
यहां पर तालाब को ही खा रहा 'कमल'
विजय बत्रा. अन्ता. हमारे पुरखों ने मीठे जल स्त्रोतों के रूप में जो विरासत छोड़ी थी। वह हमसे धीरे-धीरे बिछड़ती जा रही है। ऐसे में आने वाली पीढ़ी तो नदी, बावड़ी एवं तालाब को देखने के लिए ही तरस जाएगी। यह जल स्त्रोत पेयजल उपलब्ध कराने के अतिरिक्त कपड़े धोने, पशु पक्षियों की प्यास बुझाने सहित गांव कस्बे का सौंदर्यीकरण भी बढ़ाते थे। किन्तु सार संभाल का अभाव, अतिक्रमण के भार एवं वक्त की मार ने इन्हें बेकार कर दिया। अन्ता से सीसवाली मार्ग पर स्थित खेमजी का तालाब भी इन दिनों ऐसे ही हालात में है। तालाब के पानी में अधिकांश हिस्से पर कमल गट्टे की पौध ने कब्जा जमा लिया है। यह पौध दिनों दिन बढ़ रही है। इससे प्राचीन एवं धार्मिक स्थल पर बने इस तालाब के अस्तित्व पर ही संकट खड़ा होने लगा है।
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जड़ में होते हैं मजबूत कांटे
कमल गट्टे की खासियत है कि यह एक बार जल में पनपने के बाद तेजी से बढ़ती है। जिससे पानी दूषित हो जाने से पीने अथवा नहाने के काम का नहीं रहता। इस पानी के उपयोग से शरीर में खुजली एवं चर्म रोग हो जाते हैं। दूसरी ओर कमल गट्टे की पौध की जड़ में इतने मजबूत कांटे होते हैं कि भैंस जैसे मजबूत शरीर वाला पशु भी इनके जाल में उलझ जाए तो बाहर नहीं निकल पाता। ऐसे में पशु पेयजल का स्त्रोत भी खत्म हो जाता है।
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पहले भी दो तालाब हो गए अनुपयोगी
उल्लेखनीय है कि निकटवर्ती ग्राम पंचायत मुख्यालय काचरी में स्थित लगभग 18 बीघा क्षेत्रफल में फैले विशाल तालाब सहित पलसावा गांव का तालाब कमल की पौध पनप जाने से लम्बे समय से अनुपयोगी हो गए हैं। यह तालाब पूर्व में बारहों महीने पानी से लबालब रहते थे। वहीं इनके पानी से ग्रामवासियों एवं पशुु पक्षियों का गला तृप्त होने के अलावा खेतों में सिंचाई की जाती थी। यत तालाब नहाने का लुत्फ उठाने सहित महिलाओं के लिए कपड़े धोने का भी सुलभ माध्यम थे। किन्तु कमल गठ््ठे का कब्जा होने के बाद अब इन परम्परागत् जलस्त्रोत में जमा पानी किसी काम का नहीं रहा।
4.50 करोड़ से बने उद्यान पर भी संकट
उल्लेखनीय है कि बाबा खेमजी महाराज तालाब की पाल पर लगभग 4.50 करोड़ रुपयों की लागत से उद्यान विकसित किया गया है। यहां बने टे्रक पर दौड़ लगाने एवं योगा करने का लाभ भी लोगों को मिलने लगा है। इस आकर्षक उद्यान में सैंकड़ों किस्मं के आकर्षक पौधे, लाल पत्थर से निर्मित मंदिर के चबूतरे, तालाब पर नहाने के लिए घाट, पाल के चारों और लाल पत्थर की आकर्षक चारदीवारी आदि का निर्माण दो साल पूर्व ही हुआ है। ऐसे में यहां सैर को आने वाले नागरिकों की संख्या दिनों दिन बढ़ रही है। किन्तु अब तालाब के पानी पर कब्जा करती कमल गट्टे की पौध चिन्ता का विषय है। जिसे पूरी तरह फैलने से पूर्व ही आधुनिक मशीनों से साफ किए जाने की मांग प्रबुद्ध नागरिकों ने की है।
Published on:
11 Sept 2020 12:00 am
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