
हाथ जोड़कर स्कूल में प्रवेश से इनकार
अभिषेक गुप्ता कोटा. एक ओर शिक्षा विभाग सरकारी स्कूलों में नामांकन बढ़ाने और बच्चों को शिक्षा से जोडऩे के लिए धूमधाम से प्रवेशोत्सव मनाता है। ढोल-नगाड़ों व रैलियों से अभिभावकों को जागरूक कर बच्चों का स्कूल में दाखिला करवाता है, वहीं कोटा का एक स्कूल ऐसा भी है, जो हाथ जोड़कर बच्चों को स्कूल में प्रवेश नहीं दे पा रहा। इस स्कूल प्रशासन की ओर से अब तक सौ बच्चों को स्कूल में प्रवेश देने से मना किया जा चुका है। मामला रावतभाटा रोड स्थित नया गांव के राउमावि का है।
ऐसा नहीं कि विद्यालय सभी बच्चों को प्रवेश से मना कर रहा है। इस साल इस स्कूल में सभी कक्षाओं में 240 नए बच्चों को प्रवेश दिया गया, पुराने 530 बच्चे बड़ी कक्षा में आ चुके हैं। नए व पुराने मिलाकर 770 बच्चे विद्यालय में अध्ययन कर रहे हैं। वर्तमान में स्कूल के सभी कमरे विद्यार्थियों से ठसाठस भर गए हैं। बारामदों में कक्षाएं चल रही हैं। बैठक व्यवस्था नहीं कर पाने के कारण स्कूल प्रशासन नए विद्यार्थियों को प्रवेश नहीं दे पा रहा।
परिणाम देखकर आकर्षित अभिभावक
इस विद्यालय का परीक्षा परिणाम पिछले तीन सालों से शत-प्रतिशत है। बच्चों के अनुसार पढ़ाई का माहौल काफी अच्छा है। ऐसे में आस-पास के गांवों के अभिभावक अपने बच्चों को इसी स्कूल में पढ़ाना चाहते हैं। बेहतर परिणाम देने के कारण 5 गांवों के बीच यह विद्यालय बच्चों की पहली पसंद बना हुआ है। इस स्कूल के 13 विद्यार्थियों को इस साल सरकार की लैपटॉप योजना का लाभ मिला। जब विद्यार्थियों की संख्या बढऩे लगी तो स्कूल प्रशासन ने दो पारियों में संचालन शुरू किया। सुबह की पारी में 8वीं से 11वीं और दोपहर की पारी में कक्षा 1 से 7वीं तक कक्षाएं लगाई।
ऐसे कर रहे बैठक व्यवस्था
इस स्कूल में छह कमरे हैं। एक कमरा प्राचार्य व स्टाफ के लिए है। पांच कमरों में कक्षाएं लगती हैं। पहली पारी में 8वीं, 10वीं व 11वीं में दो सेक्शन हैं, जबकि 9वीं में तीन सेक्शन हैं। इस लिहाज से 4 कक्षाओं के कुल 9 सेक्शन की बैठक व्यवस्था करनी पड़ती है। इसमें से 3 कक्षाएं बारामदे व 6 कक्षाएं कमरों में लगती हैं। इसी तरह दूसरी पारी में 7 कक्षाओं के 7 सेक्शन हैं। इनमें से तीसरी कक्षा बारामदे में चलती है, जबकि अन्य सभी कमरों में।
बारी-बारी से उठ-बैठकर पढ़ते हैं
विद्यार्थियों ने बताया कि दसवीं कक्षा में बारी-बारी से आधे घंटे आधे बच्चे खड़े और आधे बैठकर पढ़ते हैं। छात्र संख्या इतनी है कि दरवाजे व बारामदों तक बैठना पढ़ता है। शिक्षक गेट पर खड़े होकर पढ़ाते हैं, ताकि सभी बच्चों को पाठ समझ आ जाए।
8 किमी दूर से आते हैं
नयागांव में लगभग 3 हजार परिवार रहते हंै। इस क्षेत्र यही एक मात्र सरकारी स्कूल है। यहां रोझड़ी, आंवली, दौलतगंज, बंधा व शंभुपुरा तक के बच्चे पढऩे आते हैं। शंभुपुरा आठ किमी दूर हैगिंग ब्रिज के पास आता है।
इनका यह कहना
स्कूल में बच्चों की संख्या अधिक होने से कमरे कम पड़ रहे हैं। मजबूरन बच्चों को बारामदों में बैठाकर पढ़ाना पड़ रहा है। 12वीं की कक्षाएं शुरू करने के आदेश मिले हैं, लेकिन कमरे नहीं होने से शुरू नहीं कर पा रहे हैं।
ममता चौधरी, प्रधानाचार्या, राउमावि नयागांव
प्रस्ताव भिजवाएंगे
& स्कूल में कमरों की डिमांड मिली है। प्रस्ताव बनाकर उच्चाधिकारियों को भिजवाएंगे।
रविन्द्र्र कुमार, एईएन, रमसा
पत्र लिखा है
स्कूल में विधायक कोष से एक कमरे का निर्माण कार्य करवाया है। यूआईटी व अन्य अधिकारियों को भी पत्र लिखा है। भामाशाह का सहयोग लेकर कमरों का निर्माण करवाएंगे।
चन्द्रकांता मेघवाल,
विधायक, रामगंजमंडी
Published on:
04 Aug 2018 05:54 pm
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