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हिंदी माध्यम के विद्यार्थियों की एम्स एवं जिप्मेर में प्रवेश की राह हुई आसान….

- एमबीबीएस सीटों पर प्रवेश सिर्फ नीट-2020 के आधार पर निर्णय के बाद....

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कोटा

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Anil Sharma

Oct 05, 2019

kota

medical entrance exam

कोटा. एम्स तथा जिप्मेर जैसे प्रतिष्ठित मेडिकल संस्थानों की एमबीबीएस सीटों पर प्रवेश नीट-2020 के आधार पर दिया जाएगा। इस घोषणा के बाद हिंदी माध्यम के छात्रों में खुशी की लहर है। हिन्दी माध्यम के छात्रों के लिए अब इन संस्थानों में प्रवेश की राह आसान हो गई है। कैरियर पॉइंट के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट देव शर्मा ने बताया कि वर्ष 2019 तक देश के प्रतिष्ठित 15 एम्स संस्थानों की 1205 एमबीबीएस सीटों में प्रवेश के लिए एम्स-एमबीबीएस तथा पुडुचेरी एवं कराईकल की 200 सीटों पर प्रवेश के लिए जिप्मेर-एमबीबीएस प्रवेश परीक्षाओं का आयोजन किया जाता था।
एम्स प्रवेश परीक्षा के लिए 12वीं बोर्ड में फिजिक्स, केमिस्ट्री, बायोलॉजी तथा अंग्रेजी में सामान्य एवं ओबीसी श्रेणी के विद्यार्थियों के लिए न्यूनतम 60 प्रतिशत तथा एससी-एसटी श्रेणी के विद्यार्थियों के लिए न्यूनतम 5० प्रतिशत अंकों की आवश्यकता थी। फिजिक्स,केमिस्ट्री एवं बायोलॉजी में अच्छे अंक होने के बावजूद अंग्रेजी में कम अंक होने से हिंदी माध्यम के विद्यार्थी परीक्षा के लिए आवश्यक पात्रता प्रतिशत हासिल नहीं कर पाते थे।
शर्मा ने बताया कि जिप्मेर-एमबीबीएस प्रवेश परीक्षा देश की एकमात्र ऐसी मेडिकल प्रवेश परीक्षा थी जो मात्र अंग्रेजी माध्यम में ही आयोजित की जाती थी। फलस्वरूप हिंदी माध्यम के विद्यार्थी अंग्रेजी के भयवश जिप्मेर में भाग ही नहीं लेते थे। ज्ञात रहे कि मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट का आयोजन हिंदी,अंग्रेजी, उर्दू एवं अन्य क्षेत्रीय भाषाओं सहित कुल 11 भाषाओं में किया जाता है।

देव शर्मा ने बताया कि वर्ष-2019 तक आयोजित की जाने वाली मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट, एम्स एवं जिप्मेर के पात्रता मानकों में काफी भिन्नता थी। आगामी नीट-2020 के आयोजन से पूर्व क्या नेशनल टेस्टिंग एजेंसी पात्रता मानकों में परिवर्तन करेगी? उपरोक्त संशय को लेकर ओबीसी-श्रेणी के मेडिकल परीक्षार्थी विशेषज्ञों से संपर्क साधते रहे। ज्ञात रहे कि नीट-2019 के 14 लाख परीक्षार्थियों में से 6 लाख से अधिक परीक्षार्थी ओबीसी श्रेणी के थे। विद्यार्थीयों के प्रतिभा आंकलन के लिए एम्स तथा जिप्मेर जैसी प्रतिष्ठित मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं के प्रश्नों में विविधता होती है। देव शर्मा ने बताया कि नीट- 2019 तक यह विविधता नीट के परीक्षा पैटर्न से गायब थी। अत: यदि एजेंसी शैक्षणिक स्तर के उच्च मानकों को कायम रखना चाहती है तो निश्चित तौर पर नीट-2020 के परीक्षा पैटर्न में कुछ बदलाव करेंगी।

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