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अमेरिका को संदेश, चीन को झटका: भारत-EU FTA बना रणनीतिक मास्टरस्ट्रोक, 350 अरब डॉलर व्यापार का लक्ष्य

India-EU FTA: अमेरिका के ट्रंप टैरिफ टैरर से बदलते समीकरणों के बीच मंगलवार को भारत और यूरोप के 27 देशों के संगठन यूरोपियन यूनियन (EU) ने ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते (FTA) की घोषणा की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और यूरोपियन कमीशन अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन व यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा के बीच शिखर […]

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India-European Union Free Trade Agreement

यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन (Image: X/@narendramodi)

India-EU FTA: अमेरिका के ट्रंप टैरिफ टैरर से बदलते समीकरणों के बीच मंगलवार को भारत और यूरोप के 27 देशों के संगठन यूरोपियन यूनियन (EU) ने ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते (FTA) की घोषणा की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और यूरोपियन कमीशन अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन व यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा के बीच शिखर वार्ता के बाद एफटीए की घोषणा से भारत व यूरोप की 200 करोड़ की आबादी के बीच खुला व्यापार होगा। दोनों पक्ष एक दूसरे से व्यापार में 90 फीसदी से अधिक वस्तुओं पर टैरिफ समाप्त कर देंगे या काफी कम कर देंगे। इससे भारत के निर्यात में उछाल आएगा और देश में उत्पादन बढ़ने से नए रोजगार के अवसर पैदा होंगे। यूरोपीय देशों को भारत का बड़ा बाजार मिलेगा। सेवा क्षेत्र भी खुलने से भारत के युवाओं को यूरोप में बेहतर अवसर मिलेंगे।

समझौते के बाद संयुक्त प्रेसवार्ता में पीएम मोदी ने एफटीए को भारत के इतिहास का सबसे बड़ा व्यापार समझौता बताते हुए कहा कि यह दोनों पक्षों के लिए आपसी समृद्धि सुनिश्चित होगी। इस समझौते से व्यापार बढ़ेगा, निवेश को बढ़ावा मिलेगा, नए रोजगार के अवसर बनेंगे और दोनों क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। ईयू अध्यक्ष उर्सुला ने कहा कि हमने मदर ऑफ ऑल डील्स पूरा कर लिया है। यह समझौता भारत की कौशल, सेवाओं और बड़े पैमाने की क्षमता को यूरोप की तकनीक, पूंजी और नवाचार से जोड़ता है। इस साझेदारी से इतना तेज विकास होगा, जितना दोनों पक्ष अकेले कभी हासिल नहीं कर सकते।

पीएम मोदी ने कहा, यह समझौता बढ़ते भरोसे, साझा मूल्यों और शांति, स्थिरता व सहयोग के प्रति समान प्रतिबद्धता को दर्शाता है। मौजूदा वैश्विक अनिश्चितता के माहौल में भारत और ईयू का यह कदम दुनिया में संतुलन और सुरक्षा को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाएगा।

उर्सुला वान डेर लेयन ने कहा, भारत में मकर संक्रांति पर्व के बाद उत्तरायण की शुरुआत में यह समझौता अंधेरे से उजाले की ओर बढ़ने का उचित मुहुर्त है। एफटीए भारत और यूरोप के बीच आर्थिक साझेदारी को नई ऊंचाई देगा और व्यापार, निवेश व रोजगार के नए अवसर पैदा करेगा।.

