
कोटा के पावर सेक्टर को मिली बड़ी सौगात, थर्मल में स्थापित होगा 800 मेगावाट का सोलर प्लांट
कोटा. दो दशक की अनदेखी के बाद आखिरकार प्रदेश सरकार को कोटा थर्मल सुपर पावर प्लांट (केटीपीएस) ( Kota Thermal Super Power Plant ) को बचाने की सुध आ ही गई। पर्यावरण नियमों की सख्ती और उत्पादन में अधिक लागत आने के कारण सरकारें सालों से कोटा थर्मल ( Kota Thermal ) को बंद करने की कोशिश में जुटी थी, लेकिन गुरुवार को मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने विधानसभा में बजट पेश करते हुए कोटा थर्मल की खाली जमीन पर सोलर प्लांट लगाने की घोषणा कर मुसीबतों में घिरे कोटा के पावर सेक्टर को संजीवनी दे दी।
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पत्रिका के प्रस्ताव को मिली हरी झंडी
राजस्थान पत्रिका ने हाल ही में कोटा थर्मल को बचाने के लिए अभियान की शुरुआत की थी। अभियान से जुड़े अर्थशास्त्री डॉ. गोपाल सिंह और डॉ. कपिल देव शर्मा ने थर्मल पर निर्भर लोगों की रोजी रोटी बचाने के लिए आउटडेटेड हो चुकीं पुरानी इकाइयों को बंद कर इनकी जगह 600 और 660 मेगावाट की नई तकनीकी की इकाइयां स्थापित करने या फिर सोलर पॉवर प्लांट लगाने का सुझाव दिया था। कोटा थर्मल में किसी भी इकाई को बंद किए बगैर ही 800 मेगावाट का सोलर पावर प्लांट स्थापित किया जा सकता है।
थर्मल के पास एशडाइक की 400 हेक्टेयर खाली जमीन है। जिसमें से जोहरा सागर की करीब 170 हेक्टेयर क्षेत्रफल में फैली एशडाइक तो पूरी तरह खाली है। पहले चरण में इस पर आसानी से बड़ा सोलर पार्क स्थापित किया जा सकता है। दूसरी एशडाइक में भरी राख का भी आवंटन कर उसे एक साल में आसानी से खाली कराया जा सकता है। इसके साथ ही ग्रीन एनर्जी सिटी प्रोजेक्ट में कोटा को शामिल कर 300 मेगावाट का रूफटॉप सोलर सिस्टम स्थापित किया जा सकता है।
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कोटा बेहद मुफीद
कोटा विश्वविद्यालय में भौतिक विज्ञान विभाग के अध्यक्ष डॉ. घनश्याम शर्मा ने बताया कि सौर ऊर्जा संयत्र स्थापित करने के लिए कोटा बेहद मुफीद है। साल में 200 से 250 दिन तक यहां सौर ऊर्जा उत्पादन के लिए पर्याप्त सूर्य का प्रकाश मिलता है। औसतन आठ घंटे रोज भी मान लें तो कोटा में 2000 घंटे से ज्यादा समय तक सोलर प्लांट चलाए जा सकते हैं। उन्होंने बताया कि एक हेक्टेयर क्षेत्रफल में करीब दो मेगावाट का सोलर प्लांट स्थापित किया जा सकता है। ऐसे में कोटा थर्मल की 400 हेक्टेयर में फैली एशडाइक पर बेहद सुगमता से 800 मेगावाट का सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित किया जा सकता है।
Published on:
21 Feb 2020 08:00 am

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