आवश्यक विवरण पोर्टल पर सही तरीके से दर्ज करने होंगे। अधूरी या गलत जानकारी मिलने पर कार्रवाई की जाएगी।
पिछली गड़बड़ियों से लिया सबक
आयुक्तालय के अनुसार पिछले वर्षों में पर्याप्त जांच के बिना बिना पॉलिसियां जारी होने के मामले सामने आए थे। इससे पोर्टल पर दर्ज जानकारी और वास्तविक स्थिति में अंतर पैदा हुआ और किसानों को क्लेम के दौरान परेशानी का सामना करना पड़ा। कई मामलों में विवाद भी सामने आए। इन्हीं अनुभवों को देखते हुए अब सख्त प्रावधान लागू किए गए हैं।
गिरदावरी के आधार पर स्वत: बीमा नहीं होगा
नई व्यवस्था में अब केवल गिरदावरी के आधार पर स्वत: बीमा पॉलिसी जारी नहीं होगी। किसान की स्पष्ट सहमति और उसकी जानकारी के आधार पर ही नामांकन किया जाएगा। इसमें किसानों को अनावश्यक प्रीमियम से राहत मिलने के साथ उनके हितों की बेहतर सुरक्षा हो सकेगी।
-योजना के प्रावधानों के अनुरूप अब बीमा प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता होगी। वित्तीय संस्थाओं को निर्देश दिए कि वे किसानों की सही जानकारी ही पोर्टल पर दर्ज करें, ताकि भविष्य में किसी प्रकार का विवाद न हो और किसानों को समय पर लाभ मिल सके।
राजेश विजय, संयुक्त कृषि निदेशक, बारां
Updated on:
02 Aug 2026 06:00 am
Published on:
02 Aug 2026 06:00 am
