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रावतभाटा में दस प्रजाति के सांप, चार सबसे ज्यादा जहरीले

Big news : सांप का डसा मांगे नहीं पानी...कहावत हुई पुरानी...अब बच सकती है जान...समय पर मिले उपचार

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कोटा

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Anil Sharma

Aug 12, 2019

kota

Ten species of snakes, four most poisonous in Rawatbhata

रावतभाटा. उपखंड वन्य क्षेत्र है। यहां जंगली जानवरों के साथ-साथ जहरीले कीटों की भी अधिकता है। इनमें सबसे ज्यादा सांप है। यहां विभिन्न प्रजातियों के करीब 10 प्रकार के सांप मिलते हैं जिनमें से चार प्रजातियां जहरीली है, जिनके डसने से व्यक्ति की मौत हो जाती है। सर्पदंश की ज्यादातर घटनाएं ग्रामीण इलाकों में हो रही है। कच्चा मकान और साफ सफाई नहीं होने से उनमें अक्सर सर्प निकल आते हैं। घरों में पैर लगने से या खेतों में फसल काटते समय सर्प डस लेता है। परिजन उसे अस्पताल नहीं ले जाकर देवरे जाते हैं।

आंकड़ों पर एक नजर
आंकड़ों पर नजर डाले तो उपखंड मुख्यालय स्थित राजकीय सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में अगस्त माह के मात्र 1० दिनों में ही 9 मामले हो चुके हैं। इसी तरह से जनवरी में 2, मार्च में 6, अप्रेल में 1, मई में 3, जून में 5 व जुलाई में 18 मामले सर्पदंश के हुए। इनमें उपखंड के पांच अन्य प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र भी शामिल कर दिया जाए तो आंकड़ा बढ़ जाएगा। गत वर्ष रावतभाटा सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में शहरी तथा ग्रामीण क्षेत्र से 65 लोग सर्पदंश से पीडि़त पहुंचे। इनमें 43 पुरुष व 22 महिलाएं थी।

सांपों के प्रकार
स्नेक स्पेशलिस्ट प्रेम कंवर शक्तावत ने बताया कि उपखंड मुख्यालय में 10 तरह के सांप पाए जाते हैं। इनमें चार प्रजातियां काफी जहरीली है। कोबरा काले कलर का होता है। इसके काटने के एक घंटे के भीतर उपचार जरूरी है। दूसरा रसल वाइपर है। यह कोबरा से भी ज्यादा जहरीला होता है। यह क्रीम कलर का होता है। इसके पूरे शरीर पर काले कलर की गोल-गोल रिंग बनी होती है। इसी तरह से तीसरी प्रजाति का स्केल्ड वाइपर है। यह करीब 70 सेन्टीमीटर लम्बा होता है। चौथी प्रजाति क्रोमन के्रट है। यह करीब एक मीटर लम्बा होता है। यह दीवारों के आसपास घूमता है। यदि पास में पलंग है तो उस पर चढ़ जाता है। यह इस तरह से काटता है जैसे किसी मच्छर ने काटा हो। व्यक्ति को समय पर इलाज नहीं मिला तो मौत संभव है। इसी प्रकार पायथल, रेट स्नेक, चेकर्ड किल बेक, ग्रीन किल बेक, रेड सेड बुआ, इंडियन वूल्फ स्नेक व कोमन सेड बुआ कम जहरीले सांप है।
सांप के काटने पर कई व्यक्ति मरीज को अस्पताल नहीं ले जाकर देवरे ले जाते हैं, जिससे मरीज की जान पर बन आती है। कई बार उसकी मौत हो जाती है। इसलिए मरीज को पहले अस्पताल लेकर आएं।
डॉ. जीजे परमार, मुख्य ब्लॉक चिकित्सा अधिकारी, रावतभाटा,

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