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जोधपुर के महाराज से जब सरदार बोले,..’ कहिए तो पाकिस्तान भिजवा दूं..लेकिन रियासत कहीं नहीं जाएगी’

राजा-महाराजाओं से लोहा लेना इतना सरल और सहज नहीं था जिताना लौहपुरुष ने अपनी कूटनीति से बना दिया। ऐसा ही एक किस्सा है जोधपुर के राजा हनुमंत सिंह का.........
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जब सरदार बोले..' कहिए तो पाकिस्तान भिजवा दूं..लेकिन रियासत कहीं नहीं जाएगी'

कोटा डिजिटल डेस्क. गुजरात के नर्मदा जिले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सरदार की 182 मी. ऊंची प्रतिमा का अनावरण कर स्टेच्यू ऑफ युनिटी को देश को समर्पित कर दिया। सरदार ही वो शख्स थे जिन्होंने आजादी के बाद अलग-अलग रियासतों में बंटी हुई 565 से ज्यादा रियासतों का भारत में विलय कराया। आक्रांताओं से लेकर राजाओं तक..सामा्रज्यवाद से लेकर विस्तारवाद तक इस देश ने सबकुछ देखा और झेला है। राजा-महाराजाओं से लोहा लेना इतना सरल और सहज नहीं था जिताना लौहपुरुष ने अपनी कूटनीति से बना दिया। ऐसा ही एक किस्सा है जोधपुर के राजा हनुमंत सिंह का.........

जोधपुर रियासत को पाकिस्तान में विलय करने के लिए उसके निर्माता तथा प्रथम गर्वनर जनरल मोहम्मद अली जिन्ना कई प्रलोभन दे रहे थे। जोधपुर का मामला बड़ा पेचीदा होता जा रहा था। पाकिस्तान ने कई अभिनेत्रियों को जोधपुर भी भेजा था। (स्वतंत्रता संग्राम के अमर पुरोधाओं पर प्रकाशित एक किताब के अनुसार)
हनुवंत सिंह पाक के साथ सांठ-गांठ की खबर सरदार तक पहुंच गई , पाक के साथ समझौते पर मसौदा तक तैयार हो चुका था। सरदार ने उन्हें दिल्ली बुलाया और कहा, 'तो आप पाकिस्तान जाना चाहते है?Ó यह सुनकर हनुमंत सिंह सकपका गए..सरदार बोले कहिए तो भिजवा देता हूं पर रियासत कहीं नहीं जाएगी। इस व्यवहार से हनुमंत सिंह नाराज हो गए लेकिन आखिर जोधपुर महाराजा मान गए और भारत संघ में विलय के दस्तावेज पर हस्ताक्षर कर दिए।

जोधपुर के महाराज नेे इसी संदर्भ में एक और बचकानी हरकत की थी। वे रियासती विभाग के सचिव वीपी मेनन पर गोली चला देते । यह घटना भी विलय के दिनों की ही है। जब महाराजा ने मेनन से कहा मैं तुम्हें गोली मार दूंगा, इस पर मेनन बोले अगर आप सोचते है कि मुझे मार देने से जोधपुर रियासत का विलय रद्द हो जाएगा तो यह आपकी गलतफहमी है। जयपुर महाराजा मानसिंह द्वितीय की आत्मकथा द लास्ट महाराजा में एक और चौकाने वाली घटना का वर्णन है। जोधपु महाराजा ने सुन रखा था कि सरदार पटेल अडिय़ल किस्म के हैं वे राजाओं तक का अपमान करने में नहीं झिझकते तब उन्होंने घोषणा कि थी अगर सरदार ने मेरे साथ भी ऐसा किया तो मैं उन्हें गोली मार दूंगा। जब महाराजा से सरदार पटेल की भेंट हुई तो उन्हें देखकर सरदार ने उन्हें,'मेरे प्यारे भतीजेÓकहकर संबोधित किया। यह कहकर सरदार ने महाराजा को हर दृष्टि से निहत्था कर दिया था।


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