सिद्धी बाई की अंतिम इच्छा पूरी,13 माह बाद मेडिकल कॉलेज में हुआ देहदान

कोविड महामारी के चलते लम्बे समय से कोटा मेडिकल कॉलेज में देहदान नहीं हो रहा था। 13 माह बाद जाकर कोटा मेडिकल कॉलेज में बुधवार को एक देहदान हुआ है।

 

By: Abhishek Gupta

Published: 21 Jul 2021, 06:24 PM IST

कोटा. कोविड महामारी के चलते लम्बे समय से कोटा मेडिकल कॉलेज में देहदान नहीं हो रहा था। 13 माह बाद जाकर कोटा मेडिकल कॉलेज में बुधवार को एक देहदान हुआ है। मेडिकल कॉलेज एनोटॉमी विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. प्रतिमा जायसवाल ने बताया कि स्टेशन निवासी सिद्धी बाई (88) पत्नी रमेश चन्द्र पाण्डेय के निधन के बाद परिजनों ने मेडिकल कॉलेज में देहदान की। सिद्धि बाई ने 23 मार्च 2016 में देहदान के लिए मेडिकल कॉलेज में रजिस्टे्रशन कराया था। पांच साल से वह लगातार अपने बेटे व अन्य परिजनों से देहदान की इच्छा जाहिर कर चुकी थीं। उनके नाती शिवांग ने पहले नानी की तबीयत ज्यादा खराब बताई, लेकिन शाम 6.30 बजे उनकी मौत हो गई। उन्होंने मेडिकल कॉलेज सम्पर्क किया। कोविड के चलते पहले उनका आरटीपीसीआर टेस्ट कराया गया। उसके बाद बॉडी को तत्काल फ्रि जर में रखवाया। कोविड की रिपोर्ट नेगेटिव आने के बाद परिजनों ने बुधवार सुबह सिद्धि बाई की देह को दान किया। विभाग की सक्रियता व परिजनों की जागरुकता से देहदान संभव हो सका। क्योंकि बुधवार को छुट्टी का दिन होने के बाद भी विभाग की फेकल्टी व स्टाफ कॉलेज पहुंचकर देहदान प्राप्त किया है।

- प्रतिवर्ष 10 से 15 देह की आवश्यकता, मिलती केवल दो या तीन
डॉ. जायसवाल ने बताया कि अंतिम बार पदम चंद भंसाली की देह प्राप्त हुई थी। बीते एक साल से कोविड के चलते देहदान बंद था, लेकिन अब कोविड कम होने के चलते देहदान प्राप्त किया जा रहा है। उन्होंने कहा मेडिकल स्टूडेंट की शिक्षा के लिए देह की आवश्यकता होती है। ऐसे में लोगों को देहदान के क्षेत्र में कार्य कर लोगों को मोटिवेट करना चाहिए। अब तक कॉलेज को 36 देहदान प्राप्त हो चुके है। मेडिकल कॉलेज से संबंद्ध सभी चिकित्सालयों के अधीक्षक के पास देहदान रजिस्ट्रेशन फ ार्म उपलब्ध है। इच्छुक व्यक्ति वहीं संकल्प पत्र प्राप्त कर और जमा करवा सकते है। क्योंकि मेडिकल कॉलेज का ही रजिस्टे्रशन मान्य होता है। एनाटोमी विभाग से कार्ड प्राप्त कर सकते हैं।

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