सैयद जैनुल ने कहा कि भारत में आजादी के बाद भी कई चुनौतियों का सामना कर उन पर जीत हासिल की है। हमारी कई पीढ़ियों ने धार्मिक विवादों का भी सामना किया है। हमें यह बात समझना होगी की अदालतों के निर्णय में एक पक्ष जीतता है और एक पक्ष हारता है। कही ना कही एक पक्ष निर्णय से असहमति के साथ-साथ अपने दिल में खटास व द्वेषता नहीं समाप्त कर पाता है। दोनों पक्ष, दोनों धर्मों के लोग मथुरा-काशी जैसे विवादों का हल अदालतों के बाहर तलाशने की कोशिश करें। उन्होंने सीएएए पर कहा कि बीते कई साल से मुसलमानों को गुमराह किया गया है। सीएएए कानून से भारत के मुसलमानों की नागरिकता छीनने की कोशिश हो रही है। यह किसी की भी भारतीय नागरिकता छीनने के लिए नहीं है।