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गवर्नमेंट फंडेड टेक्निकल इंस्टीट्यूट्स-जीएफटीआई से विद्यार्थियों का मोहभंग

गवर्नमेंट फंडेड टेक्निकल इंस्टीट्यूट्स-जीएफटीआई की इंजीनियरिंग एवं आर्किटेक्चर सीटों पर प्रवेश को लेकर विद्यार्थियों का मोहभंग हो चुका है। यही कारण है कि वर्तमान में ''कंप्यूटर-साइंस'' जैसी लोकप्रिय इंजीनियरिंग-ब्रांच भी जेईई-मेन,2022 की 50-हजार से अधिक ऑल इंडिया रैंक-एआईआर पर भी उपलब्ध है। राष्ट्रीय संस्थानों की इंजीनियरिंग एवं आर्किटेक्चर सीटों पर प्रवेश को लेकर विद्यार्थियों की कोई विशेष रूचि नहीं है।  

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कोटा

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Abhishek Gupta

Oct 07, 2022

गवर्नमेंट फंडेड टेक्निकल इंस्टीट्यूट्स-जीएफटीआई से विद्यार्थियों का मोहभंग

गवर्नमेंट फंडेड टेक्निकल इंस्टीट्यूट्स-जीएफटीआई से विद्यार्थियों का मोहभंग

गवर्नमेंट फंडेड टेक्निकल इंस्टीट्यूट्स-जीएफटीआई की इंजीनियरिंग एवं आर्किटेक्चर सीटों पर प्रवेश को लेकर विद्यार्थियों का मोहभंग हो चुका है। यही कारण है कि वर्तमान में ''कंप्यूटर-साइंस'' जैसी लोकप्रिय इंजीनियरिंग-ब्रांच भी जेईई-मेन,2022 की 50-हजार से अधिक ऑल इंडिया रैंक-एआईआर पर भी उपलब्ध है।

एजुकेशन एक्सपर्ट देव शर्मा ने बताया कि जोसा-काउंसलिंग 2022 के राउंड-3 के तहत सीट-आवंटन परिणामों का विश्लेषण किया जाए तो ज्ञात होता है कि गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय-हरिद्वार, गुरु-घासीदास विश्वविद्यालय- बिलासपुर, संत लोगोंवाल इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी-पंजाब, श्री माता वैष्णो देवी यूनिवर्सिटी-कटरा, जम्मू एवं कश्मीर तथा स्वामी विवेकानंद यूनिवर्सिटी-भिलाई जैसे राष्ट्रीय संस्थानों की इंजीनियरिंग एवं आर्किटेक्चर सीटों पर प्रवेश को लेकर विद्यार्थियों की कोई विशेष रूचि नहीं है।

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सीट आवंटन के आंकड़ों से यह स्पष्ट हो जाता है कि विद्यार्थी उपरोक्त राष्ट्रीय स्तर के संस्थानों की ''कंप्यूटर-साइंस'' के स्थान पर एनआईटी- सिल्चर, सिक्किम, मेघालय,नागालैंड, अरुणाचल-प्रदेश,मणिपुर तथा मिजोरम जैसे सुदूर संस्थानों में इलेक्ट्रिकल,मैकेनिकल यहां तक की सिविल-इंजीनियरिंग में प्रवेश लेना बेहतर समझते हैं। इसमें सारा खेल ''ब्रांडिंग टेग का है। एनआईटी, ट्रिपल-आईटी के ब्रांड टैग ने गवर्नमेंट फंडेड टेक्निकल इंस्टीट्यूट्स-जीएफटीआई को हाशिए पर ला दिया है। शिक्षा-मंत्रालय भारत सरकार की ओर से द्यदि विशेष प्रयत्न नहीं किए गए तो आगामी भविष्य में यह संस्थान अपनी प्रासंगिकता खो देंगे। राजस्थान राज्य की सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ-राजस्थान की भी कमोबेश ऐसी ही स्थिति है।

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- क्या कहते हैं,जोसा राउंड-3 ओपनिंग-क्लोजिंग रैंक के आंकड़े?

ब्रांच-कंप्यूटर साइंस, ऑल इंडिया रैंक, ओपन-कैटेगरी

1. गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय-हरिद्वार : 33136-से-58612

2. गुरु घासीदास विश्वविद्यालय-बिलासपुर : 30701-से-496923. संत लोगोंवाल इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एवं टेक्नोलॉजी-पंजाब : 12212-से-46353

4. श्री माता वैष्णो देवी यूनिवर्सिटी-कटरा,जम्मू एवं कश्मीर : 35440-से-575565. स्वामी विवेकानंद यूनिवर्सिटी-भिलाई : 39232-से-51634

6. सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ राजस्थान : 34623-से-39183

- ब्रांडिंग में शब्द ''इंटरनेशनल'' का बड़ा महत्व

कुछेक गवर्नमेंट फंडेड टेक्निकल इंस्टीट्यूट्स-जीएफटीआई में प्रवेश को लेकर विद्यार्थियों का अच्छा खासा रुझान है। इन जीएफटीआई-संस्थानों के नाम ''इंटरनेशनल'' से प्रारंभ होते हैं। ऐसा महसूस होता है कि ब्रांडिंग में शब्द ''इंटरनेशनल'' का अपना एक अलग महत्व है।

गवर्नमेंट फंडेड टेक्निकल इंस्टीट्यूट का नाम, कंप्यूटर साइंस ब्रांच की ओपनिंग क्लोजिंग रैंक, ओपन-कैटेगरी

1. इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट आफ इनफॉरमेशन टेक्नोलॉजी-नया रायपुर : 14541-से-17561

2. इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट आफ इनफॉरमेशन टेक्नोलॉजी-भुवनेश्वर : 24549-से-26392

यह बेहतर

आंकड़ों का गणित बताया है कि छत्तीसगढ़ के नया-रायपुर में स्थित इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ इनफॉरमेशन टेक्नोलॉजी की स्थिति कई एनआईटी-संस्थानों से बेहतर है। इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ इनफॉरमेशन टेक्नोलॉजी-भुवनेश्वर की स्थिति भी सापेक्ष तौर पर अच्छी प्रतीत होती है।