Shivpuri Dham in Kota: :कोटा.शिवलिंगों देश विदेश में शिवालय कई हैं, लेकिन सिवाई पशुपतिनाथ के सिवा कोई शिवालय नहीं जहां एक साथ कई शिवलिंगों के दर्शन होते हों। अब एक साथ सैकड़ों शिवलिंगों के पूजन व दर्शन का आनंद लेना है,तो चंबल की धरा व शिक्षा नगरी कोटा आ सकते हैं। शिक्षा नगरी कोटा के थेगड़ा क्षेत्र स्थित शिवपुरी धाम में एक साथ 525 शिवलिंगों के दर्शन व पूजन का सुख मिलेगा।
सिर्फ 525 शिविलिंग ही क्यों…? यहां स्थापित एक सहस्त्र शिवलिंग के दर्शन करेंगे तो आश्चर्यचकित रह जाएंगें। कोटा में नहर के किनारे शिवपुरी धाम पर 525 शिवलिंगों के साथ एक विशालकाय 15 फीट ऊंचा ,14 टन का शिवलिंग भी है। यह शिवलिंग करीब 6 फीट के घेरे में स्थापित हैं। इसपर हमेशा जल की धारा बहती है। आसपास अन्य शिवलिंग स्थापित हैं।
नागा संत राणारामपुरी महाराज की तपोभूमि शिवपुरी धाम
कहानी दिलचस्प है। शिवपुरी धाम के संचालक संत सनातनपुरी बताते हैं कि यह स्थान राणा रामपुरी महाराज की तपोभूमि रही है। उनके गुरु नागा बाबा राणारामपुरी महाराज नेपाल काठमांडृ स्थित परशुपति नाथ गए थे। 1986 में उन्होंने वहां महायज्ञ करवाया था। इसके बाद उन्हें भगवान शिव ने दर्शन दिए और कहा कि मेरा मुख पशुपतिनाथ में और पीठ केदारनाथ में है। भारत में भी 525 शिवलिंग होने चाहिए।
संत राणारामपुरी महाराज ने इस स्वप्न को संकल्प बना लिया। कोटा आने के बाद 1987 में उन्होंने अपनी तपोभूमि शिवपुरी धाम पर द्वादष ज्योतिर्लिंग की स्थापना करवाई। 9 फरवरी 1988 में संत राणारामपुरी महाराज अपने शिष्य सनातन पुरी को उत्तरदायित्व सौंपकर ब्रह्मलीन हो गए।
शिष्य ने किया संकल्प पूरा
गुरु के संकल्प को पूर्ण करने के लिए में संत सनातनपुरी ने भी 525 शिवलिंगों की स्थापना तक फलाहारी रहने का संकल्प कर लिया और वह इस विराट संकल्प को पूर्ण करने में जुट गए। संतों के संकल्प में बड़ी शक्ति होती है। वर्ष 2007 में 121 कुंडीय महायज्ञ करवाया और गुरु का 525 शिवलिंगों की स्थापना कर गुरू के संकल्प पूरा कर दिया। वर्तमान में स्वास्तिक आकार में 525 शिवलिंग स्थापित हैं। संत सनातनपुरी ने चार गास अन्न ग्रहण कर संकल्प पूर्ण कर लिया,लेकिन अब फिर से उसी संकल्प को आगे बढ़ाते हुए मंदिर के निर्माण का संकल्प ले लिया। इस संकल्प को पूर्ण करने में जुटे हैं।मंदिर के निर्माण का कार्य शुरू हो गया है। यह भव्य रूप ले रहा है।
भवसागर महादेव व यंत्र भी स्थापित
भगवान पशुपति नाथ की प्रतिमा, गणेश, देवी व संत राणा रामपुरी महाराज की प्रतिमा भी स्थापित है। भवसागर पार करने के लिए गत वर्षों में यहां भवसागर यंत्र को स्थापित किया गया। यहां स्थित अमृत सरोवर में 108 तीर्थों का जल प्रवाहित है। प्रवेश द्वार के पास 12 फीट विशालकाय काल भैरव विराजमान हैं।
पहले था जंगल
मंदिर में दर्शन करने आई वल्लभ कंवर व प्रेम कंवर बताती है कि क्षेत्र में पहले जंगल था। एक छोटा सा चबुतरा था, जहां पर संत राणारामपुरी महाराज तप करते हैं। महिलाएं बताती है कि हम तब भी यहां भजन कीर्तन करने आते थे। कई बार सोमवार को यहीं खाना खाते थे। अब अदभुद मंदिर बन गया है। प्रदेश में शिवजी का यह मंदिर अनूठा है।
पिकनिक स्पॉट भी
मंदिर अब सिर्फ धर्म व आध्यात्म का केन्द्र ही नहीं, पर्यटन व दर्शनीय स्थल के रूप में भी पहचान बना रहा है। स्वास्तिक के आकार में 525 शिवलिंगों का पूजन सुखदायक है। पवित्र स्नान के लिए सरोवर, 12 फीट की भैरव प्रतिमा, गणपति, शिवपरिवार, अन्नपूर्ण माता समेत अन्य प्रतिमाएं व राणारामपुरी महाराज की प्रतिमा विराजमान है। राणा रामपुरी महाराज की पुण्यतिथि, सावन व महाशिवरात्रि पर यहां श्रद्धालुओं का मेला लगता है।