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Success story : कोटा में रहकर तैयारी की, अब संयोग ऐसा बना कि बने वहीं के कलेक्टर

सफलता की हर कहानी न केवल प्रेरणा देती है बल्कि नई ऊर्जा का संचार भी करती है। आज की सक्सेस स्टोरी जुड़ी है कोटा से। जहां 12वीं में एक बच्चा मेडिकल की तैयारी करने आता है।

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कोटा

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anant awdichya

Jan 26, 2024

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कोटा। सफलता की हर कहानी न केवल प्रेरणा देती है बल्कि नई ऊर्जा का संचार भी करती है। आज की सक्सेस स्टोरी जुड़ी है कोटा से। जहां 12वीं में एक बच्चा मेडिकल की तैयारी करने आता है। परीक्षा के पहले प्रयास में सफलता की कोशिश करता है, लेकिन वह असफल होता है। फिर निराश होकर घर चला जाता है। वह दूसरा प्रयास घर से ही करता है। इस बार सफलता मिलती है। उसका दाखिला जयपुर स्थित सरकारी मेडिकल कॉलेज होता है। लेकिन उसके सपने बड़े थे, वह यूपीएससी की तैयारी में लगता है, सफलता भी हासिल होती है। वह अब प्रशासनिक अधिकारी बन चुके हैं। संयोग देखिए.. अब उनकी पोस्टिंग वहीं हुई है जहां से उन्होंने जीवन में कुछ हासिल करने का पहला प्रयास किया। कहानी डॉ रविंद्र गोस्वामी की..जो कोटा में मेडिकल की तैयारी करने आए, अब जिले में कलेक्टर पद पर तैनात हैं।


गोस्वामी बताते हैं कि वह 2001 में मेडिकल की कोचिंग करने कोटा आए, लेकिन पहले प्रयास में सफलता हाथ नहीं लगी और वापस अपने घर रवाना हो गए। दूसरे अटेम्प्ट में सफलता मिली और अच्छी रैंक हासिल कर सरकारी कॉलेज से एमबीबीएस कर निजी अस्पताल में नौकरी की। साथ ही यूपीएससी की तैयारी जारी रखा। साल 2015 में उन्हें पहले ही प्रयास में 152वीं रैंक मिली। अब वह कोटा जिले के कलेक्टर पद पर तैनात हैं।


अपनी तैयारी के बारे में बताते हुए गोस्वामी ने कहा कि वह ऐसे विद्यार्थी में से हैं, जिन्हें घर पर रहकर स्वंय पढ़ाई करना अच्छा लगता है। गोस्वामी ने कहा कि मै चीजों को किसी के समझाने की अपेक्षा स्वंय पढ़कर समझने का प्रयास ज्यादा करता हूं। हालांकि ये मेरा अपना अनुभव था, लेकिन कई विद्यार्थी ऐसे होते हैं जिन्हें दूसरे के द्वारा समझाने पर ही समझ में आता है। उन्होंने आगे कहा कि, उनके लिए रविवार रेस्ट का दिन होता था। इस दिन वह परिवार के साथ मूवी देखते और बातें करते। गोस्वामी ने बताया कि, वह पढ़ाई के समय गंभीरता से विषयों का अध्ययन करते। बताते हैं कि प्रत्येक सप्ताह निबंध लिखना उनके रूटिन में था, साथ ही वह इसे दोस्तों के साथ क्रॉस चेक भी करते।


ऑप्शन हमेशा खुले और अटेम्पट की सीमा रखें

भावी अभ्यर्थियों को सलाह दिये जाने के सवाल पर उन्होंने कहा कि, पहले तो, असफलता के बाद निराश न हों। यह एक कंपटीशन है। लाखों विद्यार्थी निष्ठा के साथ तैयारी करते हैं। अगर आप असफल हुए हैं तो इसका ये मतलब नहीं है कि आपने अच्छी नहीं पढ़ाई की। हो सकता है किसी और ने आपसे भी ज्यादा मेहनत की हो, उसकी क्षमताएं आपसे ज्यादा हो। उसमें निराश होने की बिल्कुल आवश्यकता नहीं है। अगर आप डिजर्व करते हैं तो प्रयास जारी रखें, लेकिन इसकी एक सीमा जरुर होनी चाहिए। साथ ही, हमेशा बैकअप प्लान रखें। यह आखिरी करियर नहीं है।

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