यों समझें समझौते और लाभ-हानि का गणित

1.ईयू से समझौते का क्या मतलब?
भारत और यूरोप के 27 देशों (इनका संगठन ही ईयू है) के साथ यह एक साथ समझौता है। इसमें भारत व इन 27 देशों के 200 करोड़ लोगों की आबादी के बीच मुक्त व्यापार क्षेत्र बनेगा, टैरिफ घटेंगे। व्यापार, आवाजाही, नाैकरियां खुलेंगी।

2.समझौते में क्या खास बात?
यूरोप में भारत की 96% वस्तुओं पर टैरिफ चरणबद्ध रूप से खत्म होगा। भारत में 90% से अधिक यूरोपीय वस्तुओं पर शुल्क कटौती। कई चीजें टैरिफ मुक्त।

3.भारत को क्या फायदा होगा?
यूरोपीय बाजार में भारतीय वस्त्र, आइटी, फार्मा, जैम-ज्वैलरी, चमड़ा और कृषि उत्पादों को आसान पहुंच मिलेगी। भारत का यूरोप में व्यापार व सेवाएं बढ़ेंगी। श्रम आधारित वस्तुओं के ज्यादा उत्पादन से भारत में रोजगार बढ़ेगा और यूरोप में भी नौकरियों के अवसर खुलेंगे। भारत में यूरोप की चीजों पर टैरिफ खत्म होने से यहां ये चीजें सस्ती मिलेंगी।

4.यूरोप को क्या फायदा होगा?
भारत में यूरोप निर्मित चीजों शराब, मशीनरी, रसायन और हवाई जहाजों का भारत में बाजार मिलेगा। भारत से सस्ती चीजें और टैलेंट जाने से यूरोप को चीन के माल व दबाव से मुक्ति मिलेगी।

5.दोनों पक्षों का व्यापार कितना बढ़ेगा?
मौजूदा सालाना 136 अरब डॉलर के वस्तु व्यापार को 2031 तक 250 अरब डॉलर तक तथा सेवा सहित 350 अरब डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य है।

6.समझौता कब से लागू होगा?
समझौता 2027 की शुरुआत से लागू होना शुरू हो जाएगा लेकिन पूरा समझौता पांच साल में लागू होगा?

7.क्या हर यूरोपीय देश समझौते को संसद से पास करवाएगा?
नहीं, ईयू के सदस्य देशों की समग्र ईयू संसद पर मुहर लगाना ही पर्याप्त होगा।

8.क्या भारतीय किसानों के हित प्रभावित होंगे?
समझौते में भारतीय कृषि व डेयरी के अधिकतर उत्पादों को शामिल न कर किसानों के हितों को सुरक्षित रखा गया है। कुछ कृषि उत्पादों पर यूरोपीय प्रतिस्पर्धा बढ़ सकती है जिसके लिए सुरक्षा प्रावधान रखे गए हैं।

इन भारतीय प्रमुख उत्पादों पर टैरिफ खत्म, बढ़ेगा निर्यात

सेक्टरवर्तमान टैरिफFTA में टैरिफ
टेक्सटाइल-कपड़े12%0%
लेदर-फुटवियर17%0%
इलेक्ट्रॉनिक्स14%0%
जेम्स-ज्वैलरी4%0%
केमिकल्स12.8%0%
होम डेकोर-फर्नीचर15–25%10.5%

भारत में टैक्स खत्म, ये यूरोपीय उत्पाद होंगे सस्ते

उत्पादवर्तमान टैरिफFTA के बाद
मशीनरी / इलेक्ट्रिकल सामान44% तक0%
विमान / अंतरिक्ष यान11% तक0%
मेडिकल उपकरण27.5% तक0% (90% उत्पादों पर)
प्लास्टिक16.5% तक0%
कीमती पत्थर / धातुएं22.5% तक0% (20% उत्पादों पर, बाकी पर टैक्स कम)
केमिकल्स22%0%
मोटर वाहन / कारें110%10–40% (हर साल 2.5 लाख यूनिट का कोटा)
दवाइयां11%0%
वाइन, शराब, बीयर110–150%20–40%

अमेरिका को लगी मिर्ची, बेसेंट यूरोप पर भड़के

भारत और ईयू के बीच समझौते से अमेरिका को मिर्ची लगी है। भारत पर रूसी तेल खरीद के कारण 25 फीसदी पेनल्टी टैरिफ लगाकर द्विपक्षीय संबंधों में तनाव पैदा कर चुके अमरीका के वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कहा कि भारत से व्यापार समझौता कर यूरोपीय देशों ने अपने ही खिलाफ रूसी जंग को फंडिंग दे रहा है।

