शैक्षणिक नगरी में करीब एक सौ करोड़ रुपए की लागत से 30 हैक्टेयर इलाके में बनाए जा रहे सिटी पार्क (ऑक्सीजोन) में उल्टा पिरामिड (इनवर्टेड पिरामिड) अपनी भव्यता व इनोवेशन से लोगों को दांतों तले अंगुली दबाने पर मजबूर कर देगा। जीरो ग्राउंड पर टिके इस उल्टे पिरामिड को कोटा के आठवें अजूबे के रूप में देखा जा रहा है। इसे ऑक्सीजोन के पिछले हिस्से में एक माउंट (पर्वत) बनाकर लगाया गया है। इस पर चारों ओर से प्रोजेक्टर पर फिल्म दिखाई जाएगी।
यह है उल्टे पिरामिड की खासियत
उल्टे पिरामिड का आकार 12 गुणा 12 मीटर (40 फीट) चौड़ा और 12 मीटर ऊंचा है। यह त्रिभुजाकार पिरामिड माउंट पर एक बिन्दु पर टिका है। यह देखते ही आश्चर्य का भाव पैदा करता है। इसे चमकदार सफेद कोरियन शीट से बनाया गया है। इसके चारों और प्रोजेक्टर लगाए गए हैं। जो इसके चारों ओर अलग-अलग फिल्म, एड और डॉक्यूमेंट्री फिल्म दिखाएंगे।
लाइट होने के बावजूद दिखेगी फिल्म
उल्टे पिरामिड को डिजाइनर अनूप भरतरिया ने डिजाइन किया है। इसे गार्डन के पीछे की ओर से बनाया गया है। माउंट पर बना होने के कारण यह जमीन से करीब 12 मीटर ऊंचा रहेगा। ऐसे में गार्डन में प्रकाश व सौन्दर्यीकरण के लिए लगी लाइटों का प्रकाश इससे नीचे होगा। इससे लोगों को इसे देखने में थियेटर जैसा फील आएगा। वहीं गार्डन में लोगों को पूरा प्रकाश भी मिलेगा।
गार्डन में दूर तक आएगा नजर
ऑक्सीजोन में बनाया गया उल्टा पिरामिड ऊंचाई पर होने से सिटी पार्क में दूर से ही नजर आएगा। ऐसे में लोग गार्डन में बैठने के अलावा आसपास घूमते हुए व खाना खाते हुए भी इसे निहार सकेंगे।
विशेष डिजाइन के आरसीसी स्ट्रक्चर पर किया खड़ा
इंजीनियर्स ने बताया कि पिरामिड को खड़ा करने के लिए आरसीसी का मजबूत विशेष स्ट्रक्चर बनाया गया। यह स्ट्रक्चर माउंट के नीचे छुपा रहेगा और इसके ऊपर उल्टा पिरामिड खड़ा नजर आएगा। ये तेज हवाओं समेत आंधियों को आसानी से झेलने में सक्षम है।
ऑक्सीजोन में इनवर्टेड पिरामिड बेमिसाल है। यह जीरो ग्राउंड पर खड़ा 40 फीट चौड़ा स्ट्रक्चर है। इसे बेहद खास और अत्याधुनिक तकनीक से डिजाइन किया गया है। इसके लिए सोलिड बेस बनाकर खड़ा किया गया है। ऑक्सीजोन में यह लोगों के आकर्षण का केंद्र रहेगा। इसमें चारों ओर से प्राेजेक्टर से फिल्म दिखाई जाएंगी।
– रविन्द्र माथुर, अधिशासी अभियंता, ऑक्सीजोन प्रोजेक्ट, यूआईटी, कोटा