7 जनवरी 2026,

बुधवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

होम

video_icon

शॉर्ट्स

catch_icon

प्लस

epaper_icon

ई-पेपर

profile_icon

प्रोफाइल

कोटा

Video: घूंघट के बंधन से बाहर नहीं निकली थी रश्मि, अब कर रही वकालात

शादी के बाद रश्मि ने कभी घूंघट से बाहर निकल दुनिया नहीं देखी थी, न ही कभी घर की देहलीज लांघी थी, लेकिन तकदीर ने ऐसा खेल खेला कि घूंघट में रहने वाली रश्मि राठौड़ पूरी तरह से बदल गई। अब वह वकालात कर रही है। कुछ ऐसी ही है रश्मि के संघर्ष व सफलता की कहानी।

Google source verification

हाबूलाल शर्मा

शादी के बाद रश्मि ने कभी घूंघट से बाहर निकल दुनिया नहीं देखी थी, न ही कभी घर की देहलीज लांघी थी, लेकिन तकदीर ने ऐसा खेल खेला कि घूंघट में रहने वाली रश्मि राठौड़ पूरी तरह से बदल गई। अब वह वकालात कर रही है। कुछ ऐसी ही है रश्मि के संघर्ष व सफलता की कहानी।

रश्मि को नहीं मालूम था कि उसे कभी ऐसे दिन भी देखने पड़ेगे, लेकिन शायद तकदीर मेंं ऐसा ही लिखा था। कृष्णा नगर, बजरंग नगर कोटा निवासी रश्मि राठौड़ के जीवन में वर्ष 2017 से पहले सब कुछ ठीक था। पति भीष्म प्रताप सिंह व दो बच्चे अभिमन्यु प्रताप सिंह व बिटिया सूर्यांशी के साथ वह बेहद खुश थी, लेकिन मार्च 2017 में पति को दिल का दौरा पड़ा तो रश्मि पर मुसीबतों का पहाड़ टूट गया। अब जो अपने थे, पराए हो गए और जो पराए थे, वे आंखें दिखाने लगे। घूंघट में रहने वाली रश्मि घुट-घुट कर जीने लगी। एक तरफ पति के जाने का गम तो दूसरी ओर अन्य झंझट। रश्मि बिखरती गई। मां की हालत देख बच्चे भी परेशान होने लगे। उन्होंने मां को धैर्य बंधाया। एक दिन बोले, मां अब घूंघट से बाहर निकलो। बस इन शब्दों ने रश्मि की जिंदगी को बदल डाला। अब घूंघट में रहने वाली रश्मि खुद वकील है और बेटी सूर्यांशी डॉक्टर व बेटा यूएय में जॉब कर रहा है।

खुद को बनाया काबिल
अभी सफर सिर्फ बच्चों तक सीमित नहीं था। बच्चे भी चाहते थे कि उनके साथ मां भी अपने पैरों पर खड़ी हो। उन्होंने एक बार फिर से रश्मि का हौसला बढ़ाया और मां को वकालात करने के लिए प्रेरित किया। रश्मि ने शादी से पहले बीएससी कर ली थी। फिर परिवार को संभालने के साथ एमएससी व एमएड किया। बच्चों की प्रेरणा सेे वकालात की पढ़ाई शुरू की। पढ़ाई के दौरान क्लास में अपने बच्चों की उम्र के बच्चों के साथ पढ़ाई करते कई बार शर्म भी महसूस होती थी, लेकिन रश्मि ने धैर्य नहीं खोया और वह अपने लक्ष्य की ओर बढ़ती गई। क्लास के बच्चे भी उनके हौसले को देखकर उत्साहवर्धन करते थे। वर्ष 2020 में रश्मि ने वकालात करना शुरू कर दिया। अब वह प्रतिष्ठित वकीलों की श्रेणी में शामिल हैं।

बेटी व बेटे का साहस आया काम
रश्मि ने बताया कि पति की मौत के बाद वह काफी मुसीबतों में थी। पति के जाने के बाद ही कुछ लोगों ने जमीन हथियाने की कोशिश की। इसके बाद रोज कोर्ट कचहरी व थाने के बुलावे आने लगे। अभी सूर्यांशी (15) व बेटा अभिमन्यु प्रताप सिंह (20) साल का था। उनसे मां का दर्द नहीं देखा जाता था। दोनों भाई-बहनों ने मां से कहा कि मां ऐसे काम नहीं चलेगा। कब तक इसी तरह से घुट-घुटकर जीओगी, हमें स्मार्ट मां चाहिए। अब घूंघट छोड़ो। मां को अपने बच्चों व परिवार की यह बात रास आई तो हौसला बढ़ा। अब रश्मि ने ठान लिया कि वह अपने बच्चों के कॅरियर के साथ समझौता नहीं करेगी। अब वह ताकत के साथ अपने फैसले लेने लगी। दोनों बच्चों को पढ़ाया और काबिल बनाया।