
Kota News : गर्मी के दिनों में नदियों में कलकल बहता पानी, नदी किनारे पशुओं का जमघट अब गुजरे जमाने की बातें होकर रह गई। अब गर्मी आने से पहले ही नदियों में पानी सूख जाने से नदियों के किनारे पशुओं का जमघट देखने को नहीं मिलता। नदी तट किनारे पर बाल गोपालकों के समूह किलकारियां मारते हुए नहाने के लिए डुबकी लगाने के नजारे उपखण्ड में विलुप्त हो चुके है। लंबे समय से नदियों के पुनरुद्धार व बरसाती पानी को संग्रहित करने की कोई योजना नहीं बनने से रामगंजमंडी की नदियों का पानी सर्दी में दम तोड़ना शुरू हो जाता है तो गर्मी में ऐसी नदियों में दूर-दूर तक पानी नहीं दिखता।
करीब सात साल पहले पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने पायलट प्रोजेक्ट में नदियों को जोड़ने की मंशा जाहिर करते हुए प्रदेश को दो नदियों का चिन्हीकरण करके योजना का मसौदा तैयार करने की शुरुआत की थी। तत्कालीन भाजपा सरकार के कार्यकाल बीत जाने पर पायलट प्रोजेक्ट फाइल में दफन हो गया। अब प्रदेश में फिर से भाजपा की सरकार है।
पायलट प्रोजेक्ट में हाड़ौती संभाग की आहू नदी को शामिल किया गया था। जिसका उद्गम स्थान मध्यप्रदेश के नागदा से शुरू होता है।
आहू नदी में बहकर आने वाला बरसाती पानी झालावाड जिले के मशालपुरा से होता हुआ काली सिंध में मिल जाता है। बरसात थमने पर अमझार नदी सर्दी में सूख जाती है और आहू नदी में सिंचाई विभाग द्वारा बनाए एनिकट तक पानी नजर आता है। जिससें सुकेत की जलदाय योजना को पानी उपलब्ध होता है।
अमझार व आहू नदी के संगम स्थल पर सिंचाई विभाग बड़े एनिकट का निर्माण करवाता है तो बरसात में व्यर्थ बहने वाले पानी की उपयोगिता खेती कार्य के साथ रामगंजमंडी, सातलखेड़ी, कुदायला, मायला की पेयजल योजना संचालित करवाई जा सकती है। अभी रामगंजमंडी को अस्सी किलोमीटर दूर से पानी मिलता है ओर उपखंड के 142 गांवों को इस योजना से जोड़ा हुआ है। योजना से 48 घंटे में जलापूर्ति होती है। पेयजल संकट से सालों से परेशान बड़ोदिया आतरी के परिवारों को पाइपलाइन के जरिये जलापूर्ति करवाई जा सकती है। एक फसल प्राप्त करने वाले किसान दो से तीन फसल लेने पर किसान की जीवन रेखा में बदलाव आ सकता है। सुकेत क्षेत्र के नदी के किनारे बसे बड़ोदिया, आतरी, झिरी, झिलारा, चौकी, सलावद व अमझार नदी वाले क्षेत्र के कमलपुरा, कुकड़ा, अमझार, खेडली, गुड़ाला जैसे गांवों में रहने वाले काश्तकारों की खेती का रकबा बढ़ने से उन्हें आर्थिक मजबूती दोनों नदियों पर एनिकट से बनाई जा सकती है।
आहू नदी के दोनों किनारे पर जिन काश्तकारों के खेत है उनको नदी में पानी की आवक का भरपूर लाभ मिलता है। भवानी मंडी के ग्रामीण इलाकों से होते हुए रामगंजमंडी क्षेत्र के हजारों बीघा भूमि में इसी नदी में पंप लगाकर काश्तकार सिंचाई करते हैं कुछ इसी तरह की स्थिति अमझार नदी के किनारे खेती करने वाले काश्तकारों की है। कई किसानों ने नदी में कुएं बना रखे है ताकि नदी में पानी की आवक ठहरने पर नदी के पैंदों में जमा पानी रिसकर कुएं में आने पर वह सिंचाई में पानी का उपयोग कर सकें।
सुकेत आहू नदी पर सिंचाई विभाग ने एनिकट निर्माण किया है। एनिकट बनने से किसानों को फायदा मिल रहा है। औसत बरसात होने पर नदी का पानी नहीं सूखता है लेकिन जब नदी सूखती है तो सुकेत का भार भी राणाप्रताप सागर योजना पर आ जाता है। सुकेत नदी में पानी नहीं सूखे इसके लिए अमझार व आहु नदी के संगम स्थल पर बड़े एनिकट का निर्माण पेयजल योजना के साथ हजारों बीघा भूमि को सिंचाई के लिए पर्याप्त मात्रा में पानी उपलब्ध करवा सकता है।
आहू नदी चंबल नदी से निकली हुई है जो नागदा से होते हुए झालावाड़ जिले में प्रवेश करती हुई कोटा जिले के सुकेत कस्बे से होकर झालावाड़ के गागरोन किले के निकट से कालीसिंध नदी में समाहित होती है। आहू में रामगंजमंडी क्षेत्र में बहने वाली अमझार नदी, पाटली नदी का बरसाती पानी मिलता है। अमझार नदी में देवली, खेड़ली सहित दरा अभयारण्य क्षेत्र में बरसात के समय बहने वाला पानी आता है। पाटली नदी में मध्यप्रदेश के कुछ हिस्से में झालावाड़ जिले के गांव के अलावा रामगंजमंडी क्षेत्र के जुल्मी, देवली, धरनावद, अरनिया, कुम्भकोट का बरसाती पानी आता है। पाटली नदी का पानी सुकेत में पुलिया के पास आकर मिलता है तो वही अमझार नदी का पानी बड़ोदिया आतरी के पास आहू में समाहित हो जाता है।
Published on:
23 Feb 2024 02:29 pm

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