रणनीतिक मास्टरस्ट्रोक

मौजूदा भू-राजनीतिक परिवेश में, भारत-ईयू केवल एक व्यापारिक समझौता नहीं अपितु एक रणनीतिक मास्टरस्ट्रोक है। यह कई संदेश देता है।

चीन प्लस वन' रणनीति: यूरोपीय कंपनियां अपनी आपूर्ति श्रृंखला के लिए चीन पर निर्भरता कम करना चाहती हैं। यह समझौता भारत को इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मा और ग्रीन एनर्जी के क्षेत्र में चीन के विकल्प के रूप में मजबूती से स्थापित करता है।

अमेरिकी अनिश्चितता के बीच संतुलन: अमेरिका की संरक्षणवादी नीतियों और टैरिफ टैरर के बीच, यह समझौता भारत को एक बड़ा और स्थिर वैकल्पिक बाजार प्रदान करता है। इससे भारत की वैश्विक व्यापारिक स्थिति सुरक्षित होती है।

रणनीतिक स्वायत्तता: यह डील साबित करती है कि भारत किसी एक ब्लॉक का हिस्सा बने बिना पश्चिमी देशों के साथ अपनी शर्तों पर उच्च-स्तरीय समझौते कर सकता है। यह भारत की आर्थिक कूटनीति को नई ऊंचाई देता है।

इंडो-पैसिफिक में मजबूती: ईयू के आर्थिक हितों को भारत के साथ जोड़कर यह इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में एक संतुलित और नियम-आधारित व्यवस्था बनाने में मदद करेगा जो क्षेत्रीय स्थिरता के लिए आवश्यक है।

ग्रीन लीडरशिप: कार्बन टैक्स जैसे मुद्दों पर सहयोग के जरिए भारत पर्यावरण और व्यापार के बीच संतुलन बनाकर विकासशील देशों का नेतृत्व कर रहा है।

रणनीतिक सुरक्षा साझेदारी पर भी सहमति व समझौते

ईयू नेताओं की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ शिखर वार्ता के बाद व्यापार समझौते की घोषणा के अलावा 12 अन्य मुद्दों पर भी सहमति व समझौते हुए जिनमें रणनीतिक सुरक्षा साझेदारी भी शामिल है। दोनों पक्षों की ओर से इस मौके पर तीन अहम महत्वपूर्ण दस्तावेजों का आदान प्रदान हुआ। इनमें ग्रीन एनर्जी सेक्टर को बढ़ावा देने के लिए ग्रीन हाइड्रोजन टास्क फोर्स गठन, वित्तीय नियमों व निगरानी में सहयोग के लिए भारतीय रिजर्व बैंक और यूरोपीय सिक्योरिटीज एंड मार्केट्स अथॉरिटी के बीच एमओयू औरकौशल विकास और परस्पर लोगों की आवाजाही के लिए मोबिलिटी समझौते पर सहमति शामिल है।

अमेरिका को संदेश: टैरिफ बना हथियार तो यह समझौता

भारत-ईयू समझौते पर पीएम मोदी वे ईयू अध्यक्ष उर्सुला ने अमेरिका को भी संदेश दिया। संयुक्त प्रेस वार्ता में उर्सुला ने कहा कि जब दुनिया में व्यापार को हथियार की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है, ऐसे समय में अपनी ताकत को जोड़कर हम रणनीतिक निर्भरता को कम कर रहे हैं। भारत-ईयू बिजनेस फोरम को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने भी कहा कि आज व्यापार, प्रौद्योगिकी और महत्वपूर्ण खनिजों का विश्व भर में हथियारों के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। एफटीए भारत और यूरोपियन यूनियन के रिश्तों में एक नए युग का शंखनाद है।