24 मार्च 2026,

मंगलवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

जानिये ऐसा अनोखा स्कूल जहां गुरुजी अकेले ठाले बैठे रहते हैं

संस्कृत स्कूल में 11 बच्चों का नामांकन होने के बाद भी करीब छह माह से एक बच्चा भी स्कूल नहीं आया है।

less than 1 minute read
Google source verification
Sanskrit School

जानिये ऐसा स्कूल जहां गुरुजी अकेले ठाले बैठे रहते हैं

कोटा/मोईकलां.

जिले में एक स्कूल ऐसा भी है जिसके गुरुजी अटल सेवा केन्द्र में बैठे रहते हैं, उनसे पढऩे कोई नहीं आता। इस एकाकीपन से वे एक दो दिन नहीं, पूरे छह माह से जूझ रहे हैं। हम बात कर रहे हैं। राजकीय प्राथमिक संस्कृत विद्यालय बपावर की। इसका स्कूल का संचालन करीब दो वर्ष से अटल सेवा केन्द्र में हो रहा है। संस्कृत स्कूल में 11 बच्चों का नामांकन होने के बाद भी करीब छह माह से एक बच्चा भी स्कूल नहीं आया है।
स्कूल में नियुक्त एक मात्र शिक्षक हर दिन अटल सेवा केन्द्र आते हैं पर समय व्यतीत करना उनके लिए मुश्किल हो रहा है। बपावर कस्बे के बच्चों को संस्कृत शिक्षा मिले इसे लेकर करीब चार वर्ष पूर्व पाचवीं तक संस्कृत स्कूल खोला गया था।


कुछ समय तक तो भवन के अभाव में स्कूल का संचालन ही नहीं हुआ। उस समय भी शिक्षक नियमित आते थे और दिनभर पंचायत में बैठने के बाद घर चले जाते। ऐसे में बपावर सरपंच लाला किशनचन्द गुप्ता ने वैकल्पिक रूप में अटल सेवा केन्द्र में स्कूल संचालन की मौखिक स्वीकृति दी। शिक्षक ने उस समय प्रयास कर 11 बच्चों का नामांकन भी कर लिया। नामांकन के बाद कोई बच्चा स्कूल में पढऩे के लिए नहीं आया।


वर्तमान में कार्यरत शिक्षक मंजेश कुमार शर्मा बच्चों को पढाने के लिए हर दिन स्कूल तो आते हैं पर बच्चों के नहीं आते। शिक्षक शर्मा ने बताया कि कई बार उच्चाधिकारियों को लिखित में दिया जा चुका है, कोई पहल नहीं हुई।


इधर, संभागीय संस्कृत शिक्षा अधिकारी सीताराम मीणा कहते हैं कि बपावर में संस्कृत स्कूल के लिए भवन निर्माण के लिए जमीन आवंटन का आग्रह पंचायत प्रशासन से किया गया है। जैसे ही जमीन का आवंटन होगा आगे की कार्रवाई की जाएगी।