राजस्थानी स्कूलों तक पहुंचे चंबल के घाट, किशोरों को सुनाएंगे नदी की वेदना

Vineet singh

Publish: Oct, 13 2017 10:45:00 (IST)

Kota, Rajasthan, India
राजस्थानी स्कूलों तक पहुंचे चंबल के घाट, किशोरों को सुनाएंगे नदी की वेदना

नदी के किनारों से उठकर चम्बल के घाट राजस्थानी स्कूलों तक जा पहुंचे हैं। जहां किशोरों को नदी की वेदना सुना उसे बचाने की गुहार लगाएंगे।

चम्बल की वेदना अब किशोरों के मन को झंकझोरेगी। उन्हें बताएगी कि किस तरह रेगिस्तानी इलाके को हरियाली का तोहफा देने वाली नदी को बदले में गंदगी और कचरे का ढ़ेर मिला। इंसानी जरूरतों ने कैसे जीती जागती नदी को मार डाला। 12वीं की पढ़ाई कर रहे किशोरों को जलश्रोतों की जरूरत और उनकी बदहाली की ये गाथा खुद चम्बल के घाट सुनाएंगे। किशोरों के मन में नदी संरक्षण की अलख जगाने का जरिया बना है राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड और पर्यावरण संरक्षण का बीज डाल रहा है साहित्यकार अतुल कनक का राजस्थानी भाषा की किताब साहित्य सुजस में प्रकाशित हुआ अध्याय 'चामल के घाटा पे' ।

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पाठ्यक्रम में शामिल हुआ चम्बल के घाटा पे

माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की 12वीं कक्षा के विद्यार्थी कोटा की चम्बल नदी का पाठ भी पढ़ेंगे। राजस्थानी भाषा एेच्छिक विषय की पुस्तक साहित्य सुजस में केन्द्रीय साहित्य अकादमी से पुरस्कृत कोटा के साहित्यकार अतुल कनक के लेख 'चामळ का घाट पे' को पाठ्यक्रम में शामिल किया गया है। इस पाठ में प्राकृतिक जलस्रोतों व इंसानियत को बचाने का संदेश दिया है। इसमें चम्बल की घाट से नदी की पीड़ा को उजागर किया है। नदी का पहले व अब का स्वरूप बताया गया। उन्होंने बताया कि नदियां पहले कैसी थी? पानी की शुद्धता, उसका प्रवाह कैसा था? बदलते दौर में आज किस तरह से गंदगी से मैली हो गई? किस तरह से सिकुड़ गई है?

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पहले कक्षा 11 में भी था पाठ

कनक ने बताया कि 2005 में भी 11वीं कक्षा में गुरु शिखर सूं नामक पाठ शामिल था। उसमें राजनीतिक अवसरवाद व मानवता का संरक्षण देने का संदेश दिया। 2011 में 'जूण जातरा' नदियों के उपन्यास के लिए कनक को केन्द्रीय साहित्य अकादमी से सम्मानित किया जा चुका है। कोटा विश्वविद्यालय में एमए व बीए की राजस्थानी भाषा के पाठ्यक्रम की इकाइयां भी कनक ने लिखी है। कनक ने राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालय व कृषि विश्वविद्यालय के कुलगीत की रचना भी की है।

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