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रोजा देता है किसी का बुरा न करने का प्रशिक्षण

अफ्तार के वक्त कोल्ड ड्रिंक से बचे, तुरंत खाना न खाएं, 2-3 घंटे बाद पानी पीए......

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कोटा

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Anil Sharma

May 22, 2019

kota

परिवार के साथ अफ्तार करते डॉ. साजिद खान।

कोटा. रमजान इंसान को निखारता और संवारता है। रोजा इस बात का प्रशिक्षण देता है कि इंसान किसी का बुरा न करें। इसी माह खुदा ने बंदों की रहनुमाई के लिए कुरआन शरीफ को जमीन पर उतारा। इस वजह से पूरे माह मुसलमानों पर रोजे फर्ज किए हैं। रमजान का मकसद खुदा की इबादत करते हुए उसके बताए तरीके से जिंदगी गुजारना है।
विज्ञान नगर क्षेत्र स्थित संजय नगर निवासी झालावाड़ सीएमएचओ डॉ. साजिद खान बताते हैं, रोजा 15 घंटे बाद खोला जाता है। ऐसे में रोजेदार इस तरह का भोजन करें जो पूरे दिन आपको एनर्जी दे। आप हरी सब्जियां, मसूर की दाल, साबूत अनाज और अंजीर का सेवन कर सकते हैं। यह एनर्जी के साथ सेहतमंद भी रखेंगे।
रोजेदार सेहरी में दही, छाछ, दलिया, अंजीर, नारियल पानी, सूप, सलाद, ओट्स, ब्रेड, अंकुरित दालें व फल का सेवन करें। इनमें जरुरी पोषक तत्वों के साथ मिनरल्स, विटामिन्स, मैग्नीशियम, कैल्शियम, सोडियम और पोटेशियम होता है, जो तेज गर्मी में शरीर को स्फूर्तिवान बनाए रखता है।
डॉ. साजिद अफ्तार के समय पिंड खजूर का सेवन विशेष मानते हैं। इसमें नेचुरल शुगर होती है, रोजे के दौरान कम हुआ शुगर लेवल को बैलेंस करता है। वे कहते हैं अफ्तार के वक्त कोल्ड ड्रिंक से बचे, तुरंत खाना न खाए, 2-3 गिलास पानी पीएं और 2 घंटे बाद खाना खाएं।
पत्नी रानी खान कहतीं हैं, रमजान का सब्र से वैसा ही ताल्लुक है, जैसा समंदर का गहराई से। रोजा आंख की तरह है तो सब्र आंख की रोशनी। कुरआन में जिक्र है अल्लाह सब्र करने वालों के साथ है। सब्र का नाम ही रमजान है। साजिद के पिता शब्बीर खान बताते हैं रमजान में मिल बैठकर रोजा खोलने से सौहार्द, सदभाव व समर्पण के भाव आते हैं। मां साहिरा बैगम बताती हैं कि रोजे रखने की सार्थकता इसी में है कि इस एक माह में जो अर्जित किया, शेष 11 महीनों में भी उस पर अमल रहे।

मासूम जुनेरा ने रखा पहला रोजा
माहे रमजान में बच्चों में भी अकीदतभाव उमड़ रहा है। वे भी बड़ों को देखकर रोजे रख रहे हैं। बोरखेड़ा फ्रैंड्स कॉलोनी निवासी जुनेरा हुसैन ने मंगलवार को पहला रोजा रखा। उसने 15 घंटे भूखी-प्यासी रहकर दिनभर खुदा की इबादत की। केंद्रीय कारागृह के मुख्य पहरी इशरत हुसैन ने बताया कि उनकी बेटी जुनेरा सुबह जल्दी उठकर रोजा रखने की जिद पर अड़ गई। पहले तो मना किया, लेकिन उसने जिद की तो इजाजत दी। हुसैन ने बताया कि बच्चों को अभी जैसी सीख मिलेगी, वह भविष्य में भी वैसा ही करेंगे। वक्फ नगर क्षेत्र में भी कुछ बच्चे अपने परिवार जनों के साथ रोजा खोलते नजर आए। क्षेत्र में महिलाओं के लिए आयोजित रोजा अफ्तार कार्यक्रम में इन बच्चों ने रोजा खोला। पहला रोजा रखने वाली तस्मिया कहती हैं कि रमजान नेकी कमाने का महीना है। इलमा ने कहा कि रोजा हमें बुराइयों से दूर रहने की सीख देता है। मेराज, शहनाज, अजरा, नाजिया, नोशी, तमन्ना, सेलिना, निदा, इंशा, शिफा, निभा, हज्जन आइशा व हज्जन शहीदन ने रोजा इफ्तार किया।