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किशोर सागर तालाब 1961 में कैसा था। 1995 में कैसे नावों से यात्रा करते हुए यहां मरम्मत कार्य हुआ था। जगमंदिर को और अधिक सुंदर कैसे बनाया गया

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Shankar Sharma

Mar 11, 2016

Kota photo

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कोटा.
किशोर सागर तालाब 1961 में कैसा था। 1995 में कैसे नावों से यात्रा करते हुए यहां मरम्मत कार्य हुआ था। जगमंदिर को और अधिक सुंदर कैसे बनाया गया। 2009 में किस तरह रंगत बदली, 2012 में क्या सूरत थी और अब 2016 में हमारा किशोर सागर तालाब कितना जवां है। किशोर सागर तालाब की 57 बरसों की यात्रा, कितना हुआ बदलाव, अतीत और वर्तमान गुरुवार को कलादीर्घा में सामने आ गया। किसी की पुरानी यादें ताजा हो गई तो किसी ने पुरानी तस्वीरें देख नया अहसास पाया।


कोटा शहर की ऐतिहासिक यात्रा की कहानी गुरुवार से कलादीर्घा में शुरू हुई। यहां राजस्थान पत्रिका के स्थापना दिवस के तहत आयोजित सात दिवसीय कार्यक्रमों की शृंखला में दो दिवसीय चित्र प्रदर्शनी का उद्घाटन हुआ। दीप प्रज्वलन सांसद ओम बिरला, पूर्व सांसद इज्यराज सिंह ने किया। इस मौके पर पूर्व मंत्री रामकिशन वर्मा, मिलेनियम एकेडमी के निदेशक दीपक दुबे व कोटा पत्रिका के वरिष्ठ शाखा प्रबंधक अजय सामर भी मौजूद थे। इस अवसर पर कला व साहित्य से जुड़े शहरवासी मौजूद रहे। चित्र प्रदर्शनी 11 मार्च को भी सुबह 10 से शाम 5 बजे तक खुली रहेगी।

हर तस्वीर पर रुकी नजरें
उद्घाटन के साथ ही शहरवासियों ने जैसे ही तस्वीरों को निहारना शुरू किया तो हर तस्वीर पर नजर थम गई। किसी खबर को पढऩे की कोशिश हुई तो किसी फोटो को देखने के बाद याद ताजा करने के लिए दिमाग दौडऩे लगे। एक-एक करके तीस साल में शहर में बीती घटनाएं सामने आने लगी।

राजस्थान पत्रिका का एडिशन शुरू होने के बाद पहला छपा हुआ पन्ना, इसके बाद हर वर्ष की कोई न कोई बड़ी घटना, सबकुछ जब सामने आया तो हर कोई इन बातों से जुडऩे की कोशिश करने लगा। तस्वीरों ने पुरानी यादें ताजा कि तो बातें शुरू हो गई। जो बुजुर्ग थे वह फोटो और तत्कालीन घटनाओं को देख तत्कालीन परिस्थियों की बातें करने लगे। युवा पीढ़ी तब और अब के कोटा को देखकर हैरान रह गई। पहले क्या होता था, अब क्या हाल है। सब कुछ खबरों और फोटो के जरिए सामने था। शहरवासियों ने राजस्थान पत्रिका के इस प्रयास को खूब सराहा और इसे एक ऐतिहासिक यात्रा करार दिया।

कलाकारों के भी चित्र
राजस्थान पत्रिका द्वारा पिछले दिनों हमराह में चित्रकारों से तैयार चित्रों को भी यहां प्रदर्शित किया गया। इस कार्यक्रम में 100 से अधिक कलाकारों ने चित्रकारी की थी। इसमें से श्रेष्ठ 12 चित्रों को यहां प्रदर्शित किया गया। इन सभी चित्रकारों को आन्जनेय इन्टीरियर गैलरी शॉपिंग सेन्टर द्वारा पुरस्कृत किया जाएगा। इसके अलावा मूक बधिर बच्चों के चित्र भी यहां लगाए गए हैं। इन चित्रों में कोटा को लेकर बच्चे और बुजुर्ग हर आयुवर्ग के लोगों ने अपनी कल्पनाएं उकेरी और उनमें रंग भरे।

सुबह से शाम तक तांता
प्रदर्शनी शुरू होने के साथ ही यहां अवलोकन करने वालों का तांता लग गया। उद्घाटन के बाद दिनभर लोग आते रहे। कॉलेज के शिक्षकों से लेकर विद्यार्थी, आमजन, गृहिणियां, कामकाजी महिलाएं सभी यहां पहुंचे और प्रदर्शनी का अवलोकन किया। सुबह 11 बजे शुरू हुई प्रदर्शनी में शाम 6 बजे तक लोग आते रहे।

अच्छे हैं ऐसे प्रयास
पूर्व सांसद इज्यराज सिंह ने कहा कि प्रदर्शनी से पुरानी यादें ताजा हो गई। तब की खबरें देखकर अच्छा लगा। शहर में हुए बदलाव भी दिखे। शहरवासियों अतीत और वर्तमान को जानने का अच्छा मौका है। एेसे प्रयास शहर के लिए भी बहुत अच्छे हैं।

विकसित करवाएं कलादीर्घा
उद्घाटन के मौके पर सांसद ओम बिरला ने कहा कि कलादीर्घा को विकसित करवाएंगे। इसके लिए प्रोजेक्ट तैयार करवाया जाएगा। स्थानीय कलाकारों और रंगकर्मियों से मिलकर कलादीर्घा की जरूरतों के बारे में जाना जाएगा। इसके बाद यहां हर जरूरत पूरी की जाएगी। इसके कोरिडोर में आकर्षक वॉल क्लिपबोर्ड लगाए जाएंगे। इसके अलावा ओपर थियेटर को भी शेड से कवर्ड कर आकर्षक लुक दिया जाएगा। इससे नाट्य मंचन के लिए शहर के कलाकारों को अच्छा स्थान उपलब्ध हो सकेगा। श्रेष्ठ चित्रों को चार श्रेणियों में बांटा गया है।

क्या-क्या है तस्वीरों में
राजस्थान पत्रिका की इस प्रदर्शनी में 65 तस्वीरें प्रदर्शित की गई हैं। यात्रा 12 मार्च 1986 से शुरू होती है, जब कोटा में राजस्थान पत्रिका का एडिशन शुरू हुआ और यहीं से अखबार छपना शुरू हुआ। इसके बाद एनटीपीसी अन्ता की नींव, कोटा थर्मल पावर स्टेशन की नींव, किशोर सागर तालाब की पाल निर्माण, कोटा में दंगे, बारां के छबड़ा भूलोन में ट्रेन हादसा, डकनिया तलाब स्टेशन पर मालगाड़ी के डिब्बों की टक्कर, एरोड्रम सर्किल में हुए बदलाव, गेपरनाथ में सीढिय़ां टूटना, हैंगिंग ब्रिज हादसा और अब तक की यात्रा, गुर्जर आरक्षण आंदोलन, चुनाव कवरेज, सेवन वण्र्डस, राजस्थान पत्रिका द्वारा सामाजिक सरोकारों के तहत की गई पहल मेड इन कोटा, हमराह, दिशा बोध कार्यक्रम की कवरेज के अलावा शहर को मिली सौगातें भी यहां प्रदर्शित की गई हैं।