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संभाग का सबसे बड़ा ब्लड बैंक: टॉर्च की रोशनी में ब्लड सेपरेशन व एसडीपी करना पड़ता है काम

कोटा. कोटा संभाग का सबसे बड़ा सरकारी ब्लड बैंक एमबीएस अस्पताल परिसर में संचालित होता है, लेकिन अधिकारियों की अनदेखी के कारण व्यवस्थाएं बोनी साबित हो रही है। इमरजेंसी सेवाओं में शामिल होने के बावजूद ब्लड बैंक में पुख्ता व्यवस्थाएं नहीं है। आए दिन बिजली चली जाने से टॉर्च की रोशनी में ब्लड सेपरेशन व एसडीपी का काम करना पड़ता है। तीन साल से जनरेटर सेट खराब पड़ा है, लेकिन उसे भी नहीं सुधारा जा रहा है।

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कोटा

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Abhishek Gupta

Jun 21, 2022

संभाग का सबसे बड़ा ब्लड बैंक: टॉर्च की रोशनी में ब्लड सेपरेशन व एसडीपी करना पड़ता है काम

संभाग का सबसे बड़ा ब्लड बैंक: टॉर्च की रोशनी में ब्लड सेपरेशन व एसडीपी करना पड़ता है काम

कोटा. कोटा संभाग का सबसे बड़ा सरकारी ब्लड बैंक एमबीएस अस्पताल परिसर में संचालित होता है, लेकिन अधिकारियों की अनदेखी के कारण व्यवस्थाएं बोनी साबित हो रही है। इमरजेंसी सेवाओं में शामिल होने के बावजूद ब्लड बैंक में पुख्ता व्यवस्थाएं नहीं है। आए दिन बिजली चली जाने से टॉर्च की रोशनी में ब्लड सेपरेशन व एसडीपी का काम करना पड़ता है। तीन साल से जनरेटर सेट खराब पड़ा है, लेकिन उसे भी नहीं सुधारा जा रहा है। ब्लड बैंक के अधिकारी हर साल व्यवस्थाएं सुधारने के लिए एमबीएस अस्पताल प्रशासन को पत्र व्यवहार करते है, लेकिन व्यवस्थाएं सुधार नहीं रही है।

जनरेटर बदलना था, लेकिन नहीं बदला

ब्लड बैंक में 2008 में 10 किलो वॉट का जनरेटर सेट खरीदा गया था, लेकिन बीते तीन साल से खराब पड़ा है। पिछले साल भी ब्लड बैंक की बिजली व्यवस्था खराब होने पर नया जनरेटर लगाने का आश्वासन दिया था, लेकिन नहीं लगा। इस बार भी ब्लड बैंक में रविवार शाम 4 बजे गुल बिजली 6 बजे बहाल हो सकी। बैकअप नहीं होने से ब्लड सेपरेशन की मशीनों ने जवाब दे दिया। एसडीपी डोनेट करने वाले डोनर तनाव में आ गए। कर्मचारियों को मोबाइल टॉर्च की रोशनी में काम करना पड़ा।

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संभाग भर से आते मरीज

सरकारी ब्लड बैंक में कोटा संभाग से मरीज आते है। पांच हजार तक ब्लड यूनिट की क्षमता है। तीन एसडीपी की मशीनें लगी है, लेकिन एक मशीन में बैकअप की व्यवस्था है। दो में नहीं है। ऐसे में मरीज भी खासे परेशान रहते है।

पूरा रास्ता कीचड़ से सना

सरकारी ब्लड बैंक जाने वाला मार्ग कीचड़ से सना है। हालात यह है कि जरा सी चूक और सीधे कीचड़ में गिरे। मरीज व उनके तीमारदार काफी मुश्किलों से ब्लड बैंक तक जाना पड़ रहा है। रात के समय हालात और खराब रहते है। बिजली की पुख्ता व्यवस्था नहीं होने से अंधेरे में मुश्किलों से ब्लड बैंक तक पहुंचना पड़ता है।

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इनका यह कहना

एमबीएस अस्पताल प्रशासन ने ब्लड बैंक व केन्द्रीय प्रयोगशाला के लिए दो नए इन्वर्टर खरीद लिए है। एक-दो दिन में नए इन्वर्टर लगा दिए जाएंगे। उसके बाद बिजली की समस्या खत्म हो जाएगी।

डॉ. नवीन सक्सेना, अधीक्षक, एमबीएस अस्पताल, कोटा

सरकारी ब्लड बैंक के बाहर भी बारिश के चलते काफी कीचड़ जमा हो चुका है। यूआईटी अधिकारियों से बात की थी। उन्होंने गिटटी डलवाई है। उसे पूरे रास्ते तक फैलाया जाएगा। इससे मरीजों व उनके परिजनों को दिक्कत नहीं आएगी।- डॉ. एचएल मीणा, प्रभारी, ब्लड बैंक, कोटा