देश में सदियों से कायम रही है सौहार्द और सद्भाव की मिसाल : 1604 में किया था जारी, आज भी संरक्षित
हेमन्त शर्मा
कोटा. देश में आज से नहीं सदियों से सौहार्द की बयार चली है। यहां एक-दूसरे के धर्म का सम्मान व आदर हमेशा से हुआ है। उदाहरण है खुद बादशाह अकबर। जी हां, अकबर ने राम के प्रति आस्था को देख राम सिया पर सिक्का जारी कर 'तू ही राम है तू रहीम हैÓ का संदेश दिया था। अकबर ही नहीं अन्य शासकों ने भी भगवान राम को अपनी मुद्रा पर अंकित किया।
अकबर ने अपने शासन के अंतिम वर्ष इलाही 50 में भी राम में आस्था को दर्शाया। अकबर ने 1584 में दीन ए इलाही धर्म की स्थापना की थी। बादशाह शासन के अंतिम वर्ष 1604 में सोने व चांदी की मुद्रा सिक्के जारी किए। इनमें एक तरफ भगवान राम हाथ में धनुष लिए और माता सीता हाथ में पुष्प लिए है। नागरी भाषा में राम सिया अंकित किया गया है। सिक्के में दूसरी तरफ जारी करने का वर्ष इलाही 50 तथा महीना अंकित है। सोने की आधी मोहर पर माह का नाम फरवरदीन व चांदी के आधे रुपए पर अमरदाद अंकित है। सोने की आधी मोहर दिल्ली के नेशनल म्यूजियम तथा चांदी के आधे रुपए का सिक्का रुपया वाराणसी के भारत कला भवन में संग्रहित है। अकबर के अलावा मोहम्मद गौरी ने भी धनकी देवी लक्ष्मी पर एक सोने की मुद्रा जारी की थी।
मौर्य, चौहान व विजयनगर साम्राज्य में भी सिक्के
भारतीय मुद्रा पर मगध के मौर्य शासन में चांदी के पंचमार्क सिक्कों राम का अंकन देखने को मिला। इसी समय चीन से आए कुषाण शासक हुविश्का ने राम को सिक्कों पर चित्रित किया। मुद्रा पर भगवान राम हाथ में धनुष लिए खड़ी मुद्रा में हैं। उत्तरी कर्णाटक स्थित कदम्ब साम्राज्य के चांदी के सिक्कों पर राम व हनुमान का चित्रण है। तंजोर के शासक द्वारा जारी सिक्कों में भी धनुष लिए राम नजर आते हैं। विजयनगर साम्राज्य के सिक्कों पर राम-सीता बैठे तथा हनुमान खड़े हैं। अजमेर के चौहान वंश के विग्रह राजा चतुर्थ महान सम्राट वीसलदेव द्वारा भी अपने सोने के सिक्कों पर भगवान राम को अंकित किया है।
अकबर ने भगवान राम पर मोहर सिक्का जारी किया था। मोहम्मद गौरी ने भी लक्ष्मी को मुद्रा में अंकित करवाया। सिक्कों पर राम के अंकन के कई उदाहरण हैं। अन्य कई शासकों ने भी राम को मुद्राओं में अंकित किया है।
शैलेष जैन, मुद्रा विशेषज्ञ